बिजनेस स्टैंडर्ड - परिधान क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन योजना
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परिधान क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन योजना

टीई नरसिम्हन / चेन्नई February 21, 2020

सरकार ने परिधानों और कपड़े से बने अन्य उत्पादों के लिए फ्री ऑन बोर्ड (एफओबी) मूल्य का एक प्रतिशत अतिरिक्त अनौपचारिक (एड हॉक) प्रोत्साहन देने की योजना शुरू की है। यह योजना ऐसे समय में आई है, जब ऐसी वस्तुओं के निर्यात के लिए भारत से वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस) के अंतर्गत लाभों को वापस ले लिया गया है। निर्यातकों का कहना है कि अगर राज्य और केंद्रीय कर एवं शुल्क योजना (आरएससीटीएल) की छूट राज्य शुल्कों (आरओएसल) और एमईआईएस की छूट से कम होगी तो यह प्रोत्साहन जोड़ दिया जाएगा। सरकार ने इस प्रोत्साहन के लिए जनवरी के मध्य में अधिसूचना जारी की थी और अब दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह मुख्य रूप से 7 मार्च, 2019 से एमईआईएस हटाए जाने के बाद हुए नुकसान (यदि कोई हो) की भरपाई के लिए है।
 
चूंकि आरओएसएल और एमईआईएस आरओएससीटीएल के साथ ही उपलब्ध थे, इसलिए कई निर्यातकों की लागत पर इन दोनों का असर पड़ रहा था। निर्यातकों ने कहा कि इस बारे में सरकार ने कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। सरकार ने परिधानों और कपड़े से बने अन्य उत्पादों पर राज्य के मूल्य संवर्धित कर (वैट) तथा राज्य के अन्य करों का बोझ कम करने के लिए आरओएसएल को अधिसूचित किया है। चूंकि कुछ खास राज्य एवं केंद्रीय शुल्कोंं में छूट नहीं थी, इसलिए मार्च 2019 में कपड़ा मंत्रालय ने उत्पादों के निर्यात पर विभिन्न राज्य और केंद्रीय करों एवं शुल्कों पर छूट के लिए आरओएससीएलटी को अधिसूचित किया है।
 
जनवरी 2020 में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने आरओएससीएलटी की शुरुआत के बाद एमईआईएस के तहत दिया जाने वाला लाभ वापस लेने का फैसला किया था। मार्च 2019 तक रहने वाले आरओएसएल के तहत छूट का भुगतान निर्यातकों के बैंक खातों में किया जाता था। हालांकि आरओएससीएलटी और इस अतिरिक्त अनौपचारिक प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत यह छूट एमईआईएस के तहत दी जाने वाली छूट की तरह ही इलेक्ट्रॉनिक शुल्क क्रेडिट स्क्रिप (पावती-पत्र) के रूप में प्रदान की जाएगी।
 
इन दोनों योजनाओं के अंतर्गत लाभ एक इलेक्ट्रॉनिक स्क्रिप में दिया जाएगा जिसका इस्तेमाल सीमा शुल्कों और केद्रीय उत्पाद शुल्कों का भुगतान करने के लिए किया जाएगा। इन योजनाओं के तहत जारी यह स्क्रिप पूरी तरह से हस्तांतरणीय होगी। कपड़ा मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि आरओएससीटीएल का लाभ 7 मार्च, 2019 से 31 मार्च, 2020 तक 'लेट एक्सपोर्ट ऑर्डर' (एलईओ) वाले परिधानों और कपड़े से बने अन्य उत्पादों के लिए उपलब्ध होगा, जबकि अतिरिक्त अनौपचारिक प्रोत्साहन योजना का लाभ 7 मार्च, 2019 से 31 दिसंबर, 2019 तक एलईओ वाले निर्यात के लिए उपलब्ध होगा। उद्योग के सूत्रों के अनुसार परिधान क्षेत्र पर आरओएसएल, जीएसटी और प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष योजना के तहत सरकार की ओर से करीब 7,000 करोड़ रुपये का बकाया है।
Keyword: textiles, cloths, cotton, export,,
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