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बजट प्रबंधन कानून दोबारा लिखने की जरूरत : मोंटेक

भाषा / भोपाल February 18, 2020

योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने राज्यों की बढ़ती वित्त जरूरतों और वित्तीय सीमाओं के मद्देनजर मंगलवार को वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन कानून को नए संदर्भों में दोबारा लिखने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि सामाजिक रूप से महत्त्वपूर्ण आर्थिक अधोसंरचना परियोजनाओं में बजट की कमी को दूर करने के लिए निजी-सार्वजनिक भागीदारी का कानून बनाने पर भी विचार करना चाहिए। वह यहां मिंटो हाल में परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक वित्त व्यवस्था विषय पर राज्य के वित्त विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
 
उन्होंने कहा, 'ऐसी स्थिति में निजी क्षेत्र की ओर देखना पड़ता है। निजी क्षेत्र किसी भी प्रकार का खतरा उठाने से बचता है जबकि सरकार हानि-लाभ से परे जन-कल्याण के उद्देश्य के लिए समर्पित होती है। दोनों क्षेत्रों की अपनी सीमाएं हैं। इसलिए दोनों क्षेत्रों के परस्पर सहयोग से काम करने के लिए एक उचित कानून की जरूरत नजर आती है। इस स्थिति से निपटने में वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन कानून पूरी तरह से मददगार साबित नहीं हो पा रहा है।'  अहलूवालिया ने कहा कि परियोजनाएं बनाना, उनके लिए बजट प्रावधान करना और समय रहते उन्हें उपलब्ध संसाधनों में पूरा करना पूरे विश्व में एक मान्य प्रक्रिया है। यह भी तथ्य है कि सरकारों के वित्तीय संसाधन सीमित हैं लेकिन परियोजनाएं महत्त्वाकांक्षी हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों के पास सिर्फ आर्थिक अधोसंरचना परियोजनाओं के अलावा भी सामाजिक जिम्मेदारियों के कई काम और प्राथमिकताएं होती हैं। दोनों काम एक साथ पूरा होने में कई चुनौतियां सामने आती हैं। फलस्वरूप योजनाओं और परियोजनाओं की गति धीमी होकर वे पिछडऩे लगती है। अहलूवालिया ने कहा, 'सिर्फ बजट संसाधनों पर निर्भर रहने की परंपरा से हटकर सोचने की जरूरत है।'  
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