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बुजुर्ग माता-पिता के स्वास्थ्य को दें पर्याप्त बीमा की खुराक

संजय कुमार सिंह /  02 16, 2020

साठ साल की उम्र पार करते ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढऩे लगती हैं। वरिष्ठ नागरिकों को स्वयं अपनी पहल से और उनकी संतान को भी अपने माता-पिता की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी करनी चाहिए। एहतियात के तौर पर यह योजना 50 साल की उम्र पार करते ही शुरू कर देनी चाहिए। आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस के हाल के एक सर्वेक्षण में पता चला है कि माता-पिता को स्वयं और उनकी संतानको भी उनके (माता-पिता) स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए उपाय करना चाहिए। दोहरी आय वाले परिवारों में चीजें प्रबंधित करने में खासी दिक्कतें आती हैं। अमूमन जब बच्चे दूसरे शहर या विदेश में रहते हैं तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं खड़ी होते वक्त वृद्ध की देखभाल करने के लिए पास में कोई मौजूद नहीं रहता है। 

 
स्वास्थ्य के लिए आपात कोष रखें  
 
किसी व्यक्ति को 50 साल की उम्र पार करते ही स्वास्थ्य के लिए कोष तैयार करना शुरू कर देना चाहिए। सेबी के पास पंजीकृत निवेश सलाहकार और फिन्सकोलार्ज वेल्थ मैनेजर्स की सह-संस्थापक एवं मुख्य सलाहकार रेणु माहेश्वरी कहती हैं, 'सेवानिवृत्ति से 10 साल पूर्व इक्विटी फंड में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) शुरू करने से एक बड़ा कोष तैयार हो जाता है।' हालांकि कितनी रकम जमा करनी चाहिए इस बारे में पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। माहेश्वरी कहती हैं कि यह इतना जरूर होना चाहिए कि अस्पताल में भर्ती होने से होने वाले एवं ओपीडी खर्च से निपटने और छोटी-मोटी बीमारियों एवं  अन्य संबंधित खर्चों के लिए पर्याप्त होना चाहिए। वह कहती हैं कि नर्सिंग स्टाफ, साथ ही किसी दूसरी जरूरतों के लिए अलग से किसी व्यक्ति को रखने के लिए भी पर्याप्त रकम होनी चाहिए। एक बार आपात कोष तैयार होने के बाद इसे बचत जमा, लिक्विड फंड, अल्ट्रा-शॉर्ट डेट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में रखना चाहिए। 
 
नियोक्ता से मिले कवर में माता-पिता को करें शामिल
 
नियोक्ता द्वारा दिया गया समूह स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी सस्ती होती है। इसमें पहले दिन से ही मौजूदा बीमारियां भी कवर होती हैं। किसी व्यक्ति को अपने माता-पिता को शुरू से ही इसमें शामिल करना चाहिए। हालांकि माता-पिता को केवल इसी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और अलग से एक स्वास्थ्य कवर लेना चाहिए। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में स्वास्थ्य बीमा प्रमुख अमित छाबरा कहते हैं, 'कई कंपनियां अब कर्मचारियों को दी बीमा पॉलिसी में उनके माता-पिता को शामिल नहीं कर रही हैं। अगर वे फिलहाल ऐसा कर रही हैं तो भी भविष्य में खर्च में कटौती के लिए वे यह विकल्प खत्म कर सकती हैं। अगर कर्मचारी नौकरी छोड़ता है याअपना कारोबार शुरू करता है तो उस स्थिति में यह बीमा सुविधा खत्म हो जाती है।' कई लोग बैंक से खरीदी गई समूह स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर निर्भर रहते हैं। छाबरा कहते हैं, 'बैंक कभी भी ऐसी पॉलिसी बंद कर सकते हैं या इसका प्रीमियम बढ़ा सकते हैं।'
 
