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मॉरिशस से नए एफपीआई पंजीकरण को होगी अनुमति

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई February 25, 2020

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)ने आज कहा है कि मॉरिशस के विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बढ़ी हुई निगरानी के साथ पंजीकरण की योग्यता बनी रहेगी। इस स्पष्टीकरण से खासी राहत मिली है। सरकार के वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) ने धनशोधन निरोधक मानक तय किए हैं, जिसकी वजह से मॉरिशस को 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया गया है, जिसे लेकर बाजार के कारोबारियों में अनिश्चितता पैदा हो गई थी। एक बड़े विदेशी कस्टोडियन ने सोमवार को मॉरिशस के कारोबारियों को रोक दिया था और यह चिंता जताई जा रही थी कि अन्य भी ऐसा ही करेंगे व सभी नए पंजीकरण व मॉरिशस के माध्यम से खरीद रोक दी जाएगी। 
 
एक अन्य कस्टोडियन ने एक नोट जारी कर कहा था कि मॉरिशस से इस समय पंजीकृत एफपीआई को इक्विटी, डेट और हाइब्रिड सिक्योरिटी या नए डेरिवेटिव्स पोजिशन में 28 फरवरी से अनुमति नहीं दी जाएगी। कस्टोडियंस ने खरीद के लिए ऐसे एफपीआई के खातों को ब्लॉक कर दिया था और सिर्फ कारोबारियों को बिक्री की अनुमति दी थी। कस्टोडियंस ने इसके लिए सेबी से स्पष्टीकरण की मांग की थी। वे चाहते थे कि सेबी अधिसूचना पर फिर से विचार करे। जब अधिकार क्षेत्र को 'ग्रे लिस्ट' में डाल दिया जाता है तो इसका मतलब होता है कि देश चिह्नित की गई रणनीतिक खामियों का समाधान सहमति के मुताबिक तय समयसीमा में करने को प्रतिबद्ध है और यह बढ़ी हुई निगरानी के अधीन है। 
 
मंगलवार को सेबी की ओर से जारी एक नोट में कहा गया है, 'एफएटीएम ने बढ़ी हुई कानूनी जरूरतों के लिए आवेदन की मांग नहीं करेगा, जो इन अधिकार क्षेत्रों पर लागू होगा, बल्कि उसने अपने सदस्यों को अपने जोखिम विश्लेषण के बारे में सूचनाएं रखने को प्रोत्साहित किया है। इंटरमीडिएटरीज को भी इसे संज्ञान में लेना चाहिए।' सेबी के मौजूदा दिशानिर्देशों में कहा गया है कि एफएटीएफ द्वारा चिह्नित किए गए रणनीतिक धनशोधन निरोधक या आतंकी वित्तपोषण की खामियों वाले निवेशकों को एफपीआई के रूप में पंजीकरण के योग्य नहीं माना जाएगा। एफपीआई ऐसे अधिकार क्षेत्र से नहीं होने चाहिए, जिसने इन खामियों को दूर करने की दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं की है या ऐसा करने के लिए कार्ययोजना के लिए प्रतिबद्ध नहीं है। 
 
खेतान ऐंड कंपनी में पार्टनर दिवास्पति सिंह ने कहा, 'एफएटीएफ ने जहां मॉरिशस को बढ़ी निगरानी की सूची में डाल दिया है, इसमें वित्तीय रोक या प्रतिबंधों की बात नहीं की गई है। इस हिसाब से तात्कालिय नियामकीय प्रभाव सीमित हो सकता है।' बहरहाल उन्होंने कहा कि ग्रे लिस्ट का हिस्सा होने की वजह से धारणा संबंधी बड़ा मसला बनेगा, खासकर बड़े निवेशकों जैसे पेंशन, एंडाउनमेंट और सॉवरिन वेल्थ फंड के मामलों में, जिनका निवेश चार्टर मॉरिशस के माध्यम से निवेश को प्रतिबंधित कर सकता है। 
 
पिछले साल से मॉरिशस अंतरराष्ट्रीय कर मानकों के अनुपालन की कवायद कर रहा है। इसमें ऑफशोर फंड ढांचों की जांच की दिशा में कदम बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। एफएटीएफ ने पाया, '2018 में एमईआर (म्युचुअल इवैलुएशन रिपोर्ट) पूरा करने के बाद मॉरिशस ने अपने एमईआर में कार्रवाई को लेकर की गई सिफारिशों की दिशा में कई प्रगति की है। वहां कानूनी ढांचे व कानूनी व्यवस्थाओं सहित तकनीकी अनुपालन में सुधार की है, जिससे अपराधों को रोका जा सके।' विशेषज्ञों का कहना है कि मॉरिशस के करीब 80 प्रतिशत एफपीआई को पहले ही सेबी ने श्रेणी 2 में वर्गीकृत कर रखा है। ग्रे सूची के दर्जे से इन फंडों के श्रेणी 1 में आने की उम्ी धूमिल होती है। उन्होंने कहा कि शेष 20 प्रतिशत फंड, जो श्रेणी 1 में हैं, वह भी नई स्थिति के कारण श्रेणी 2 में जा सकते हैं। 
Keyword: FPI, invest, equity, SEBI,,
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