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वैश्विक खाद्य तेल व्यापार में हलचल

रॉयटर्स / कुआलालम्पुर /मुंबई February 14, 2020

भारत द्वारा मलेशिया के पाम तेल आयात पर रोक से वैश्विक खाद्य तेल कारोबार प्रभावित हुआ है। भारत की मांग पूरी करने के लिए इंडोनेशिया ने अपनी आपूर्ति का रुख उसकी ओर कर दिया है। इससे मलेशिया इंडोनेशिया द्वारा छोड़े गए बाजारों में पहुंच बनाने की होड़ में लग गया है और भारत पाम के बदले अन्य तेलों का विकल्प चुन रहा है। दुनिया के शीर्ष पाम तेल खरीदार भारत ने पिछले महीने रिफाइंड पाम तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिए थे। सूत्रों का कहना है कि भारत के नए नागरिकता कानून और कश्मीर की कार्रवाई पर मलेशिया द्वारा की गई आलोचना के जवाब में यह कदम उठाया गया था। कारोबारियों ने भी मलेशिया से कच्चे पाम तेल की खरीद रोक दी थी।

 
मलेशिया के पाम निर्यात के नवीनतम आंकड़ों से भारत के प्रतिबंधों के असर का पता चलता है। जनवरी में भारत को भेजी गई खेपें पिछले साल की तुलना में 85 प्रतिशत लुढ़ककर 46,876 टन रह गई। वर्ष 2011 के बाद से यह सबसे कम स्तर है। पिछले साल मलेशिया के कुल पाम तेल निर्यात में भारत का योगदान करीब एक-चौथाई रहा था और यह पांच साल से मलेशिया के पाम तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। इसकी भरपाई के लिए मलेशिया ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और घाना को निर्यात करने के साथ ही अपनी खेपें का रुख अन्य गंतव्य देशों की ओर कर दिया है। ये वे बाजार हैं जो परंपरागत रूप से इंडोनेशिया से बड़ी मात्रा में खरीदारी करते रहे हैं।
 
वैश्विक स्तर पर व्यापार करने वाली एक कंपनी के मुंबई स्थित कारोबारी ने कहा कि पाम तेल बाजार में फिर से संतुलन स्थापित हो रहा है। यूरोपीय और दामों के प्रति संवेदनशील रहने वाले एशिया के खरीदार कम दामों के कारण इंडोनेशिया से मलेशिया की ओर जा रहे हैं। भारत द्वारा अधिक खरीद की उम्मीद से इस साल इंडोनेशिया के दाम बढ़कर मलेशिया के स्तर पर चले गए हैं। सरकारी एजेंसी और उद्योग के संगठन मलेशिया पाम तेल परिषद (एमपीओसी) के अध्यक्ष ली येओउ चॉर ने कहा कि मलेशिया में भंडार के कम स्तर के कारण अब तक उत्पादकों को सहारा मिलता रहा है। अन्यथा भारत के हटने से पडऩे वाला असर ज्यादा गंभीर होता।
 
ली ने कहा, 'फिलहाल मलेशिया के लिए स्थिति गंभीर नही है। अब भी हमारा स्टॉक कम है ... (भारत) इंडोनेशिया से और खरीद कर सकता है। लेकिन इससे बाजार में कहीं न कहीं कोई जगह बनेगी।' मलेशिया का भंडार दो साल के निचले स्तर पर है। ली ने कहा कि मलेशिया पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया और अफ्रीका में बाजार हिस्सेदारी का विस्तार करने पर विचार कर रहा है। मलेशिया पाम ऑयल बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले महीने मलेशिया ने पाकिस्तान को 1,70,802 टन पाम तेल बेचा था, जबकि एक साल पहले 80,660 टन तेल बेचा गया था। मलेशिया ने बांग्लादेश को 12,527 टन तेल बेचा है जो पिछले साल के 575 टन की तुलना में अधिक है। पिछले साल इंडोनेशिया इन बाजारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था।
 
पाम तेल के विकल्प चुन रहा भारत
 
पिछले साल जुलाई से दिसंबर के दौरान बेंचमार्क पाम तेल के दामों में 60 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है, अलबत्ता हाल ही में भारतीय मांग और चीन में कोरोनोवायरस के प्रकोप की चिंताओं से दामों में गिरावट आई है। दामों के प्रति संवेदनशील रहने वाले भारत ने बढ़ते दामों की वजह से पिछले तीन महीने में पाम की खरीद कम कर दी थी। पाम और अन्य तेलों की कीमतों के बीच घटते अंतर से भी पाम तेल के विकल्प चुनने को प्रोत्साहन मिला है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले जनवरी में भारत का पाम तेल आयात 27 प्रतिशत फिसलकर 5,94,804 टन रह गया है, जबकि सोया तेल और सूरजमुखी तेल का आयात बढ़कर क्रमश: 40 और 51 प्रतिशत हो गया है। इससे देश की खाद्य तेल आयात बास्केट में पाम तेल की हिस्सेदार पर दबाव बना है और यह हिस्सेदारी कम होकर 51 प्रतिशत रह गई है जो जून 2018 के बाद से सबसे निचला स्तर है।
 
एसईए के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि खरीदारों को बनाए रखने के लिए इंडोनेशिया के आपूर्तिकर्ता दाम कम कर सकते हैं वरना भारत वैकल्पिक तेलों की ज्यादा खरीद जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया मलेशिया की आपूर्ति के मुकाबले ज्यादा पैसा वसूली जारी नहीं रख सकता है। जब भी पाम तेल और मृदु तेलों के बीच का अंतर कम होता है, भारतीय खरीदार मृदु तेलों की ओर रुख कर लेते हैं।
Keyword: palm oil, export, import, malaysia, Indonesia,
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