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भारत में बिताए दिनों का रखें खास ध्यान

संजय कुमार सिंह /  February 23, 2020

वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में निवास के उन नियमों को बदला गया है, जिनसे व्यक्ति की आमदनी पर कर तय किया जाता है। ये नियम लागू होने के बाद हर साल भारत आने वाले अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) और काम के सिलसिले में साल के काफी दिन विदेश में बिताने वाले कारोबारियों और पेशेवरों को देश में रहने के दिनों का ध्यान रखना होगा और अपने दर्जे के आधार पर अपना कर भरना होगा। ऐसा न करने पर वे आयकर प्राधिकरणों के जाल में फंस सकते हैं। 

 
182 दिन की सीमा घटाई 
 
निवास के नियम इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि उनसे ही यह तय होता है कि व्यक्ति पर किस तरह कर लगेगा। इस समय उस व्यक्ति को भारत का निवासी माना जाता है, जो देश में 182 दिन या उससे अधिक रहता है या एक साल में भारत में 60 दिन और पिछले चार वर्ष में कुल 365 दिन रहता है। अगर कोई व्यक्ति इन दोनों शर्तों में किसी एक को भी पूरा करता है तो उसे भारत का नागरिक माना जाता है। अगर कोई भारतीय नागरिक रोजगार के लिए देश से बाहर जाता है तो केवल 182 दिन की शर्त लागू होती है। उन पर 60 दिन और 365 दिन का मापदंड लागू नहीं होता है। यह नियम भारत से बाहर बसे भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) पर भी भारत में आने पर लागू होता है। 
 
बजट प्रस्ताव भारत आने वाले भारतीय नागरिकों और पीआईओ पर लागू होता है। अगर ऐसा व्यक्ति किसी वित्त वर्ष में 120 दिन या पिछले चार वर्षों में 365 दिन से अधिक रुकता है तो उसे कर के उद्देश्य के लिए भारत का निवासी माना जाता है।  यह नियम लागू होने के बाद अगर एनआरआई अपने अनिवासी के दर्जे को यथावत बनाए रखना चाहते हैं तो वे देश में कम दिन बिता पाएंगे। यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है क्योंकि लोग 182 दिन के प्रावधान का दुरुपयोग कर रहे थे। नांगिया एंडरसन कंसल्टिंग के निदेशक शैलेश कुमार ने कहा, 'बहुत से लोग किसी वर्ष में ज्यादातर समय भारत में बिताते थे और यहीं से अपना कारोबार करते थे। लेकिन वे भारत में अपने ठहराव का इस तरह से प्रबंधन कर रहे थे कि वे भारत में कर चुकाने से बच जाते थे। अब इस पर अंकुश लगाने के लिए समय-सीमा कम की गई है।' 
 
कर प्राधिकरणों ने पिछले साल के आयकर फॉर्मों में एक कॉलम शुरू किया था। पीआईओ और भारतीय नागरिक जो अनिवासी हैं, उन्हें भारत में बिताए गए दिनों की जानकारी देनी होगी। आव्रजन विभाग ये सूचनाएं सहेजकर रखता है। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर और लीडर (व्यक्तिगत कर) कुलदीप कुमार ने कहा, 'आप अपने आयकर फॉर्म में भारत में ठहरने की जो सूचनाएं भरते हैं, उनका आव्रजन विभाग के पास मौजूद सूचनाओं से सत्यापन किया जा सकता है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि आप सही जानकारी मुहैया कराएं।'
 
730 दिन का खंड हटाया 
 
जब यह फैसला हो जाता है कि कोई व्यक्ति निवासी है या नहीं तो यह पता करने की जरूरत होती है कि वह निवासी सामान्य निवासी (आरओआर) है या निवासी लेकिन सामान्य निवासी (आरएनओआर) है। इस समय उसे उस स्थिति में आरएनओआर माना जाता है, जब वह दो मापदंडों को पूरा करता है। ये मापदंड हैं- वह पिछले सात वित्त वर्षों में भारत में 730 दिन से कम रहा हो या वह पिछले 10 वर्षों में 9 वर्षों में अनिवासी रहा हो। बजट प्रस्तावों में 730 दिन के मापंदड को खत्म कर दिया गया है। अगर कोई व्यक्ति पिछले 10 वर्षों में सात वर्षों में भारत में अनिवासी रहा है तो वह आरएनओआर बन जाएगा। यह बदलाव उन प्रवासियों को प्रभावित करेगा, जो भारत में काम करने के लिए आते हैं। 
 
