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एयर इंडिया की दौड़ में अदाणी

अनीश फडणीस और देव चटर्जी / मुंबई February 24, 2020

एयर इंडिया के अधिग्रहण की दौड़ में अदाणी समूह शामिल हो गया है और उसकी योजना अगले महीने अभिरुचि पत्र जमा कराने की है। एक सूत्र ने यह जानकारी दी। इस पर अंतिम फैसला हालांकि अभिरुचि पत्र जमा कराए जाने के बाद ड््यू डिलिजेंस यानी जांच परख पर निर्भर होगा। अभिरुचि पत्र जमा कराए जाने से अदाणी समूह को संभावित बोलीदाताओं के डेटा रूम तक पहुंच मिल जाएगी। अदाणी समूह के अलावा टाटा समूह, हिंदुजा समूह, इंडिगो एयरलाइन और न्यू यॉर्क की फंड इंटरप्स इसके लिए अभिरुचि पत्र जमा करा सकते हैं।
 
अदाणी समूह की महत्वाकांक्षा भारत में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऑपरेटर के तौर पर उभरने की है और उसकी झोली में तीन हवाईअड्डे लखनऊ, अहमदाबाद और मेंगलूरु हैं। कंपनी तीन अन्य हवाईअड्डों तिरुवनंतपुरम, अहमदाबाद और गुवाहाटी के लिए सरकार की मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही है। इस बारे में अदाणी समूह के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विश्लेषकों का हालांकि मानना है कि हवाईअड्डों के स्वामित्व के कारण एयर इंडिया के लिए समूह की बोली कानूनी चुनौतियों का सामना कर सकती है। एयर इंडिया के लिए बोली लगाने की खातिर किसी एयरपोर्ट डेवलपर पर हालांकि पाबंदी नहीं है, लेकिन अदाणी समूह को मिले एयरपोर्ट अथॉरिटी के छह हवाईअड्डों की बोली की शर्तों में स्वामित्व की सीमा है।
 
बोली के मानकों के मुताबिक, कोई विमानन कंपनी या समूह (विमानन के स्वामित्व वाला) इन छह हवाईअड्डों में 27 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं ले सकता और यह समूह के लिए मामला जटिल बना सकता है। किसी विमानन कंपनी या समूह के लिए दिल्ली एयरपोर्ट की 10 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी सीमा से हाल में जीएमआर में टाटा-जीआईसी समूह का निवेश नहीं हो पाया। एयर इंडिया की बिक्री प्रक्रिया से जुड़े एक बैंकर ने कहा, मौजूदा नियम अदाणी समूह को एयरलाइंस के लिए बोली लगाने से नहीं रोकेगा। सूत्र ने कहा, हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा कंपनी बोली लगाए क्योंकि कंपनी का 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज अलग किए जाने और सरकार की तरफ से 100 फीसदी हिस्सेदारी की पेशकश उसे अच्छी परिसंपत्ति बनाता है।
 
विमानन कंपनी बेचने की यह सरकार की दूसरी कोशिश है जब पिछले साल पहले दौर में उसे कोई भी खरीदार नहीं मिला। तब सरकार ने कंपनी की 76 फीसदी के बजाय 100 फीसदी हिस्सेदारी की पेशकश की। एयर इंडिया और उसकी सहायक एयर इंडिया एक्सप्रेस के करीब 120 विमान वित्त वर्ष 2018 के आखिर में थे जबकि पिछले साल सितंबर तक 126 विमान थे।  निजी कंपनी को एयर इंडिया की बिक्री सरकार के लिए अहम है क्योंंकि साल 2012 से सरकार को इस कंपनी में 30,000 करोड़ रुपये झोंकने पड़े हैं। विमानन कंपनी को हालांकि साल 2007 में एयर इंडिया व इंडियन एयरलाइंस के विलय का फायदा नहीं मिला है।
 
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