पर्याप्त बीमित राशि का करें चयन
 
उम्र बढऩे के साथ ही स्वास्थ्य बीमा लेना महंगा हो जाता है। हालांकि इसके बाजवूद वरिष्ठ नागरिकों को पर्याप्त बीमा कवर लेना चाहिए। मणिपालसिग्ना हेल्थ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक  ऐंड सीईओ प्रसुन सिकदर कहते हैं, 'आपको कितनी बीमित राशि लेनी चाहिए यह इस बात पर निर्भर करती है कि आप महानगर में रहते हैं या किसी छोटे शहर में और आपकी जीवन शैली किस तरह की है। आपका मौजूदा स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेने की आपकी क्षमता भी मायने रखते हैं।' जो लोग महानगर में रहते हैं और अस्पताल में भर्ती होने के दौरान एक पूरा कमरा चाहते हैं उन्हें ऊंचा कवर लेना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि एक वृद्ध दंपति के लिए यह राशि 10 से 20 लाख रुपये होनी चाहिए।
 
बुजुर्ग लोगों पर लागू होती हैं कड़ी शर्तें 
 
50 साल की उम्र तक पहुंचते ही लोगों के पास पहले से ही स्वास्थ्य बीमा होनी चाहिए। अगर बीमित रकम अपर्याप्त लग रही है तो इसमें इजाफा किया जा सकता है या फिर टॉप-अप लिया जा सकता है। 60 साल के बाद बीमा पॉलिसी खरीदना या बीमित रकम बढ़ाना या फिर टॉप-लेना मुश्किल हो जाता है। सिकदर कहते हैं, '60 साल की उम्र पार करने के बाद किसी बीमा पॉलिसी लेने में कई झमेले खड़े होते हैं। इस उम्र में पॉलिसी लेने से पहले स्वास्थ्य की जांच जरूरी हो जाती है।' जिन्हें पहले से कोई बीमारी है उन्हें बीमा का लाभ नहीं मिल सकता है। इन दिनों वरिष्ठ नागरिकों की जरूरत के हिसाब से बाजार में कई पॉलिसियां उपलब्ध हैं। इन पॉलिसियों में पहले से मौजूद बीमारी रखने वाले लोग शामिल होते हैं, लेकिन इनके साथ कई शर्तें होती हैं, जिन्हें उन्हें समझना चाहिए। 
 
सह-भुगतान (को-पेमेंट) का विकल्प
 
को-पेमेंट विकल्प के तहत कुल खर्च के 10 से 30 प्रतिशत हिस्से का भुगतान पॉलिसीधारक द्वारा किया जाता है। बाकी रकम का भुगतान बीमा कंपनी करती है। आदर्श रूप में किसी पॉलिसी में सह-भुगतान का विकल्प नहीं होना चाहिए या ग्राहक को ऐसी पॉलिसी खरीदनी चाहिए, जिसमें सह-भुगतान कम से कम करना होता है। 
 
उप-सीमाओं (सब-लिमिट) का रखें ध्यान
 
वरिष्ठ नागरिकों की योजनाओं के साथ उप-सीमाएं भी हो सकती हैं। ये शर्त आधारित या लाभ के संदर्भ में हो सकती हैं। उप-सीमा एक निश्चित रकम या बीमित राशि का कुछ प्रतिशत हो सकती है। उदाहरण के लिए किसी पॉलिसी में ऐसी शर्तें हो सकती हैं किसंबंधित बीमा कंपनी 3 लाख रुपये से अधिक खर्च या हृदय रोग के लिए या फिर मोतियाबिंद के लिए 25,000 रुपये से अधिक का भुगतान नहीं करेगी। 
 
क्या होती है प्रतीक्षा अवधि?
 
वरिष्ठ नागरिकों की बीमा पॉलिसी में दो तरह की प्रतीक्षा अवधियां होती हैं। पहली अवधि पहले से मौजूदा बीमारियों के होती हैं, जो 2 से 4 वर्ष की हो सकती है। दूसरी प्रतीक्षा अवधि धीरे से बढऩे वाली बीमारियों के लिए होती है, जैसे कैंसर, मोतियाबिंद या घुटना प्रत्यारोपण आदि। यह मोटे तौर पर 2 वर्ष के लिए होती है। खरीदारों को पॉलिसी की महीन बातों को समझने के बाद एक उपयुक्त विकल्प का चयन करना चाहिए। 
Keyword: insurance, health, limit,,
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