बिजनेस स्टैंडर्ड - एसऐंडपी ने निम्नतम निवेश पर रखी रेटिंग
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एसऐंडपी ने निम्नतम निवेश पर रखी रेटिंग

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली February 13, 2020

स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स (एसऐंडपी)  ने भारत की रेटिंग स्थिति परिदृश्य के साथ निम्न निवेश ग्रेड पर बरकरार रखी है क्योंकि अर्थव्यवस्था की राजकोषीय स्थिति कमजोर बनी हुई है, जो अगले कुछ वर्षों में मजबूती की राह में रोड़ा है।  एसऐंडपी ने एक बयान में कहा कि वित्तीय क्षेत्र में कर्ज में मुश्किलें बनी हुई हैं, जिससे आगामी तिमाहियों में निजी खपत में वृद्धि प्रभावित होगी। इसने कहा कि हालांकि आर्थिक विस्तार को प्रभावित करने वाले कारक चक्रीय हैं और अर्थव्यवस्था में ढांचागत वृद्धि बनी हुई है। इसी तरह एजेंसी का मानना है कि अर्थव्यवस्था में अगले 2-3 साल में धीरे-धीरे सुधार आएगा। भारत की स्थिर रेटिंग का आउटलुक एजेंसी के इस नजरिये को दर्शाता है कि अगले दो-तीन साल में  आर्थिक वृद्धि में स्थिरता आएगी और यह मौजूदा निचले स्तर से धीरे-धीरे सुधरने लगेगी। राजकोषीय घाटा ऊंचा रहेगा, लेकिन अनुमानों के मुताबिक ही रहेगा। 
 
अगर सरकार अपने राजकोषीय घाटे में भारी कमी करती है तो रेटिंग में सुधार किया जा सकता है। राजकोषीय घाटे में कमी से सरकार पर शुद्ध कर्ज का स्तर कम होगा।  अगर भारत की जीडीपी वृद्धि एजेंसी के अनुमान से नीचे आती है या केंद्र सरकार का घाटा मौजूदा स्तरों से और बढ़ता है या राजनीतिक घटनाक्रम आर्थिक सुधारों की रफ्तार को कमजोर करते हैं तो रेटिंग और घटाई जा सकती है। एसऐंडपी ने कहा कि यह रेटिंग देश की औसत से अधिक जीडीपी वृद्धि को दर्शाती है। इसके अलावा भारत के मजबूत लोकतांत्रिक संस्थान नीतिगत स्थिरता को बढ़ावा देते हैं। 
 
हालांकि ये ताकत थोड़ी कमजोर इसलिए पड़ जाती हैं क्योंकि देश की प्रति व्यक्ति आय कम है  और राजकोषीय घाटा लगातार ऊंचा बना हुआ है, जिससे सरकार कर्ज का स्तर ऊंचा बना हुआ है। एजेंसी का अनुमान है कि आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2020-21 में सुधरकर 6 फीसदी पर पहुंच जाएगी, जो चालू वित्त वर्ष में पांच फीसदी, अगले वित्त वर्ष में 7 फीसदी और उससे अगले वित्त वर्ष में 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है।  एसऐंडपी ने कहा, 'हमारा अनुमान है कि भारत की अर्थव्यवस्था हाल में वास्तविक जीडीपी वृद्धि में गिरावट के बावजूद अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करती रहेगी।' रेटिंग एजेंसी के मुताबिक पूरी वित्तीय प्रणाली और विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र में कर्ज में सख्ती बरकरार है।  एजेंसी ने कहा कि इसका पता ऋण वृद्धि में लगातार गिरावट से चलता है।
 
एसऐंडपी ने कहा कि सितंबर 2018 में इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज लिमिटेड (आईएलऐंडएफएस) के डिफॉल्ट करने और उसके बाद छोटे-मोटे डिफॉल्टों से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में नकदी की किल्लत है। इसके चलते घरेलू बाजार में ऋण की स्थितियां मिली-जुली हैं।  इसने कहा, 'एनबीएफसी क्षेत्र में कमजोर रुझान से आगामी तिमाहियों में निजी खपत में वृद्धि घट सकती है।' एजेंसी ने कहा कि सरकार ने अगस्त में घोषणा की थी कि वह सरकारी क्षेत्र के बैंकों का विलय करेगी। इससे अगले 12 से 24 महीनों में ऋण की वृद्धि कमजोर रह सकती है। 
Keyword: S&P, rating, economy,,
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