बिजनेस स्टैंडर्ड - तेल में नरमी से कंपनियों को मदद
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तेल में नरमी से कंपनियों को मदद

उज्ज्वल जौहरी /  February 23, 2020

कच्चे तेल में कमजोरी बनी हुई है क्योंकि चीन में कोरोनावायरस के प्रभाव से वैश्विक मांग पर नकारात्मक असर दिख सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी ने तेल मांग को लेकर अपना अनुमान घटा दिया है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) ने 2020 की वैश्विक तेल मांग वृद्घि के लिए अपने अनुमान को कुछ दिन पहले 9.9 लाख बैरल प्रतिदिन तक घटा दिया। अमेरिका के हाथों बाजार भागीदारी खोने की आशंका को देखते हुए भले ही मांग वृद्घि का अनुमान घटा दिया गया है, लेकिन ओपेक उत्पादन कटौती पर विचार नहीं कर सकता है जिससे तेल कीमतें कमजोर बनी रह सकती हैं। यह परिदृश्य हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) जैसी तेल विपणन कंपनियों के लिए सकारात्मक है। 

 
तेल कीमतों में नरमी से भारत की प्रमुख ईंधन विक्रेता कंपनियों को अपनी कार्यशील पूंजी जरूरतें बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और अपने विपणन मार्जिन में सुधार लाने में मदद मिलेगी। कच्चे तेल की कीमत 2020 के शुरू में 69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं, जो अब 59-60 डॉलर प्रति बैरल पर हैं और भविष्य में कमजोर बने रहने की संभावना है। पिछले एक महीने के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बाजार धारणा प्रभावित हुई है क्योंकि सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) परिदृश्य भी कमजोर बना हुआ है।
 
आईओसी और एचपीसीएल के शेयरों में भी 2020 के शुरू से अब तक 11-18 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। कंपनी के निजीकरण की सरकार की योजना की वजह से बीपीसीएल काफी हद तक स्थिर (सिर्फ 4 प्रतिशत की गिरावट) बना रहा। हालांकि विश्लेषक इस शेयर में अवसर देख रहे हैं। भले ही अंतरराष्ट्रीय तेल मांग और कीमतें कमजोर बनी रह सकती हैं, लेकिन विश्लेषकों को भारत से मजबूत मांग की उम्मीद है। विश्लेषकों को ओएमसी के लिए मजबूत विपणन मार्जिन की उम्मीद है। विश्लेषकों को देश में मध्यावधि के दौरान 4-5 प्रतिशत की तेल मांग वृद्घि बरकरार रहने की संभावना है। 
 
तेल कीमतों में कमजोरी के बीच तरलीकृत पेट्रोलियम गैस और केरोसिन की कीमतों में बदलाव से मदद मिल सकती है और सरकार पेट्रोलियम क्षेत्र में नुकसान से बच सकती है। ओएमसी में एचपीसीएल एचडीएफसी सिक्योरिटीज के नीलेश घुघे जैसे विश्लेषकों का पसंदीदा बना हुआ है। आईओसी और बीपीसीएल भी अपने विपणन व्यवसाय में वृद्घि दर्ज करेंगी और कार्यशील पूंजी के मोर्चे पर इनकी आय रिफाइनिंग मार्जिन में तेजी पर निर्भर है। एचपीसीएल अपना 50 प्रतिशत से ज्यादा परिचालन लाभ तेल विपणन व्यवसाय से प्राप्त करती है जिससे मौजूदा कमजोर जीआरएम परिवेश में उसकी आय को मदद मिल सकती है। 
 
222. रुपये पर, यह शेयर अपने ऐतिहासिक पांच वर्षीय औसत के मुकाबले 35 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है। 1.3 गुना के 2021-22 के अनुमानित पी/बी वैल्यू मल्टीपल के साथ मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने इस शेयर के लिए 340 रुपये का कीमत लक्ष्य रखा है। वहीं एडलवाइस और एचडीएफसी सिक्योरिटीज का कीमत लक्ष्य 322 रुपये और 315 रुपये पर है जिससे एचपीएलसी के लिए अच्छी तेजी का संकेत मिलता है। आईओसी के लिए, मुख्य रिफाइनिंग मार्जिन, बीएस-6 अपग्रेड के लिए हल्दिया और मथुरा रिफाइनरियों में कामकाज बंद रहने और कमजोर पेट्रो रसायन मूल्य निर्धारण परिदृश्य अल्पावधि चिंताएं बनी हुई हैं। दिसंबर तिमाही के दौरान, हल्दिया और मथुरा में बीएस-6 की वजह से परिचालन बंद रहने से आईओसी का रिफाइनिंग मार्जिन सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत तक घटा। हालांकि इन्वेंट्री बढऩे से रिफाइनिंग मार्जिन को कुछ मदद मिली, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। विश्लेषकों का कहना है कि लेकिन मार्च तिमाही में कंपनी इन्वेंट्री नुकसान दर्ज कर सकती है। कमजोर पेट्रो रसायन कीमत परिदृश्य भी प्रेरक नहीं है। हालांकि शेयर में कुछ सुधार देखा जा सकता है और इसे आईओसी के विपणन सेगमेंट में तेजी आने से मदद मिल सकती है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मूल्यांकन सस्ता है। बिक्री की खबरें भी एचपीसीएल में किसी तरह की तेजी के लिए महत्त्वपूर्ण होंगी। विश्लेषकों का कहना है कि किसी बड़े निवेशक/खरीदार को सफल बिक्री से इस शेयर के लिए उनके कीमत लक्ष्य में इजाफा हो सकता है। 
Keyword: Corona virus, china, india, crude oil, gas,,
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