बिजनेस स्टैंडर्ड - बैठक से पहले मिलेगा राज्यों को बकाया!
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बैठक से पहले मिलेगा राज्यों को बकाया!

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 02 17, 2020

मुआवजा आवंटन

दो महीने से अधिक देरी के बाद राज्यों को मिलेगा अक्टूबर-नवंबर का मुआवजा
आगामी 14 मार्च को जीएसटी परिषद की बैठक प्रस्तावित
बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच रह सकती है तनातनी
राज्य मुआवजे में देरी और 14 प्रतिशत निश्चित राजस्व के आश्वासन का उठाएंगे मुद्दा

बिजनेस स्टैंडर्ड बैठक से पहले मिलेगा राज्यों को बकाया!वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की अगली बैठक से पहले केंद्र सरकार राज्यों को अक्टूबर-नवंबर अवधि का मुआवजा आवंटित कर देगी। केंद्र सरकार दो महीने से अधिक विलंब के बाद इस रकम का भुगतान कर रही है। समय रहते मुआवजा नहीं मिलने के कारण राज्यों पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया था। जीएसटी परिषद की अगली बैठक 14 मार्च को प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में केंद्र सरकार और राज्यों के बीच खासी तनातनी रहेगी। राज्य मुआवजा जारी करने में देरी और 14 प्रतिशत निश्चित राजस्व के आश्वासन से केंद्र के पीछे हटने का मुद्दा जोर-शोर से उठा सकते हैं। चूंकि, मुआवजा दो महीने की देरी से दिया जा रहा है, इसलिए दिसंबर-जनवरी अवधि की रकम राज्यों को अगले वित्त वर्ष में मिलेगी।

जीएसटी परिषद की बैठक में राजस्व बढ़ाने और आर्थिक सुस्ती के कारण मुआवजा उपकर में कमी की भरपाई के लिए जीएसटी दरें एवं उपकर बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। राज्यों को मुआवजा आवंटित करने के विषय पर एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम जीएसटी परिषद की अगली बैठक से पहले राज्यों को अक्टूबर-नवंबर अवधि का करीब 35,000 करोड़ रुपये आवंटित करेंगे। हम यह मान कर चल रहे हैं कि राज्य रकम मिलने में देरी का मुद्दा उठाएंगे, क्योंकि वे भी राजस्व संकट का सामना कर रहे हैं।'

अधिकारी ने कहा कि अगली दो किस्तों का भुगतान करना चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि चालू वित्त वर्ष में उपकर में 25,000-30,000 करोड़ रुपये कमी रह सकती है। अधिकारी ने कहा कि परिषद की बैठक में यह चर्चा का प्रमुख विषय रह सकता है। दिसंबर के अंत तक 23 राज्यों का जीएसटी राजस्व पिछले वर्ष के मुकाबले 15,100 करोड़ रुपये कम रहा था। अगर राजस्व नुकसान की गणना 14 प्रतिशत जीएसटी संग्रह दर के आधार पर की जाए तो इन राज्यों का नुकसान दिसंबर तक 69,000 करोड़ रुपये होगा। यह नुकसान काफी अधिक होगा क्योंकि जीएसटी कानूनों में मुआवजे का निर्धारण वित्त वर्ष 2016 के राज्यों के राजस्व के 14 प्रतिशत वृद्धि दर के आधार पर किया जाता है।

पिछले पांच वर्षों की भरपाई के लिए केंद्र संभवत: मुआवजा उपकर की अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ाए जाने की सिफारिश करेगी। हालांकि राज्य 14 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर के हिसाब से मुआवजा उपकर देने का प्रावधान एक या दो वर्षों के लिए बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। केंद्र ने राज्यों से द्विमासिक आधार पर जीएसटी मुआवजा निर्गत करने का वादा किया था, लेकिन सितंबर से वह समय पर भुगतान नहीं कर पाया है। अगस्त-सितंबर अवधि के लिए 35,298 करोड़ रुपये अक्टूबर में निर्गत होना था, लेकिनइसका भुगतान 18 दिसंबर को जीएसटी परिषद की बैठक से दो दिन पहले किया गया।

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