बिजनेस स्टैंडर्ड - अहम परियोजाओं पर ध्यान
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अहम परियोजाओं पर ध्यान

श्रेया जय / नई दिल्ली February 14, 2020

भारतीय रेल राष्ट्रीय महत्त्व की चल रही परियोजनाओं के काम में तेजी लाने के लिए उनके लिए प्राथमिकता के आधार पर वित्तपोषण करेगी। खासकर उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन पर भीड़ कम करने के लिए काम किया जा रहा है। रेलवे ने पूरी होने के करीब वाली परियोजनाओं को पूर्ण बजट अनुदान और शुरुआती चरण वाली परियोनजाओं का चरणबद्ध वित्तपोषण करेगी। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने कहा कि इससे उन परियोजनाओं के काम में तेजी आएगी, जो कंजेशन घटाने के हिसाब से अहम हैं। कंजेशन कम करने के लिए 58 परियोजनाएं चिह्नित की गई हैं, इनमें से 8 शुरू हो चुकी हैं और उनमें से 7 चालू वित्त वर्ष की हैं।
 
रेवले को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 70,000 करोड़ रुपये बजट आवंटन किया गया है, जबकि पूंजीगत व्यय की राशि 1.61 लाख करोड़ रुपये है।  यादव ने कहा, 'करीब 89 प्रतिशत परियोजनाओं को औसतन प्रति परियोजना 140 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 11 प्रतिशत परियोजनाओं को प्रति परियोजना औसत आवंटन 1,000 करोड रुपये है। सबसे ज्यादा 3,8000 करोड़ रुपये आवंटन उधमपुर बारामूला रेल लाइन (यूबीआरएल) के लिए किया गया है।'  उन्होंने कहा कि यूबीआरएल परियोजना जून 2022 में पूरी होने की उम्मीद है, जिसकी निगरानी प्रधानमंत्री कार्यालय कर रहा है, जिससे इसे तेजी से पूरा किया जा सके। पहले इसे 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन परियोजना में देरी हो रही है। 
 
272 किलोमीटर की उधमपुर बारामुला रेल लाइन में कटरा और बनिहाल के बीच करीब 111 किलोमीटर रेल खंड पूरा नहीं हुआ है। इसके लिए 21,653 करोड़ रुपये आवंटन किया गया है। रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि 6,000 करोड़ रुपये लागत से 161 किलोमीटर रेलखंड का काम पूरा कर लिया गया है, जिसमेंं 97 किलोमीटर लंबी सुरंग है। इस परियोजना में चिनाव नदी पर 359 मीटर ऊंचा पुल भी होगा, जिसके बारे में अधिकारियोंं का दावा है कि यह एफिल टॉवर (324 मीटर) से ऊंचा होगा।  चिनाव रेल पुल की अनुमानित लागत 1,250 करोड़ रुपये है, जो घाटी का प्रवेश द्वार होगा और इससे घाटी शेष भारत से रेल मार्ग से जुड़ जाएगी और इससे तैयार माल को तेजी से भेजे जाने और सुरक्षा बलों की तेज आवाजाही में मदद मिलेगी। इनके अलावा राष्ट्रीय महत्त्व की 4 और परियोजनाएं हैं, जिन्हें अगले 3 साल में पूरा किया जाना है। इसमें मिजोरम में 51 किलोमीटर लंबी सैरंग बैबेली ब्रॉड गेज लाइन शामिल है, जिस पर 5,021 करोड़ रुपये लागत आएगी। इसके 12,524 करोड़ रुपये लागत की 83 किलोमीटर लंबी अलावा दीमापुर कोहिमा लाइन, सिक्किम की 4,000 करोड़ रुपये लागत से प्रस्तावित सिवोक-रंगपो रेल लाइनें शामिल हैं। 
 
यादव ने कहा कि बुनियादी ढांचा पर रेलवे द्वारा ध्यान बढ़ाने की वजह से अपेक्षित परिणाम आए हैं। उन्होंने कहा कि 2009 से 2014 के बीच जहां 7,599 किलोमीटर रेल लाइनें बनीं, वहींं 2014-19 के बीच 13,124 किोलमीटर लंबी लाइनें बनीं और इसमें 173 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 
Keyword: railway, projects, train,,
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