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पीएमओ ने बैंकों से मांगा विलय के बाद का अनुमान

सोमेश झा / नई दिल्ली February 23, 2020

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने 10 सरकारी बैंकों के प्रस्तावित विलय के फायदों को लेकर कुछ अहम ब्योरों की मांग की है, जबकि बैंक  सरकार से जरूरी मंजूरियों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। योजना के मुताबिक प्रमुख बैंक पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी), केनरा बैंक, यूनियन बैंक आफ इंडिया और इंडियन बैंक को 6 अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू) का अधिग्रहण करना है। इन प्रमुख बैंकों से कहा गया है कि वे अगले 3 से 5 साल  के वित्तीय अनुमान का काम पूरा करके वित्तीय सेवा विभाग को सौंपे। 
 
एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा कि सरकार ने बैंकों से कहा है कि पूंजी और बॉन्ड बाजारों से धन जुटाने की अपनी योजनाओंं की जानकारी दें। अधिकारी ने कहा, 'प्रधानमंत्री कार्यालय ने बैंकों से शाखाएं व एटीएम बंद करने की योजना और विलय की प्रक्रिया के बाद अगले तीन साल में होने वाली बचत के बारे में जानकारी मांगी है।' बैंकों से कहा गया है कि वे विलय प्रक्रिया के बाद कॉर्पोरेट, एमएसएमई, कृषि और खुदरा क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज के अनुमान के आंकड़े तैयार रखें। इसके अलावा पिछले 2 साल के क्षेत्रवार कर्ज के आंकड़े तैयार करें। इसके साथ ही बैंकों को अपने तकनीकी और तकनीकी एकता का खाका सौंपना होगा।  एक और सरकारी बैंंक के अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'प्रमुख बैंकों से एकीकरण प्रक्रिया के लाभों की जानकारी मांगी गई है।' 
 
पिछले हफ्ते बिजनेस स्टैंडर्ड ने खबर दी थी कि केंद्र सरकार सरकारी बैंकों के विलय की राह पर बहुत सावधानी से आगे बढ़ रही है, जबकि इन बैंकों की बैलेंस सीट विलय की तय तिथि 1 अप्रैल है और अब बहुत कम वक्त बचा है।   एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 सरकारी बैंकों के विलय पर अंतिम फैसला करने केपहले बैंंक आफ बड़ौदा (बीओबी) के विलय के परिणामों को देखना चाहते हैं। वित्त मंत्रालय जल्द ही अंतिम फैसले के पहले प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुति दे सकता है। 
 
उपरोक्त उल्लिखित एक बैंंक अधिकारी ने कहा, 'इन बैंकों को मिलाए जाने की प्रक्रिया का तात्कालिक लाभ लागत को तार्किक बनाना बताया गया है, जो इसका अहम पहलू है। लेकिन हम सरकारी बैंक हैं ऐसे में कर्मचारी घटाने के लिए तत्काल शाखाओं को बंद नहीं किया जा सकता। इसलिए हमने सरकार से इस कवायद के दीर्घकालिक लाभों के बारे में बताया है।'  बैंकों द्वारा विलय का एक लाभ यह बताया गया है कि उनकी पूंजी का आधार ज्यादा हो जाएगा, जिससे उन्हें बड़े कर्ज देने में सहूलियत होगी। 
 
बैंक आफ बड़ौदा के हाल के वित्तीय परिणाम से सरकार की चिंता बढ़ी है, जिसने 1 अप्रैल 2019 को देना बैंक और विजया बैंक का अधिग्रहण कर लिया था। बैंक को तीसरी तिमाही में 1,407 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ है, जो मुख्य रूप से ज्यादा प्रावधान की वजह से है। बैंक की ताजा चूक बढ़कर करीब 10,387 करोड़ रुपये हो गई है, यह अच्छे से खराब कर्ज में बदल गई राशि है।  दिसंबर अंत की तिमाही में कर्ज की वृद्धि का अनुमान 10 प्रतिशत की तुलना में स्थिर रहा। विलय योजना से जुड़ी सरकार की अधिसूचना में देरी हो रही है, जो बैंकों के बोर्डों की चिंता बढ़ा रही है। अगले वित्त वर्ष की शुरुआत 1 अप्रैल 2020 तक विलय प्रक्रिया पूरी होने की संभावना थी। 
 
बहरहाल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन्हें देरी की कोई वजह नजर नहीं आती। शनिवार को वित्त मंत्री ने कहा था, 'जब फैसला हो जाएगा तो इसके बारे में आपको जानकारी मिल जाएगी।' सीतारमण ने पिछले साल 30 अप्रैल को 10 बैंकों के इस बड़े विलय की घोषणा की थी।  
Keyword: bank, merge, budget, PMO,,
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