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'2 माह में करें निर्र्यात प्रोत्साहन पर फैसला'

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली February 17, 2020

पहले की निर्यात प्रोत्साहन योजना के तहत अपना फंड हासिल नहीं कर पाने वाले निर्यातकों के लिए अब इसे हासिल करने की गुंजाइश बढ़ गई है। इसकी वजह है कि बंबई  उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को दो महीने के भीतर इससे जुड़े मामलों पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मामले को स्पष्टï करते हुए याची के वकील अभिषेक रस्तोगी ने कहा कि यह मामला टार्गेट प्लस स्कीम से जुड़ा है जिसे विदेश व्यापार नीति 2004-09 के अंतर्गत शुरू किया गया था। इसमें उच्च प्रदर्शन करने वाली स्टार एक्सपोर्ट हाउस से न्यूनतम 10 करोड़ रुपये का सालाना निर्यात कारोबार के साथ वित्त वर्ष में कम से कम 20 फीसदी की दर से निर्यात बढ़ाने पर उन्हें शुल्क क्रेडिट देने का वादा किया गया था। इन निर्यातकों को निर्यातों के फ्रेट ऑन बोर्ड (एफओबी) मूल्य का 10 फीसदी क्रेडिट दिया जाना था।      
 
याची प्लास्टिक का निर्यातक है। खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर और इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनका याची 2004-05 में 63,10,767 करोड़ रुपये का हकदार था।  हालांकि, सरकार ने जून 2006 में अचानक से टार्गट प्लस स्कीम में संशोधन कर दिया जिसमें शुल्क क्रेडिट देने की व्यवस्था खत्म कर दी और 2005-06 के लिए एकसमान 5 फीसदी की दर तय कर दी। इस तरह, यह निर्यातक केवल 31,39,922 करोड़ रुपये लेने का ही हकदार रह गया और उसके हिस्से आने वाली इतनी ही रकम अटक गई।
 
मौजूदा मामले में याची ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का संदर्भ दिया है। उच्च न्यायालय ने कहा, 'हम प्रतिवादी (केंद्र सरकार, विदेश व्यापार के महानिदेशालय) को इस न्यायालय के रिट मिलने की तारीख से आठ हफ्तों के भीतर याची के अभिवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश देते हैं। हम स्पष्टï करते हैं कि हमने सभी मुद्ïदों को खुला रखा है और निर्णय कानून और तथ्यों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।' यह पूछे जाने पर कि यदि सरकार क्रेडिट हक प्रदान नहीं करती है क्योंकि वह भी सरकार के निर्णय का एक प्रकार ही होगा तब क्या होगा, रस्तोगी ने कहा कि याचिका पर सुनवाई पूरी नहीं हुई है और यह अभी भी उच्च न्यायालय में लंबित है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के पहले के निर्णय को देखते हुए सरकार के पास इसका हक देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।  
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