बिजनेस स्टैंडर्ड - अर्थव्यवस्था में दिख रहे सुधार के संकेत
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अर्थव्यवस्था में दिख रहे सुधार के संकेत

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 02 11, 2020

अर्थव्यवस्था लौट रही पटरी पर

2019-20 में एफडीआई में आई है तेजी
जीएसटी संग्रह कम से कम छह बार 1 लाख करोड़ रुपये से रहा है अधिक

बिजनेस स्टैंडर्ड अर्थव्यवस्था में दिख रहे सुधार के संकेतवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे आर्थिक सुस्ती से बाहर निकल रही है। उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक हालात दोबारा पटरी पर लौटने के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। मंगलवार को संसद के ऊपरी सदन राज्य सभा में बजट पर चर्चा के दौरान सीतारमण ने कहा कि 2008-09 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद मनमोहन सिंह सरकार ने जो गलती की थी, उनकी सरकार वैसी गलती नहीं करेगी। उन्होंने संसद के निचले सदन लोकसभा में कहा, 'सात ऐसे महत्त्वपूर्ण संकेत हैं, जो अर्थव्यवस्था में सुधार दर्शा रहे हैं।' उन्होंने संसद के दोनों सदनों में इन संकेतों का जिक्र किया। 

सीतारमण ने कहा कि नवंबर के अंत में 2019-20 के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 24.4 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो 2018-19 में अप्रैल-नवंबर अवधि में 21.1 अरब डॉलर रहा था। वित्त मंत्री ने कहा कि अप्रैल-नवंबर 2019-20 की अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के मद में देश में 12.6 अरब डॉलर रकम आई। बकौल सीतारमण, पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 8.7 अरब डॉलर रहा था।

सीतारमण ने कहा कि विभिन्न ढांचागत परियोजनाओं में निवेश के लिए नैशनल इन्वेस्टमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड को 22,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सीतारमण ने कहा कि औद्योगिक उत्पादन सूचंकांक, विनिर्माण एवं सेवाओं पर पर्चेंजिंग मैनेजर्स सूचकांक, विदेशी मुद्रा और कर संग्रह सभी आर्थिक सुधार के संकेत दे रहे हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, 'जनवरी में सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व 1.10 लाख करोड़ रुपये रहा था। वित्त वर्ष 2020 में सकेल जीएसटी राजस्व कम से कम छह बार 1 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है।' उन्होंने कहा कि सरकार की नजर चार प्रमुख बिंदुओं निजी निवेश, निर्यात, निजी एवं सार्वजनिक उपभोग पर रहेगा। निर्यात के संबंध में सीतारमण ने कहा कि इन क्षेत्रों को मजबूती देने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें कर वापसी योजना और निर्यातकों को अधिक ऋण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि निर्यात उत्पादों पर शुल्क एवं करों में कमी की योजना मौजूदा मर्चेंडाइज फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) की जगह लेगी। एमईआईएस वैश्विक व्यापार नियमों के अनुपालन के लिहाज से सटीक नहीं माना जाती है। 

वित्त मंत्री ने कहा, 'आरओडीटीईपी मौजूदा सभी योजनाओं के मुकाबले निर्यातकों को अधिक प्रोत्साहन देगी। मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि आरओडीटीईपी निर्यातकों को अधिक प्रोत्साहन देगी और उन्हें राहत मुहैया कराने में भी मौजूदा योजनाओं के मुकाबले कारगर साबित होगी।' सीतारमण ने यह भी कहा कि निर्यात क्षेत्र को अधिक ऋण मुहैया कराने के लिए आरबीआई ने पात्र निर्यातकों के लिए ऋण आवंटन सीमा बढ़ा दी है। उन्होंने कहा, 'इसे प्रति कर्जदाता 25 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही 100 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने की मौजूदा शर्त भी पूरी तरह हटा दी गई है।'
Keyword: nirmala sitaraman, economy, budget, FDI,,
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