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सेवानिवृत्ति के बाद बचत योजनाओं पर लगाएं दांव

संजय कुमार सिंह /  February 16, 2020

एग्रेसिव हाइब्रिड फंडों में हाल के महीनों में बड़ी निकासी हुई है। इन फंडों को बैलेंस फंड भी कहा जाता है, जो अपने पोर्टफोलियो की करीब 65 फीसदी पूंजी इक्विटी में लगाते हैं। इस फंड श्रेणी में प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) दिसंबर में 1,931 करोड़ रुपये और नवंबर 2019 में 4,071 करोड़ रुपये घटी हैं। इस श्रेणी में निवेशकों के अपने निवेश को भुनाने की एक वजह यह है कि उन्हें गलत जानकारी देकर बैलेंस्ड फंडों की बिक्री की गई। बहुत से लोगों को ये फंड इस वादे के साथ बेचे गए थे कि इनमें हर महीने 11 से 12 फीसदी नियमित लाभांश मिलेगा। ऐसे लोगों में वे लोग भी शामिल थे, जो सेवानिवृत्त हैं या सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। वर्ष 2016 से 2018 की शुरुआत तक मिड और स्मॉल कैप शेयरों में तेजी रही। बहुत से बैलेंस्ड फंड प्रबंधकों ने इन शेयरों में मोटा निवेश किया। हालांकि उन्होंने इस चीज का ध्यान नहीं रखा कि उनके ग्राहक पुरानी सोच वाले हैं। कुछ फंड प्रबंधकों ने तो अपने पोर्टफोलियो के इक्विटी हिस्से में 50 फीसदी तक का निवेश मिड और स्मॉल कैप शेयरों में कर दिया। इन शेयरों में गिरावट 2018 के प्रारंभ में शुरू हुई और हाल में बाजार के एक सीमित हिस्से में तेजी से इन फंडों ने कमजोर प्रदर्शन किया है। 

 
इनमें से बहुत से फंडों ने लाभांश देना बंद कर दिया है। इससे वे सेवानिवृत्त लोग नाखुश हैं, जिन्होंने नियमित भुगतान की उम्मीद में इनमें निवेश किया था। कुछ फंड अब भी लाभांश चुका रहे हैं, लेकिन बहुत कम। वे ये भुगतान अपने संचित लाभ से कर रहे हैं। लेकिन इससे फंड पोर्टफोलियो के मूल्य में कमी आ रही है, जिससे बहुत से पुरानी सोच वाले निवेशक खफा हैं। हालांकि आक्रामक हाइब्रिड श्रेणी में कुछ फायदे भी हैं। यह इक्विटी जैसा प्रतिफल दे सकती है और इसमें उतार-चढ़ाव भी कम है। केनरा रोबेको म्युचुअल फंड में फंड प्रबंधक (इक्विटी) श्रीदत्त भानवालदर ने कहा, 'जब हमने आकलन किया तो पाया कि ये फंड इक्विटी फंडों का करीब 85 फीसदी प्रतिफल देने में सक्षम हैं।'
 
बैलेंस्ड फंड प्रबंधक निवेश की इक्विटी और डेट के बीच अदला-बदली कर सकते हैं। इक्विटी फंड में प्रबंधक केवल निवेश को इक्विटी से केवल पैसे में तब्दील कर सकते हैं। लेकिन नकदी पर कोई प्रतिफल नहीं मिलता है। कैपिटल क्वांशट के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी सौष्ठव चक्रवर्ती ने कहा, 'जब बाजारों में अस्थिरता आती है तो बैलेंस्ड फंड इक्विटी में अपना निवेश 75-80 फीसदी से घटाकर करीब 65 फीसदी कर देते हैं। वे अपने पोर्टफोलियो का 35 फीसदी हिस्सा डेट में निवेश करते हैं जहां इस पर कुछ प्रतिफल मिलता है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में इन फंडों के प्रतिफल को स्थिरता मिलती है।' इन फंडों का इक्विटी में आवंटन कम से कम 65 फीसदी होता है, इसलिए उनमें  इक्विटी के समान कर लाभ मिलते हैं। ये हाइब्रिड होने के कारण निवेशकों को परिसंपत्ति आवंटन और फिर से संतुलन के लाभ मुहैया कराते हैं। अलग-अलग इक्विटी और डेट फंडों में निवेश करने वाले ज्यादातर खुदरा निवेशक अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित नहीं कर पाते हैं। इन फंडों में फंड प्रबंधक उनके पक्ष में यह काम करते हैं। 
 
वे सेवानिवृत्त व्यक्ति, जिन्हें ये फंड गलत जानकारी देकर बेचे गए या उन्होंने गलती से इन्हें खरीद लिया तो उन्हें इनसे बाहर निकल जाना चाहिए। चक्रवर्ती ने कहा, 'यह संभव है कि बहुत से सेवानिवृत्त लोगों के लिए इक्विटी में 65 से 75 फीसदी आवंटन उपयुक्त नहीं हो।' जो लोग अपने नियमित खर्च पूरे करने के लिए अपने निवेश पर निर्भर हैं या पूंजी की सुरक्षा चाहते हैं, उनके लिए वरिष्ठ नागरिक बचत योजना जैसी निश्चित आय वाली योजनाएं बेहतर रहेंगी, जो हर तिमाही में 8.6 फीसदी की दर से भुगतान करती हैं। 
 
जो लोग पहले निश्चित आय वाली योजनाओं में निवेश कर रहे थे, लेकिन अब कम उतार-चढ़ाव के साथ इक्विटी का स्वाद भी चखना चाहते हैं, वे बैलेंस्ड फंडों में प्रवेश कर सकते हैं या अपना निवेश बनाए रख सकते हैं। इस श्रेणी का कोई फंड चुनते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि फंड प्रबंधक मिड और स्मॉल कैप शेयरों में तेजी के दौर में अधिक निवेश नहीं करता है। मिड और स्मॉल कैप में 30 फीसदी से अधिक निवेश नहीं किया जाना चाहिए। इन पोर्टफोलियो के डेट हिस्से का प्रबंधन भी जोखिम से दूर रहने की सोच के साथ किया जाना चाहिए। फंड प्रबंधक को अधिक क्रेडिट और अवधि जोखिम से भी बचना चाहिए। इन फंडों में निवेश कम से कम पांच साल के लिए किया जाना चाहिए और निवेशक को कुछ उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए। 
Keyword: retirement, fund, equity, invest,,
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