बिजनेस स्टैंडर्ड - दूरसंचार पर सक्रिय सरकार
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दूरसंचार पर सक्रिय सरकार

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली 02 20, 2020

एजीआर मामला

उद्योग व ग्राहकों के हित में क्षेत्र की सेहत सुधारने पर ध्यान देगी सरकार
एजीआर बकाये पर राहत को लेकर दूरसंचार विभाग ने नहीं दिए कोई संकेत
टाटा टेली को शेष बकाया चुकाने के लिए भेजा नया नोटिस
वोडाफोन ने 1,000 करोड़ रुपये का किया भुगतान
पिछले कुछ दिनों से सरकार के पास लॉबीइंग कर रहे बिड़ला और मित्तल

बिजनेस स्टैंडर्ड दूरसंचार पर सक्रिय सरकारवोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला, भारती एयरटेल के सुनील भारती मित्तल ने पिछले कुछ दिनों में कैबिनेट मंत्रियों, शीर्ष अधिकारियों से मिलकर दूरसंचार क्षेत्र की बिगड़ती सेहत को सुधारने के लिए सहमति बनाने की खातिर खूब भागदौड़ की। सकल समायोजित बकाये के भुगतान में राहत के लिए मित्तल और बिड़ला द्वारा केंद्र सरकार के पास लॉबीइंग के बावजूद दूरसंचार विभाग से राहत के संकेत नहीं मिले। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विभाग से राहत को लेकर कुछ नहीं कहा गया है लेकिन हम दूरसंचार क्षेत्र की सेहत को दुरुस्त करने के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे।

संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद से मुलाकात करने वाले मित्तल ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र पर काफी ज्यादा कर है और उसे तार्किक बनाने की जरूरत है। इस बीच सोमवार को 2,197 करोड़ रुपये बकाया चुकाने वाली टाटा टेलीसर्विसेज को पूरा बकाया अदा करने के लिए विभाग से नया नोटिस जारी किया गया है।

दूरसंचार विभाग ने कहा कि कंपनी पर 14,000 करोड़ रुपये का बकाया है जबकि उसने 2,197 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जो केवल मूलधन है। मूलधन पर ब्याज, जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। कंपनियों द्वारा किए गए दावों की जांच के लिए सरकार ने इन कंपनियों के खातों का सत्यापन करने का निर्णय किया है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कंपनियों का दावा वाजिब है या नहीं।

जहां तक बैंक गारंटी भुनाने का सवाल है तो इस बारे में विभाग ने कानूनी राय मांगी है और उसका इंतजार कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि एकीकृत लाइसेंस समझौते के तहत अगर सेवा प्रदाता लाइसेंस की किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो विभाग बैंक गारंटी भुना सकता है और इसे नकदी में बदल सकता है। मंत्रालय ने इस बारे में सुझाव मांगे हैं कि 17 मार्च से पहले गारंटी भुनाई जा सकती है या नहीं। 17 मार्च को इस मामले की अगली सुनवाई होनी है।

अधिकारी ने कहा, सरकार को यह सुनिश्चित करना है कि दूरसंचार कंपनियां उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करें और उन्होंने भुगतान करना शुरू कर दिया है। अब तक 15,700 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है। दूसरी बात यह है कि सरकार को यह भी सुनिश्चित करना है कि दूरसंचार उद्योग की स्थिति पर इसका कोई असर न पड़े। साथ ही सरकार का उपभोक्ताओं के प्रति भी दायित्व है। सूत्रों के मुताबिक सरकारी अधिकारियों के साथ इन बैठकों में कई दूरसंचार कंपनियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि उन्हें पहले ही इस बकाये का भुगतान कर देना चाहिए था। एजीआर का मुद्दा 2003 का है जब इस पर विवाद शुरू हुआ था। 

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