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सरकार बजट में बदलाव को तैयार

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली February 14, 2020

उद्योगों की चिंता दूर करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के प्रस्तावों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय घोषणाओंं से इतर भी कदम उठाने को इच्छुक है, जिससे कि अर्थव्यवस्था में तेजी लाई जा सके। विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद आज उन्होंने कहा, 'बजट के प्रस्तावों में जरूरत के मुताबिक बदलाव और इससे इतर भी जरूरत पडऩे पर कदम उठाए जा सकते हैं। बजट के बाद ऐसा करने को हम इच्छुक हैं।'  वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि वित्त मंत्रालय प्रत्यक्ष कर समाधान योजना के लिए 2 दिन के भीतर विस्तृत नियम लाएगी, जिससे इस योजना के मुताबिक कर विवाद सुलझाने के इच्छुक लोगों के लिए स्थिति साफ हो सके।  बजट में बदलाव की बात ऐसे समय की गई है, जब अगले महीने संसद में काम शुरू होने पर वित्त विधेयक पर चर्चा होने वाली है। उद्योग जगत ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी), बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट( इनविट) लाभांश कर, इंप्लाई स्टॉक ऑप्शन (ईसॉप), रियल एस्टेट के अलावा अन्य क्षेत्रों में कर को लेकर स्पष्टता की मांग की है। 
 
संशोधित प्रत्यक्ष कर समाधान या विवाद से विश्वास विधेयक अभी संसद में पेश किया जाना है और इसके बाद उसे लागू किया जाएगा। सीतारमण ने कहा कि विधेयक के तहत नियम अधिसूचना के रूप में नहीं होंगे।  उन्होंने कहा कि विस्तृत ब्योरे से तस्वीर साफ हो सकेगी कि संसद द्वारा पारित विधेयक के बाद अधिसूचना में क्या होगा।  उन्होंने कहा, 'एक या दो दिन में हम इस पर बगैर पत्र लाए स्थिति साफ करेंगे, क्योंकि संसद में इसे पारित नहीं किया गया है।'  उन्होंने डेलॉयट, पीडब्ल्यूसी सहित सलाहकारों को कहा कि उन्हें यह देखने और अपने क्लांइट को इनके बारे में बताने के लिए वकक्त है। वित्त मंत्री ने सलाहकारों से कहा, 'विधेयक पारित होने के पहले आपको 30 दिन या 3 सप्ताह मिलेंगे।' 
 
हाल ही में कैबिनेट ने विधेयक के विस्तार की संभावना को हरी झंडी दी है, जिससे कि विवाद से विश्वास को और ज्यादा आकर्षक बनाया जा सके। इसके दायरे में पंचाटों और कर्ज वसूली ट्रिब्यूनल में लंबित याचिकाएं आएंगी।  इस योजना में पुनरीक्षण और कम मूल्य के विवाद शामिल होंगे। कैबिनेट ने उन करदाताों की विवादित राशि भी घटाकर आधी कर दी थी, जिन्हें उनके पक्ष में आदेश मिले हैं, लेकिन आयकर विभाग ने उन आदेशों को चुनौती दी थी। सीतारमण ने पहले ही कर मामलों में विवाद के समाधान के लिए लोकसभा में विधेयक पेश कर दिया है। यह राशि 9.3 लाख करोड़ रुपये है। इस योजना में मामले के निपटान पर ब्याज, जुर्माने और दंड से छूट दी गई है।
 
इसके पहले यह आयुक्त (अपील) आयकर अपील न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के पास 31 जनवरी 2020 तक लंबित ममलों तक सीमित थी। अब अगर 31 मार्च तक बकाया कर का भुगतान कर दिया जाता है तो पूरी तरह से ब्याज व जुर्माना माफ किया जाएगा। इसके अलावा उसके बाद 10 प्रतिशत विवादित राशि का भुगतान भी कर दिया जाएगा।  वित्त मंत्री ने परिचर्चा में शामिल पेशेवरों को आश्वस्त किया कि उनका मंत्रालय सुझावों पर गौर करेगा। इससे पहले, सीतारमण मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में इसी प्रकार की परिचर्चा कर चुकी हैं। बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार और मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमिताभ कांत शामिल थे। इसके अलावा वित्त मंत्रालय के सचिव भी इसमें उपस्थित थे।
Keyword: nirmala sitaraman, economy, budget,,
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