बिजनेस स्टैंडर्ड - बिजली क्षेत्र को नई योजना से आस
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बिजली क्षेत्र को नई योजना से आस

देव चटर्जी / मुंबई February 20, 2020

भारतीय ऋणदाताओं के संकटग्रस्त बिजली क्षेत्र में करीब 1 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा पड़ा है। ऐसे में ऋणदाता अब सरकार की नई योजना की ओर देख रहे हैं जिससे मानक ताप बिजली परियोजनाओं को बचाया जा सकता है और बैंक को अपनी फंसी पूंजी की वसूली में मदद मिल सकती है। बिजली मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की एनटीपीसी, बिजली वितरण कंपनियों और बैंकरों सहित सभी हितधारकों के साथ नई दिल्ली में शुक्रवार को बैठक प्रस्तावित है। बैठक में मंत्रालय की प्रस्तावित योजना पर विचार किया जाएगा।  
 
एक बैंकर ने कहा, 'अक्षय ऊर्जा को तापीय बिजली परियोजनाओं के साथ जोडऩे के विकल्प पर चर्चा की गई है जिससे अक्षय ऊर्जा स्रोतों से अनियमित बिजली आपूर्ति की समस्या दूर करने में मदद मिलेगी, वहीं तापीय बिजली संयंत्रों को बचाया जा सकेगा और कर्ज की वसूली भी संभव हो सकेगी।' उन्होंने कहा, 'दोनों को जोडऩे से उपभोक्ता, बिजली उत्पादक, वितरक, पारेषण कंपनियों और बैंकों सहित सभी हितधारकों को मदद मिलेगी।' अगर योजना परवान चढ़ती है तो इससे बैंकों को आने वाली तिमाही में बिजली क्षेत्र के कर्ज पर अपेक्षाकृत कम प्रावधान करना होगा।
 
नवीन एवं नवीनीकृत ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार अक्षय ऊर्जा की अनिश्चित प्रकृति की वजह से अक्सर पारेषण प्रणाली पर कम क्षमता का उपयोग हो पाता है। इसकी वजह से वितरण कंपनियों को इस कमी की भरपाई और ग्रिड को स्थिरता प्रदान करने के लिए शेष बिजली खरीदनी होती है। नई योजना के तहत ऊंची लागत वाली तापीय बिजली को सस्ती अक्षय ऊर्जा के साथ जोडऩे की अनुमति दी जाएगी, जिससे वितरण कंपनियों को चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इस योजना के तहत बिजली उत्पादकों को सालाना बिजली आपूर्ति को 51 फीसदी अक्षय ऊर्जा के जरिये करनी होगी शेष आपूति तापीय ऊर्जा से की जाएगी।
 
बिजली क्षेत्र के कर्ज पर पहले ही बड़ा नुकसान झेल चुके बैंकों को उम्मीद है कि यह योजना बैंक परवान चढ़ेगी। पिछले हफ्ते भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई वाले कंसोर्टियम को सुजलॉन के 11,460 करोड़ रुपये के कर्ज पर 68 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ा था। बैंकों को जीवीके की पंजाब की परियोजना को डॉयचे बैंक को जीएमआर छत्तीसगढ़ परियोजना को अदाणी समूह को काफी कम कीमत पर बेचना पड़ा है। डॉयचे बैंक जिंदल इंडिया पावर के लिए भी 2,400 करोड़ रुपये की बोली लगाई है जबकि इस पर बैंकों को करीब 7,600 करोड़ रुपये का कर्ज है। करीब 26 गीगावाट क्षमता की 34 बिजली परियोजनाएं वर्तमान में ठप पड़ी हैं। 
 
नई योजना के बोलीकर्ताओं को एनटीपीसी या भारतीय सौर ऊर्जा निगम के साथ नए सिरे से 25 साल के लिए बिजली खरीद समझौता करने को कहा जाएगा। वे वितरण कंपनियों या थोक खरीदारों जैसे ग्राहकों के साथ बिजली आपूर्ति बिक्री समझौता (पीएसए) करेंगे। एसोसिएशन आफ पावर प्रोड्यूसर्स के महानिदेशक अशोक खुराना ने कहा कि इस योजना से समझौता न हुए ताप बिजली क्षमता के उपयोग में भी मदद मिलेगी। नई सुपर क्रिटिकल कोयला आधारित ताप बिजली संयंत्रों में कुछ ज्यादा रैंप रेट होता है, जिसका प्रभावी तरीके से इस्तेमाल अक्षय ऊर्जा के साथ 24 घंटे बिजली आपूर्ति में किया जा सकेगा। 
 
खुराना ने कहा, 'इसमें सिर्फ हरित ऊर्जा पर ही जोर नहीं दिया जा रहा है बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि मिली जुली बिजली की आपूर्ति हो और ग्रिड की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। साथ ही ग्रिड के अधिकतम इस्तेमाल के साथ ग्राहकों को स्वच्छ ऊर्जा मुहैया कराई जा सके।' उन्होंने कहा, 'यह सबसे लिए मुनाफे का सौदा है।'
Keyword: power, electric, projects,,
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