बिजनेस स्टैंडर्ड - विवाद से विश्वास योजना का दायरा बढ़ाया
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विवाद से विश्वास योजना का दायरा बढ़ाया

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 02 12, 2020

मंत्रिमंडल की मिली मंजूरी

सीतारमण ने पिछले सप्ताह लोक सभा में पेश किया था विधेयक
ऋण वसूली पंचाटों में लंबित मामले होंगे शामिल
कर संशोधन और तलाशी तथा जब्ती के छोटे मामलों को भी जगह

बिजनेस स्टैंडर्ड विवाद से विश्वास योजना का दायरा बढ़ायाकेंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना को आकर्षक बनाने के लिए इसमें बदलाव को आज मंजूरी दे दी। इस बदलाव का मकसद इसका दायरा बढ़ाकर मध्यस्थता और ऋण वसूली पंचाटों में लंबित मुकदमों को भी इसमें शामिल करना है। इसके अलावा कर संशोधन और तलाशी तथा जब्ती के छोटे मामले भी इसमें शामिल किए जाएंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9.3 लाख करोड़ रुपये से संबंधित विवादित कर मामलों के समाधान के लिए एक सप्ताह पहले प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 लोक सभा में पेश किया था। उन्होंने अपने बजट भाषण में यह विधेयक लाने की घोषणा की थी। 

इस योजना के तहत कर विवाद से जुड़े मामले के निपटारे के लिए ब्याज, जुर्माना और सजा माफ करने का प्रावधान है। पहले यह योजना 31 जनवरी, 2020 तक आयुक्त (अपील), आय कर अपील पंचाट, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालयों में लंबित मामलों तक ही सीमित थी लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। इसके तहत 31 मार्च तक विवाद का निपटारा करने पर ब्याज और जुर्माना नहीं देना होगा जबकि इसके बाद विवादित राशि का 10 फीसदी अतिरिक्त भुगतान करना होगा।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि मंत्रिमंडल ने ऋण वसूली पंचाटों, मध्यस्थता पंचाटों और अदालतों में लंबित मुकदमों और कर संशोधन से जुड़े सभी मामलों को इस योजना में शामिल करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न पक्षों की तरफ से मिले सुझावों के आधार पर यह फैसला किया गया है।

जावडेकर ने कहा, 'आम बजट के बाद वित्त मंत्री ने विभिन्न पक्षों से चर्चा करके इस बारे में सुझाव मांगे थे। इन सुझावों के आधार पर संसद के इस सत्र में नए संशोधन किए जा रहे हैं।' उन्होंने कहा कि तलाशी और जब्ती से जुड़े ऐसे मामले भी इस योजना में शामिल किए जाएंगे जहां वसूल की गई राशि 5 करोड़ रुपये से कम है। जावडेकर ने कहा कि इस कवायद का मकसद विधेयक के दायरे को बढ़ाना है। 

अशोक माहेश्वरी ऐंड एसोसिएट्स एलएलपी में मैनेजिंग पार्टनर अमित माहेश्वरी ने विधेयक में संशोधन के फैसले को सही कदम बताते हुए कहा कि इससे करदाताओं को अपने मामले निपटाने में आसानी होगी और सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर इस योजना का मकसद राजस्व जुटाना और मुकदमों की संख्या में कमी लाना है तो फिर विभिन्न पंचाटों के तहत लंबित मामलों को इस योजना से बाहर रखने का कोई मतलब नहीं है। तलाशी और जब्ती के छोटे मामलों को भी इस योजना में शामिल करना अच्छा कदम है और इससे खासकर ऐसे करदाताओं को मदद मिलेगी जिनका मामला कमजोर है। इससे फंसा हुआ कर राजस्व विवादमुक्त होगा और लंबित मामलों की संख्या घटाने में मदद मिलेगी। तलाशी के कई मामले मुकदमेबाजी में फंस जाते हैं और अब उन्हें भी निश्चित रूप से राहत मिलेगी। यह योजना 30 जून तक जारी रहेगी। अगर कर बकाया केवल विवादित ब्याज या और जुर्माने से जुड़ा है तो 31 मार्च तक विवाद का निपटारा करने पर विवादित जुर्माने/ब्याज की 25 फीसदी राशि का भुगतान करना होगा, उसके बाद यह राशि 30 फीसदी हो जाएगी। 

एएमआरजी एसोसिएट्स के रजत मोहन ने कहा कि अप्रत्यक्ष कर के लिए विवाद समाधान योजना की नाकामी के बाद सरकार विवाद से विश्वास योजना को सफल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। यह योजना सभी मामलों पर लागू होगी, चाहे उनके कर मांग लंबित हो या इसका भुगतान कर दिया गया हो। हालांकि, ऐसा लगता है कि अघोषित विदेशी आय या संपत्ति और दोहरे कराधान से बचने के लिए किए गए समझौते के तहत मिली जानकारी के आधार पर किए गए कर आकलन और पुनर्आंकलन के मामलों को अब भी योजना से बाहर रखा गया है। 
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