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वैलेन्टाइंस डे की मांग से महंगा हुआ गुलाब

दिलीप कुमार झा / मुंबई February 13, 2020

वैलेन्टाइंस डे पर प्यार का इजहार करने के लिए गुलाब भेंट करना सबसे कम खर्च वाले तरीकों में से एक है। हालांकि इस समय ऐसा करने का मतलब है 20 से 25 प्रतिशत ज्यादा दाम चुकाना। इसकी वजह यह है कि इस मौके पर (14 फरवरी को) मांग में तेज इजाफा हो जाता है, जबकि प्रमुख उत्पादक केंद्रों से आपूर्ति कम है। पुणे के गुलाब किसान, थोक विक्रेता और निर्यातक वाइब्रेंट फ्रेश फार्म के निदेशक इदरीस सैफी ने कहा कि पिछले साल महाराष्ट के पुणे और कोल्हापुर में तथा कर्नाटक के बेंगलूरु समेत प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में बाढ़ से पौधों को काफी नुकसान हुआ था। इस साल हम प्रति गुलाब 12 से 15 रुपये के बीच बेच रहे हैं, जबकि पिछले साल इस समय दाम प्रति गुलाब नौ से 10 रुपये थे। उन्होंने कहा कि खुदरा विक्रेता प्रति गुलाब 20 से 22 रुपये के बीच बेच रहे हैं, जबकि पिछले साल इस समय दाम 15 से 16 रुपये के बीच थे।
 
यूरोपीय संघ और अमेरिका समेत विदेशों से भी मांग में उछाल आई है। हालांकि निर्यातकों ने अपनी खेपों की समय पर डिलिवरी की है, लेकिन वे विदेश में कारोबार जोरदार ढंग से बढ़ाने में असमर्थ रहने से नाखुश हैं। कोलकाता के निर्यातक फोना इंटरनैशनल के निदेशक विपुल जैन ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एक न्यूनतम अवधि के लिए रोजगार सुनिश्चित करने वाली योजना) की वजह से श्रम की उपलब्धता सीमित हो गई है। यहां तक कि अधिक मजदूरी का वादा करने के बाद भी खेतीहर मजदूर पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए हम विदेशों की जरूरत के अनुसार खेप नहीं भेज सकते थे। हमने इस साल कम ऑर्डर बुक किए हैं।
 
केंद्र सरकार ने भी भारत से वस्तु निर्यात योजना के तहत दी जाने वाली सब्सिडी कम करके पांच प्रतिशत कर दी है, जबकि पहले यह सात प्रतिशत थी। जैन अफसोस जताते हुए कहते हैं कि दुर्भाग्य से विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा के कारण फूलों से होने वाली आमदनी में खासा इजाफा नहीं हुआ है। इसलिए खरीद की लागत बढऩे और स्थिर आमदनी की वजह से इस साल गुलाब निर्यात से लाभ में काफी कमी आई है। गुलाब निर्यात का कारोबार उतना अच्छा नहीं है, जैसा कुछ साल पहले तक हुआ करता था। इस वजह से इस वित्त वर्ष में भारत के गुलाब निर्यात में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट आने का अनुमान है।
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