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खर्च में कटौती करें बीमाकर्ता : खुंटिया

सुब्रत पांडा / मुंबई February 18, 2020

भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के चेयरमैन सुभाष चंद्र खुंटिया ने कहा है कि सामान्य बीमा कंपनियों को कीमतों में बढ़ोतरी पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय बट्टे खाते के घाटे से बाहर निकलने के लिए अपने खर्च में कटौती करने, कार्यकुशलता में सुधार करने और बेहतर उत्पाद की डिजाइन करने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। ज्यादातर सामान्य बीमा कंपनियां बट्टे खाते का घाटा दिखा रही हैं और अपना कारोबार चलाने के लिए धन का प्रबंधन आमदनी के अन्य स्रोतों और निवेश से होने वाली आमदनी से कर रही हैं। 
 
इंस्टीट्यूट आफ एक्चुअरीज आफ इंडिया की ओर से आयोजित 21वें ग्लोबल कॉन्फ्रेंस आफ एक्चुअरीज में खुंटिया ने कहा, 'यह अल्पकालिक कदम है और हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि बट्टे खाते का कोई घाटा न हो। इसका मतलब यह नहीं है कि बीमाकर्ता कीमतें बढ़ा दें, कार्यकुशलता में सुधार करके भी बट्टे खाते का घाटा कम किया जा सकता है। इसी तरह से कंपनी के खर्च पर नियंत्रण किया जा सकता है।'  लेकिन खुंटिया ने कहा कि बीमा नियामक इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा कि बीमाकर्ता अपने उत्पाद की कीमत कैसे तय करते हैं। बहरहाल अगर उन्हें लगता है कि कीमत सही नहीं है तो उत्पाद को मंजूरी देते समय नियामक इस मसले को बीमाकर्ता के सामने रखेगा। खुंटिया ने कहा, 'यह एक खुला बाजार है और हम विनियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था में कीमतों का नियमन नहीं चाहते हैं।'
 
चेयरमैन ने बीमकर्ताओं से यह भी अनुरोध किया कि उन्हें अपने उत्पादों की सालाना समीक्षा करने की जरूरत है, जिससे उन उत्पादों को हटाया जा सकेगा, जिन्हें ग्राहकों ने स्वीकार नहीं किया है। खुंटिया ने कहा, 'सामान्यतया बीमा कंपनियों के 3-4 प्रमुख उत्पादों की उनके कुल कारोबार में अंशदान 80 प्रतिशत होता है। ऐसे में क्या यह जरूरी है कि बड़ी संख्या में जटिल उत्पादों को बनाए रखा जाए, जो ग्राहकों को भ्रमित करते हैं और बीमाकर्ताओं के प्रदर्शन को भी खराब करते हैं?' आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस के एमटी और सीईओ भार्गव दासगुप्ता के मुताबिक पहली समस्या तब होती है जब बीमाकर्ता ग्राहकों को सेवा की डिलिवरी देने में पर्याप्त अंडरराइटिंग मुनाफा नहीं रखता है। इससे उद्योग के बारे में नकारात्मक धारणा बनती है और इसकी छवि खराब होती है। 
 
दूसरे अगर कंपनियां पर्याप्त धन नहीं रखती हैं तो वे लोगों, वितरण, तकनीक आदि पर खर्च नहीं कर पातीं। तीसरे, कंपनियां नए और नवोन्मेषी उत्पाद नहीं तैयार करतीं।  वित्त वर्ष 2020 में सामान्य बीमा उद्योग के कारोबार में 14 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि जीवन बीमा क्षेत्र की वृद्धि दर 10 प्रतिशत रही है। लेकिन आईआरडीएआई के चेयरमैन का मानना है कि सामानन्य व जीवन बीमा दोनों क्षेत्र में तेज बढ़ोतरी की संभावना है। खुंटिया ने जीवन बीमाकर्ताओं को अपने दृढ़ता अनुपात में सुधार करने पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह दी।  एलआईसी के आईपीओ के बारे में खुंटिया ने कहा कि एलआईसी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश का प्रस्ताव अभी बीमा नियामक के पास मंजूरी के लिए नहीं आया है। 
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