पहले वे तीसरे या चौथे साल में आरओआर बन जाते थे। अब वे पांचवें साल में आरओआर बन पाएंगे। इसका मतलब है कि अब उनकी वैश्विक आमदनी पर भारत में कर लगने से पहले उन्हें एक साल अतिरिक्त मिलेगा। अरीटी कंसल्टेंट्स एलएलपी में पार्टनर रूपाली सिंघानिया ने कहा, 'असल में सरकार ने भारत में काम करने के लिए आने वाले प्रवासियों के लिए नियम आसान बनाए हैं।'
 
डीम्ड निवास का प्रावधान लागू 
 
अगर कोई भारतीय नागरिक अन्य किसी बाहरी देश में अपने मूल निवास या निवास के चलते कर देने के लिए उत्तरदायी नहीं है तो उसे भारत का नागरिक माना जाएगा। नांगिया एंडरसन कंसल्टिंग के कुमार कहते हैं, 'यह प्रावधान उन लोगों को कर के दायरे में लाने के लिए शुरू किया गया है, जो किसी भी देश के नागरिक नहीं हैं।' भारत के बहुत से लोग संयुक्त अरब अमीरात में काम करते हैं। उन्हें वहां होने वाली आमदनी पर भारत में कर देना पड़ सकता है। इस मुद्दे को लेकर काफी हो-हल्ला होने के बाद सरकार ने साफ किया कि वह असली कामगारों पर कर नहीं लगाना चाहती है। हालांकि आगे के ब्योरे अभी आने हैं। 
 
डीम्ड निवास के प्रावधान से दोहरे निवास की समस्या पैदा हो सकती है। सिंघानिया ने कहा, 'ऐसे मामलों में दोहरा कराधान निरोधक समझौता (डीटीएए) के तहत आने वाले टाई-ब्रेकर नियमों को व्यक्ति का निवास तय करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।' टाई ब्रेकर नियम के तहत कुछ अहम मापदंडों में स्थायी घर, व्यापक हितों का केंद्र, आदतन ठिकाना और व्यक्ति की राष्ट्रीयता आदि शामिल हैं। 
 
किसे ïफायदा, किसे नुकसान 
 
जो लोग कारोबार करते हैं और यह कई देशों में फैला हुआ होता है या काम के सिलसिले में देश के बाहर जाते हैं तो वे एक साल में काफी समय देश के बाहर बिताते हैं। उन्हें भविष्य में अपना कार्यक्रम सोच-समझकर बनाना होगा। बहुत से एनआरआई, विशेष रूप से पुराने एनआरआई जो ऐसे किसी क्षेत्र में रहते हैं, जहां कड़ी ठंड पड़ती है और वे वर्ष का आधा समय भारत में बिताते हैं। अगर वे अपना अनिवासी का दर्जा बनाए रखना चाहते हैं तो उन्हें भारत में बिताए गए समय को घटाना होगा। 
 
जब व्यक्ति अपना अनिवासी का दर्जा गंवा देता है तो उसे अपने धन के प्रबंधन में बदलाव करना होता है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन ने कहा, 'जब आप निवासी बन जाते हैं तो नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल (एनआरई) और फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (एफसीएनआर) खातों पर कर लगने लगता है।' इन खातों को निवासी खातों में तब्दील कर दिया जाएगा। इसका सकारात्मक पहलू यह है कि अप्रवासियों को नहीं मिलने वाली वित्तीय योजनाएं उपलब्ध हो जाती हैं।  उदाहरण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के 7.75 फीसदी बचत (कर योग्य) बॉन्ड और सार्वजनिक भविष्य निधि (15 साल से अधिक बढ़ाई जा सकती है)। 
 
आयकर दरों में बदलाव व्यक्ति के लिए फायदेमंद या नुकसानदेह साबित हो सकता है, जो उसके निवास के देश पर निर्भर करता है। धवन ने कहा, 'संयुक्त अरब अमीरात में कोई कर नहीं लगता है, इसलिए भारत में कर की दरें अधिक होंगी। दूसरी ओर कुछ यूरोपीय देशों में कर की दरें भारत से भी अधिक हैं, इसलिए व्यक्ति के भारत का निवासी बनने से फायदा होगा।'
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