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भविष्य में बैंकों के हो सकते हैं अलग-अलग क्षेत्र

अनूप रॉय / मुंबई February 24, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज कहा कि भविष्य के बैंक इस समय के बैंकों से बिल्कुल अलग होंगे और इन अलग क्षेत्र के बैंकों का नियमन करना नियामक के लिए चुनौतीपूर्ण काम होगा। आर्थिक समाचार पत्र मिंट के सालाना बैंकिंग कार्यक्रम में दास ने कहा कि ऐसी स्थिति में भारत में काम करने वाली वित्तीय फर्मों के समाधान के लिए निकट भविष्य में एकीकृत ढांचे की उम्मीद की जा सकती है, जिससे वित्तीय व्यवस्था में लचीलापन आ सके। इस समय फाइनैंशियल टेक्नोलॉजी कंपनयां मौजूदा बैंकों के सामने चुनौतियां पेश कर रही हैं, लेकिन तमाम बड़ी तकनीकी कंपनियां या बिगटेक्स हैं, जो वित्तीय सेवा उद्योग में व्यापक रूप से प्रवेश कर रही हैं। कुछ बिगटेक्स अपने डेटा नेटवर्क गतिविधियों पर निर्भर हैं, वहीं कुछ पेमेंट्स, धन प्रबंधन, बीमा और कर्ज देने की गतिविधियों में संयुक्त उद्यम बना रही हैं। 
 
दास ने कहा, 'इस समय वित्तीय सेवाएं उनके वैश्विक कारोबार का छोटा हिस्सा हैं। लेकिन उनके आकार और पहुंच को देखते हुए वित्तीय सेवा में उनके प्रवेश से वित्तीय क्षेत्र में तेज बदलाव लाने की क्षमता है। इन फर्मों के प्रवेश से तमाम लाभों की संभावना है और वे कम लागत पर बड़ी संख्या में लोगों को बुनियादी वित्तीय सेवाएं मुहैया करा सकती हैं।' लेकिन फिनटेक और बिगटेक्स का आगमन बैंकों और इसके साथ ही बैंकिंग नियामक के लिए चुनौती है। प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए बैंक नई तकनीक और कारोबार को अपना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बैंकिंग नियामक नवोन्मेष को प्रोत्साहित करने और उसी अनुपात में निरीक्षण व नियामकीय ढांचा बनाने में संतुलन स्थापित करने में लगे हैं। 
 
दास ने अपने भाषण में कहा, 'इसका मतलब यह है कि बैंकिंग का भविष्य पिछली व्यवस्था की निरंतरता नहीं रहने जा रही है। ढांचे और कारोबारी मॉडल के हिसाब से आगामी वर्षों में हम बहुत अलग तरह का बैंकिंग सेक्टर देखेंगे।' बैंकों की अलग अलग श्रेणियां हो सकती हैं। पहली श्रेणी बड़े भारतीय बैंकों की हो सकती है, जिनकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी होगी, जिसके लिए सरकारी क्षेत्रों के विलय की प्रक्रिया पहले से चल रही है। दूसरे सेग्मेंट में मझोले आकार के बैंक और तीसरे सेग्मेंट में छोटे निजी क्षेत्र के बैंक, लघु वित्त बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक हो सकते हैं। चौथी श्रेणी डिजिटल प्लेयर्स की हो सकती है, जो सीधे ग्राहकों के सेवा प्रदाता के रूप में या बैंकों के माध्यम से उनके एजेंट या सहयोगी के रूप में काम कर सकते हैं। 
 
हर स्थिति में परंपरागत बैंकिंग व्यवस्था नई पीढ़ी की बैंकिंग के लिए राह बनाएगी, जिसमें डिजिटलीकरण व आधुनिकीकरण पर ध्यान होगा, जिसमें परंपरागत बैंक शाखाओं की लगातार समीक्षा की जरूरत होगी। गवर्नर ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) जल्द ही एक सहायक इकाई स्थापित करने पर फैसला करेगा, जिसका ध्यान अन्य देशों के लिए यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) मॉडल पर होगा, जो भारत की भुगतान व्यवस्था की वैश्विक पहुंच बढ़ाएगा। खुदरा भुगतान के लिए एक नई इकाई से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और खुदरा भुगतान क्षेत्र में आगे और नवोन्मेष होगा, जिसके लिए मसौदा दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
 
रिजर्व बैंक के गवर्नर के मुताबिक इंपेयर्ड एसेट में कमी और प्रॉविजनिंग में उल्लेखनीय सुधार के बावजूद बैंकिंग क्षेत्र के मुनाफे की स्थिति नाजुक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पूंजीकरण में सुधार हुआ है, लेकिन दूरसंचार जैसे क्षेत्रों से लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, 'इसकी वजह से गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) उच्च स्तर पर बनी हुई है और कर्ज की वृद्धि दर प्रभावित हो रही है।' बैंकों ने अपना ध्यान बड़े बुनियादी ढांचा क्षेत्र और औद्योगिक कर्ज से अपना ध्यान हटाकर खुदरा कर्ज पर केंद्रित कर दिया है, लेकिन विविधीकरण की इस रणनीति की अपनी सीमाएं हैं। 
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