बिजनेस स्टैंडर्ड - भुगतान का वक्त बढ़े: निर्यातक
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भुगतान का वक्त बढ़े: निर्यातक

दिलीप कुमार झा /  February 13, 2020

कोरोनावायरस का संक्रमण फैलने की वजह से चीन के आभूषण आयातकों से 2 अरब डॉलर की फंसी हुई राशि नहीं मिल सकी है ऐसे में भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात संवद्र्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने बैंकों से गुजारिश की है कि उन्हें प्राप्त राशि का भुगतान करने के लिए छह महीने का विस्तार दिया जाए। फिलहाल बैंक देश से रत्न एवं आभूषण के निर्यात के लिए छह महीने के लिए कर्ज देते हैं। लेकिन निर्यातकों का मानना है कि छह महीने की अवधि पर्याप्त नहीं है क्योंकि चीन में वायरस संक्रमण और दुकानों तथा फैक्टरियों के बंद होने की वजह से चीन के खरीदारों से पूरा पैसा मिलना अभी संभव नहीं है।

 
चीन में आभूषण बिक्री के लिहाज से चीनी नववर्ष बेहद खराब गुजरा क्योंकि लोग वायरस संक्रमण के डर से घर के भीतर ही रहे और कई हफ्ते तक दुकान तथा फैक्टरियां बंद रहीं। ऐसे में दो महीने तक निर्यात का पैसा वापस नहीं मिल सका।  गुरुवार को आयोजित इंडियन इंटरनैशनल ज्वैलरी शो में हिस्सा लेने आए जीजेईपीसी के उपाध्यक्ष कोलिन शाह ने कहा, 'इसलिए हमने कर्ज देने वाले बैंकों और संबंधित मंत्रालयों को छह महीने का अतिरिक्त समय देने की मांग की है। भारत के रत्न एवं आभूषण कारोबार पर कोरोनावायरस का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि चीन में कितने समय तक दुकानें तथा फैक्टरियां बंद रहेंगी।'
 
भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई वाले कर्जदाता बैंकों का आभूषण क्षेत्र में कुल कर्जराशि करीब 40,000 करोड़ रुपये है। इस क्षेत्र में एसबीआई का कुल 6,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।  करीब 40 अरब डॉलर के भारत के सालाना आभूषण निर्यात कारोबार में चीन करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी रखता है। इस तरह चीन का भारत से कुल आभूषण आयात करीब 12 अरब डॉलर का है। घरेलू उपभोग की दृष्टि से, भारत के कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 6.5 अरब डॉलर है और शेष करीब 5.5 अरब डॉलर के आयात को दूसरे ब्रांड तथा लेबल के साथ अमेरिका एवं दूसरे विकसित देशों को भेज दिया जाता है। 
 
उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चीनी नववर्ष के लिए आभूषणों की बिक्री अच्छी रही और इस दौरान हुई बिक्री चीन की सालाना बिक्री का 25-30 प्रतिशत रही। इस त्यौहार के लिए ज्वैलरी खुदरा विक्रेताओं ने पहले की ही तरह तैयारी शुरू की और 4-5 महीने पहले ही भारत में आपूर्तिकर्ताओं को ऑर्डर दे दिए। भारतीय आभूषण निर्यातकों ने भी चीन से ऑर्डर लिए और चीनी नववर्ष से करीब एक महीने पहले वहां दुकानों में सामान उपलब्ध कराने के हिसाब से कार्य को अंजाम दिया।  जनवरी महीने की शुरुआत में कोरोनावायरस की खबरें आना शुरू हुईं और धीरे धीरे चीन के कारोबारी शहर इसके जाल में फंसते गए। इससे कारोबार लगातार गिरता गया। चीन सरकार ने नववर्ष की छुट्टियों को दो सप्ताह तक और बढ़ा दिया है। हालांकि वायरस के विस्तार को देखते हुए कारोबारियों ने अनिश्चितकाल के लिए अपनी दुकानों को बंद कर लिया है। 
 
जीजेईपीसी के कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे कहते हैं, 'कोरोनावायरस के बाद न सिर्फ रत्न एवं आभूषण बिक्री, वरन पूरा कारोबार ही ठप पड़ गया है। आरबीआई ने हमें निर्यात प्राप्तियों के लिए छह महीने का समय दिया है। हालांकि इसमें अतिरिक्त छह महीने का समय मिलने से कर्जग्राहियों को जोखिम तथा नुकसान से बचने में मदद मिलेगी।' इस बीच, भारत का कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात अप्रैल से दिसंबर के बीच औसतन पांच प्रतिशत कम हुआ है जिसका प्रमुख कारण वैश्विक आर्थिक माहौल में व्याप्त अनिश्चितता रही। यह गिरावट जनवरी में बढ़कर नौ प्रतिशत हो गई। रे कहते हैं कि वित्त वर्ष 2019-20 में भारत के कुल रत्न एवं आभूषण निर्यात में सात फीसदी की गिरावट रहेगी। हालांकि जीजेईपीसी के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल का मानना है कि भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात में जल्द ही सुधार आएगा। 
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