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बुरे हालात के लिए तैयार बैंक

अनूप रॉय और देवाशिष महापात्र / मुंबई/बेंगलूरु February 14, 2020

एक तरफ उच्चतम न्यायालय दूरसंचार क्षेत्र की बकाया रकम को लेकर कड़े रुख अख्तियार कर रहा है वहीं दूसरी तरफ बैंक अपने फंसे हुए कर्ज में और बढ़ोतरी के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। नैस्कॉम सम्मेलन  से इतर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अध्यक्ष रजनीश कुमार कहते हैं, 'अब यह दूरसंचार कंपनियों को तय करना है कि किस तरह के कदम उठाए जाएंगे।' दूरसंचार क्षेत्र में फंडिंग के जरिये बैंकों की करीब 29,000 करोड़ रुपये की पूंजी लगी हुई है। वहीं गैर-फंडिंग के जरिये भी बैंकों ने इस क्षेत्र में 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये लगाए हैं। 

 
कुमार के मुताबिक दूरसंचार क्षेत्र में एसबीआई का 9,000 करोड़ रुपये बतौर कर्ज फंसा था और बैंक कुछ रिकवरी की उम्मीद कर रही है। लेकिन बैंकों ने मानक परिसंपत्ति पर कोई प्रावधान नहीं रखा था। हालांकि बैंक को अब कोई भ्रम नहीं है। कुमार ने कहा, 'हम बुरी स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।' एसबीआई के चेयरमैन कई तरह से पूरे बैंकिंग तंत्र की धारणा का संकेत दे रहे थे। बैंकरों और विश्लेषकों का कहना है कि इस क्षेत्र को दिया गया ऋण भले ही तात्कालिक रूप से फंसे कर्ज में न तब्दील हो लेकिन इसके बड़े हिस्से की रिकवरी नहीं हो सकती है। बैंकों द्वारा किए गए शीर्ष 10 निवेश का जायजा लेने पर यह अंदाजा मिलता है कि बैंक पर दूरसंचार कंपनियों की उधारी 1.8 लाख करोड़ रुपये है जिनमें से फंड आधारित निवेश ही करीब 1.24 लाख करोड़ रुपये है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक कंपनियों को 17 मार्च तक समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाये का भुगतान दूरसंचार विभाग को करना है और यह रकम करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये तक की है। यह बकाया रकम उन कंपनियों का भी है जो दिवालिया हो चुकी हैं। हालांकि इनमें फंसे कर्ज की रकम कितनी है यह स्पष्ट नहीं है क्योंकि बैंक इसका खुलासा नहीं करते हैं। 
 
वोडाफोन आइडिया को 50,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है जबकि भारती एयरटेल को 35,500 करोड़ रुपये और टाटा टेलीसर्विसेज पर 14,000 करोड़ रुपये की रकम बकाया है जबकि इसने अपना मोबाइल कारोबार एयरटेल को बेच दिया है। वोडाफोन आइडिया के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला ने पहले ही कहा है कि एजीआर बकाया पर सरकार की तरफ से कोई राहत नहीं मिली है ऐसे में कंपनी को अपना कारोबार बंद करना पड़ेगा। बिड़ला ने दिसंबर में ही कहा था, 'अगर हमें कुछ नहीं मिल रहा तब मुझे लगता है कि वोडाफोन आइडिया के लिए यह कहानी का अंत ही है। फंसी हुई रकम के बाद ऊपर से रकम लगाने का कोई मतलब नहीं है। हम कारोबार बंद कर देंगे।' अगर वोडाफोन कारोबार बंद करती है तो यह बैंकिंग उद्योग के लिए बड़ा झटका होगा। बैंकरों का कहना है कि वे वित्तीय संसाधन में कमी की प्रक्रिया के तहत पुराने 3जी और 5जी स्पेक्ट्रम की बिक्री मौजूदा खिलाडिय़ों को करने पर ही रिकवरी की उम्मीद कर सकते हैं। नए 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी जल्द ही होनी है। प्रावधान के जरिये बैंकों पर तत्काल असर होगा। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज में बैंकिंग विश्लेषक नितिन अग्रवाल कहते हैं, 'इससे पहले की तिमाही में डीएचएफएल को गैर-निष्पादित खाते में डालने के बाद बैंकिंग क्षेत्र को अन्य बड़ी कंपनियों के खाते से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।' अग्रवाल ने कहा, 'उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को बैंकिंग तंत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर चिंता जताई है क्योंकि कई बैंकों का दूरसंचार क्षेत्र में फंड तथा गैर-फंड निवेश है खासतौर पर वोडाफोन आइडिया जो काफी घाटे में है। 
 
एसबीआई, आईडीबीआई बैंक, यस बैंक, इंडसइंड बैंक और आईडीएफसी फस्र्ट बैंक ने अपेक्षाकृत ज्यादा निवेश किया है जबकि पिछली तिमाही के दौरान केवल आईडीएफसी फस्र्ट बैंक ने 50 फीसदी प्रावधान किया है।' दूसरंचार क्षेत्र में संकट बढऩे की वजह से ही इस हफ्ते से पहले मूडीज ने इंडसइंड बैंक की रेटिंग स्थिर के बजाय नकारात्मक कर दी है। विश्लेषक और बैंकर इस मुद्दे पर और स्पष्टता बनने के लिए 16 मार्च तक का इंतजार करेंगे जिस दिन अगली सुनवाई होनी है। दिसंबर 2019 तक दूरसंचार क्षेत्र में आईडीबीआई बैंक का निवेश 5,554 करोड़ रुपये है जिनमें से 5,349 करोड़ रुपये गैर-फंडेड जबकि बाकी 205 करोड़ रुपये फंडिंग वाला निवेश है। जबकि कुल फंसा कर्ज करीब 28 करोड़ रुपये है। 
 
वरिष्ठ आईडीबीआई बैंक के अधिकारी का कहना है कि बैंक ने गारंटी के रूप में गैर-फंडिंग वाला निवेश किया है जो ज्यादातर वोडाफोन में किया गया है। अगर लाभार्थी गारंटी को खत्म करता है तब यह फंडिंग वाला निवेश हो जाएगा। हालांकि फंडेड निवेश होने के बावजूद कर्ज लेने वालों को भुगतान के लिए केवल तीन महीने का वक्त मिलेगा। इसका भुगतान न करने की स्थिति में यह गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (फंसे कर्ज) की श्रेणी में चला जाएगा और पहले साल में इसका प्रावधान 15  फीसदी होगा। ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि इसका तत्काल असर नहीं पड़ेगा।
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