बिजनेस स्टैंडर्ड - दलहन के दाम एमएसपी से कम
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दलहन के दाम एमएसपी से कम

दिलीप कुमार झा / मुंबई February 23, 2020

रबी की कटाई में कुछ ही सप्ताह का समय रहने के कारण चुनिंदा मंडियों में दलहन के दाम गिरकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी कम स्तर पर चल रहे हैं। एमएसपी वह सीमा होती है जिस पर सरकार जिंस की खरीद करती है। जहां एक ओर कर्नाटक के गडग में चना अपने एमएसपी 4,620 रुपये प्रति क्विंटल से 11 प्रतिशत कम 4,122 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर बिक रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के नसरूल्लागंज में मूंग के दाम अपने एमएसपी 7,050 रुपये प्रति क्विंटल से 26 प्रतिशत फिसलकर 5,201 रुपये प्रति क्ंिवटल पर आ गए हैं। इसी तरह तुअर (अरहर), मसूर और उड़द भी फिलहाल अपने एमएसपी की तुलना में काफी कम दामों पर बिक रही हैं।
 
रबी के कटाई सत्र से पहले दलहन के दामों में यह गिरावट उन किसानों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है, जो इस साल कम रकबे के कारण बेहतर आमदनी की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि दलहन के दामों में गिरावट पर विशेषज्ञों की अलग राय है। मुंबई के दलहन कारोबारी पंचम इंटरनैशनल के प्रबंध निदेशक विमल कोठारी ने कहा कि नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार से सड़क परिवहन के जरिये मटर की बड़ी मात्रा में भारत में तस्करी की जा रही है। इनमें से कोई भी देश मटर की खेती नहीं करता है। यह मटर कनाडा और अन्य देशों से आयात की जाती है। चूंकि इस तस्करी से 50 प्रतिशत की भारी कर चोरी होती है, इसलिए ऐसे आयात में सस्ती दर पर अपना माल बेचने की गुंजाइश रहती है। इससे भारत में दलहन के दाम कम हो रहे हैं।
 
निजी कंपनी नैशनल कोलैटेरल मैनेजमेंट सर्विसेज (एनसीएमएल) ने पूर्वानुमान जताया है कि इस साल देश में रबी का दलहन उत्पादन 2.1 प्रतिशत तक गिरकर 1.448 करोड़ टन रहेगा, जबकि पिछले साल इस सत्र में 1.48 करोड़ टन उत्पादन दर्ज किया गया था। देश के दलहन उत्पादन में रबी सत्र का योगदान करीब 60 प्रतिशत रहता है। शेष योगदान खरीफ सत्र का रहता है। इसकी नवीनतम रिपोर्ट में रबी कटाई के आगामी सत्र के दौरान चने का उत्पादन 5.4 प्रतिशत गिरकर 95.8 लाख टन रहने का पूर्वानुमान जताया गया है, जबकि पिछले साल 1.013 करोड़ टन उत्पादन दर्ज किया गया था।
 
मटर आयात को हतोत्साहित करने और देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने मटर पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया था। इसके अतिरिक्त न्यूनतम आयात मूल्य के रूप में प्रति किलोग्राम 200 रुपये निर्धारित किए गए थे। इससे कनाडा, रूस या यूक्रेन से मटर की आयात लागत 325 रुपये प्रति किलोग्राम बैठती है। करोबारियों के लिए कुछ लाभ के साथ न्यूनतम खुदरा दाम 350 से 375 रुपये रहना आदर्श स्थिति होती है। कोठारी ने कहा कि चना मटर का विकल्प होता है और इस कारण कारोबारी घरेलू किसानों को नुकसान पहुंचाते हुए अवैध तरीके से विदेशों से इसकी आपूर्ति बढ़ाने का काम कर रहे हैं। ऐसा अवैध कारोबार तत्काल रोकने की जरूरत है।
 
इस बीच राजस्थान दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबूलाल गोयल ने दलहन के दामों में गिरावट पर अलग दास्तान बयां की। गोयल ने कहा कि डब्बा कारोबारी (जो द्विपक्षीय कारोबार में बोली के लिए जिंस एक्सचेंजों पर प्रचलित दामों को रेफ्रेंस प्वाइंट के रूप में प्रयोग करते हैं) मौजूदा कटाई सत्र के दौरान अपना स्टॉक तैयार करने और भविष्य में इसके दाम बढऩे पर मुनाफा पाने का अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए चने के दाम कम बोल रहे हैं। इसलिए डब्बा कारोबार पर रोक लगाई जानी चाहिए।
 
गोयल के अनुसार सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और व्यापार के लिए उपलब्ध दलहन की पूरी मात्रा की खरीद करनी चाहिए। खास तौर पर ऐसे समय में जब दाम एमएसपी से नीचे चले जाएं। गोयल ने कहा कि सरकार ने पिछले साल कमजोर सत्र में बेचने के लिए एमएसपी पर करीब 20 लाख टन दलहन खरीदी थी। लेकिन बिक्री ऐसे समय में की जाती है, जब दलहन के दाम एमएसपी से नीचे जा चुके हैं। इससे सरकार को भारी नुकसान हो रहा है। गोयल ने कहा कि कटाई सत्र में दलहन के दामों में गिरावट से किसानों की आमदनी कम होने वाली है। इससे उन्हें दबाव में आकर बिक्री करनी होगी और इसके परिणामस्वरूप उनका कर्ज बढ़ेगा।
Keyword: agri, farmer, crop, pulses, MSP,,
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