बिजनेस स्टैंडर्ड - एजीआर संकट पर आरबीआई की नजर
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एजीआर संकट पर आरबीआई की नजर

एजेंसियां / नई दिल्ली February 17, 2020

दूरसंचार कंपनियों पर समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के मद में 1.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने से पैदा हुए संकट पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) करीबी नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी भुगतान चूक से कर्जदाताओं पर पडऩे वाले असर को आंका जा सके। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने एक साक्षात्कार में आज कहा कि दूरसंचार कंपनियों के एजीआर भुगतान से जुड़े समूचे घटनाक्रम पर केंद्रीय बैंक कड़ी नजर रखे हुए है। हालांकि अभी तक कोई चेतावनी नहीं जारी की गई है। उच्चतम न्यायालय ने भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की तरफ से दायर अपीलों को खारिज करते हुए एजीआर भुगतान में छूट देने से मना कर दिया था। शीर्ष अदालत ने दूरसंचार कंपनियों को 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया स्पेक्ट्रम एवं लाइसेंस शुल्क 17 मार्च तक जमा करने को कहा है। लेकिन पहले से ही भारी नुकसान और कर्ज के बोझ तले दबी इन दूरसंचार कंपनियों के लिए इतनी बड़ी रकम का भुगतान कर पाना आसान नहीं है। उन पर आई इस अतिरिक्त देनदारी ने यह आशंका पैदा कर दी है कि कहीं वे पुराने कर्जों के भुगतान में चूक न करने लगें। 
 
इस बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं लेकिन बैंकिंग जगत पर इसके संभावित असर को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। दास ने कहा, 'हम हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित कंपनियां कब और किस तरह से भुगतान करती हैं? हम इसकी निगरानी कर रहे हैं।' दूरसंचार कंपनियों पर एजीआर शुल्क के साथ ब्याज एवं जुर्माने को लेकर कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये के बकाये भुगतान में एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की हिस्सेदारी 60 फीसदी है। एयरटेल ने सोमवार को खुद पर बकाया 35,586 करोड़ रुपये में से 10,000 करोड़ रुपये जमा करा दिए। वहीं वोडाफोन आइडिया की तरफ से दायर उस अर्जी को उच्चतम न्यायालय ने ठुकरा दिया जिसमें उसने 2500 करोड़ रुपये फौरन देने और 1,000 करोड़ रुपये शुक्रवाद तक जमा करने की मंजूरी मांगी थी। 
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