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और बढ़ी सामरिक साझेदारी

अजय शुक्ला /  February 25, 2020

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की दो दिवसीय भारत यात्रा दोनों देशों के बीच सामरिक तथा रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित रही। हालांकि कारोबार या परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों पर गतिरोध को खत्म करने वाले करार नहीं हो पाए।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बातचीत के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'आज राष्ट्रपति ट्रंप और मैंने हमारी साझेदारी को व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला लिया है।' मोदी और ट्रंप ने क्वाड्रिलेटरल इनिशिएटिव (क्वाड) को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। यह हिंद-प्रशांत रणनीतिक तानेबाने का एक अहम हिस्सा बन सकता है। यह उन लोकतांत्रिक देशों को एक साथ ला रहा है, जो चीन के उभार से चिंतित हैं। 

 
ट्रंप ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी और मैं अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान की क्वाड पहल में नई जान डाल रहे हैं। मेरे कार्यभार संभालने के बाद हमने पहली क्वाड मंत्रिस्तरीय बैठक की। मेरा अनुमान है कि आप इसे बैठक कहेंगे, लेकिन यह उससे बहुत अधिक है। इसके तहत आतंक निरोधी, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त खुला रखा जा सके।' बीते 15 वर्षों के दौरान भारत क्वाड और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी सेना के साथ सैन्य अभ्यास करके चीन से दूर रहा है। मोदी ने कहा, 'बीते कुछ वर्षों के दौरान हमारी सेनाओं के बीच सहयोग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है।'
 
ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की कि भारत की सेना ने सैन्य हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए बोइंग और लॉकहीड मार्टिन के साथ करार किए हैं। ट्रंप ने कहा, 'आज हमने अपना रक्षा सहयोग बढ़ाया है। इसमें भारत तीन अरब डॉलर की राशि में अपाचे और एमएच-60 रोमियो हेलिकॉप्टरों समेत आधुनिक अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदेगा, जो दुनिया में सबसे बेहतर हैं। इन सौदों से हमारी संयुक्त रक्षा क्षमताओं में बढ़ोतरी होगी क्योंकि हमारी सेनाएं लगातार कंधे से कंधा मिलाकर सैन्य अभ्यास कर रही हैं।'
 
ट्रंप को अमेरिका के साथ भारत का 24 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष खटकता है। हालांकि इन सौदों से भारत की अमेरिका के रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़कर 20 से 21 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगी। अमेरिका की विनिर्माता कंपनी बोइंग के मुताबिक भारतीय सेना को दुश्मन पर हमला करने वाले अपाचे हेलिकॉप्टर अपने एएच-64ई कॉन्फिगरेशन में मिलेंगे, जिनकी आपूर्ति 2023 से शुरू होगी।  यह अपाचे हेलिकॉप्टर का नया संस्करण है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना ने 2011 में करना शुरू किया था। बोइंग का कहना है कि उसके पास 26 नई उन्नत तकनीक हैं, जिनमें ज्यादा शक्तिशाली इंजन, कंपोजिट रोटर ब्लेड और मानव रहित हवाई यानों को नियंत्रित करने की क्षमता आदि शामिल है। 
 
दुनियाभर में 2,400 अपाचे हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल हो रहा है, जिनमें से 400 से अधिक ताजा एच-64ई मॉडल के हैं। भारतीय वायु सेना पहले ही 22 अपाचे एच-64ई खरीद चुकी है, जो मई तक देश में पहुंचेंगे।  सेना ने अब छह अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदे हैं, लेकिन ये एक स्ट्राइक कॉप्र्स की जरूरत भी पूरी नहीं कर सकते हैं। इसलिए भविष्य में और अपाचे खरीदे जाने के आसार हैं। हैदराबाद स्थित कंपनी टाटा बोइंग एयरोस्पेस लिमिटेड (टीबीएएल) पहले ही दुनियाभर के बहुत से अपाचे ऑपरेटर्स के लिए हेलिकॉप्टर फ्यूजलिज का विनिर्माण करती है। टीबीएएल टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और बोइंग का संयुक्त उद्यम है। 
 
मोदी ने कहा कि भारत में ऐसे विनिर्माताओं की संख्या बढ़ रही है, जो वैश्विक वेंडरों के लिए उन्नत रक्षा और अंतरिक्ष कलपुर्जों का विनिर्माण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों और प्लेटफॉर्म में सहयोग से भारत की रक्षा क्षमताओं में इजाफा होगा। हमारे रक्षा विनिर्माता एक-दूसरे की आपूर्ति शृंखलाओं का हिस्सा बन रहे हैं।' भारत में अमेरिका के हथियारों की खरीद बढ़ रही है और भारतीय विनिर्माता वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ रहे हैं। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि उनके बीच तकनीक साझा करने के क्षेत्र में संबंध मजबूत नहीं हो रहे हैं, जो भारत चाहता है। इसमें उपकरणों की डिजाइन और विकास साथ मिलकर करना है ताकि भारतीय कंपनियां को इनके विनिर्माण की जानकारी प्राप्त हो सके और वे यह जान सकें कि क्यों स्वदेशी हथियार विकसित करने की जरूरत है। 
 
भारत के एक रक्षा विज्ञानी ने कहा, 'भारत और अमेरिका ने रक्षा तकनीक एवं व्यापार पहल (डीटीटीआई' शुरू की थी, लेकिन इससे एक भी सफल परियोजना सामने नहीं आई है।' ट्रंप-मोदी की बैठक में महत्त्वाकांक्षी डीटीटीआई परियोजना- भारत के दूसरे स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विशाल की डिजाइन में अमेरिकी सहायता के बारे में कुछ नहीं कहा गया। अमेरिका इस बात को लेकर चिंतित है कि भारत का रक्षा बजट स्थिर बना हुआ है, इसलिए वह ऐसी परियोजनाओं में मामूली वित्तीय सहायता दे सकता है।
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