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'विवाद से विश्वास' की शंकाओं का समाधान

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली February 18, 2020

सरकार ने विवाद से विश्वास योजना के पुनरीक्षित विधेयक में घाटा होने की स्थिति में कर के भुगतान को लेकर उद्योगों की चिंता का समाधान करने की कवायद की है। इस विधेयक को हाल ही में मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। संसद में पेश किए गए विधेयक के पहले के प्रारूप में कंपनियों के बीच यह डर फैल गया था कि अगर आयकर अधिकारियों द्वारा उनके घाटे को कम कर दिया जाता है तो उन्हें कर का भुगतान करना पड़ेगा। अब पुनरीक्षित विधेयक में कंपनियों को विकल्प दिया गया है कि वे अपने घटे हुए नुकसान पर कर का भुगतान करने का विकल्प अपना सकती हैं और अपने पूरे घाटे को आगामी वर्षों की आमदनी में समायोजित कर सकती हैं। वैकल्पिक रूप से वे 25 प्रतिशत जुर्माने का भुगतान कर सकती हैं और कम किए गए घाटे को अपनी भविष्य की आमदनी में वे सिर्फ समायोजित कर सकती हैं। 
 
उदाहरण के लिए अगर एक कंपनी ने 100 करोड़ रुपये घाटा दिखाया है। बहरहाल आयकर अधिकारी कंपनी की इस गणना से सहमत नहीं है और उसने घाटे को कम करके 50 करोड़ रुपये कर दिया। आमदनी छिपाने के लिए आयकर अधिकारी इसके लिए कंपनी पर 50 से 200 प्रतिशत तक जुर्माना लगाते हैं। वहीं कंपनी इसके खिलाफ आयुक्त (अपील) के पास जाती है और वहां मामला रखती है।  मूल विधेयक में प्रस्ताव किया गया था कि कंपनी इस योजना के तहत कर का भुगतान कर मामले का समाधान कर सकती है। कंपनियों ने यह मसला उठाया था कि वे घाटे पर कर का भुगतान क्यों करेंगी।
 
इस मसले के समाधान के लिए पुनरीक्षित योजना में अब कंपनी को दो विकल्प दिए गए हैं। कंपनी घटे हुए 50 करोड़ रुपये पर कर का भुगतान कर सकती है, जिसका खुलासा उसने नहीं किया है और पूरे 100 करोड़ रुपये घाटे को वह आगामी वर्षों में होने वाली आमदनी में समायोजित कर सकती है। कंपनियां इस तरह के नुकसान को 8 वर्षों तक आगे बढ़ा सकती हैं।  दूसरे विकल्प में कंपनी 25 प्रतिशत जुर्माने का भुगतान कर सकती है और सिर्फ 50 करोड़ रुपये नुकसान को आगे बढ़ा सकती है। 
 
अशोक माहेश्वरी ऐंड एसोसिएट एलएलपी के पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा, 'करदाताओं के मन में कर अधिकारी द्वारा दिखाए गए कम घाटे को लेकर दायर याचिका की स्थिति में योजना के लाभ को लेकर भ्रम था। प्रस्तावित कानून ने बहुप्रतीक्षित स्पष्टता मुहैया कराई है।'  उन्होंने कहा कि नुकसान न दिखने की स्थिति में कंपनियां घटे हुए नुकसान को स्वीकार करने का विकल्प अपनाएंगी और सिर्फ जुर्माने का भुगतान करेंगी।  सरकार ने विवाद से समाधान विधेयक लोकसभा में पेश किया था, लेकिन उद्योगों को कई तरह की चिंता थी। इसे लेकर विधेयक में संशोधन किया गया और इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। संशोधित विधेयक अगले महीने संसद में पेश किया जा सकता है, जब संसद का कामकाज शुरू होगा। 
 
पुनरीक्षित विधेयक में यह योजना ज्यादा आकर्षक हो गई है क्योंकि न्यायाधिकरण मंचों और कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) में लंबित याचिकाओं के समाधान की संभावना बढ़ी है। इस योजना में कम मूल्य के विवादों से संबंधित मामले भी शामिल होंगे।  संशोधित विधेयक में उन  मामलों में भी फायदा मिलेगा, जिनमें करदाताओं के  पक्ष में आदेश मिले हैं, लेकिन आयकर विभाग ने मामले को ऊपरी न्यायालय में चुनौती दी है। 
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