बिजनेस स्टैंडर्ड - खुदरा ऋण पर बैंकों को 5 साल की राहत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, June 01, 2020 05:37 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

खुदरा ऋण पर बैंकों को 5 साल की राहत

अरूप रॉय / मुंबई 02 10, 2020

बैंकिंग

31 जनवरी से 31 जुलाई के बीच दिए गए खुदरा ऋण पर सीआरआर बनाए रखने की जरूरत नहीं
विश्लेषकों का कहना है कि जमा दरों में कटौती के बिना कोष की लागत कम करना है मकसद
विकास के पटरी पर लौटने तक उपायों को बढ़ा सकता है बैंक

बिजनेस स्टैंडर्ड खुदरा ऋण पर बैंकों को 5 साल की राहतभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज कहा कि बैंकों को 31 जनवरी से 31 जुलाई के बीच एमएसएमई, आवास और वाहनों के लिए दिए गए ऋण के बराबर राशि के लिए अपनी जमा राशि पर पांच साल तक नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) बनाए रखने की आवश्यकता नहीं होगी। फिलहाल बैंक अपनी कुल जमा राशि की 4 फीसदी रकम सीआरआर के रूप में रखते हैं। अलबत्ता, आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति में तीन उत्पादक क्षेत्रों के लिए दिए गए ऋण पर सीआरआर में कुछ रियायत देने की घोषणा की थी। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इसलिए बैंकों से कहा गया है कि वे इन तीन क्षेत्रों को छह महीने के दौरान ऋण के रूप में दी गई राशि के बराबर रकम को अपने कुल जमा आधार से अलग कर सकते हैं और उन्हें इस राशि पर पांच साल तक सीआरआर बनाए रखने की जरूरत नहीं होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि पांच साल की अवधि बैंकों के लिए पर्याप्त अवधि है। आवास ऋण लंबे समय तक चल सकता है जबकि वाहन ऋण की अवधि सात साल होती है। इस दौरान ऋण पोर्टफोलियो में कई बदलाव आएंगे क्योंकि सभी खुदरा ऋणों को अब रीपो से जोड़ दिया गया है और हर तिमाही उनमें बदलाव की जरूरत होगी। इससे ऋण पोर्टफोलियो की कम से कम एक श्रेणी में ग्राहकों को दरों में कटौती का लाभ मिलेगा। 

आरबीआई पिछले कुछ समय से इस कोशिश में लगा है। इसके पीछे उसकी सोच बैंकों के लिए फंड की लागत कम करना है। एक अर्थशास्त्री ने कहा, 'इसके साथ-साथ दीर्घकालिक रीपो परिचालन(एलटीआरओ) से बैंकों के लिए जमा दरों में कमी किए बिना फंड की लागत कम हो सकती है।'

रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में कहा कि बैंक रीपो दर पर एक और तीन साल के लिए 1 लाख करोड़ रुपये तक की नकदी की सुविधा ले सकते हैं। बैंकों का अब तक तर्क रहा है कि अगर जमा दरों में कटौती नहीं होगी तो वे उधारी दरों में कमी नहीं कर सकते हैं। जमा दरों में कमी से ग्राहक ज्यादा रिटर्न के लिए कहीं और का रुख कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एलटीआरओ बैंक के लिए जमा जैसा उत्पाद है। केंद्रीय बैंक के लिए इस तरह की योजनाओं की घोषणा के अपने जोखिम भी हैं क्योंकि इससे ब्याज दरों का चक्र पलट सकता है और दरें ऊपर जा सकती हैं।

 एक अर्थशास्त्री ने कहा, 'अगर बैंक एलटीआरओ से पैसे लेते हैं या सीआरआर में छूट से उन्हें बचत होती है और वे कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करते हैं, तो यह भी एक तरह की उधारी है और इससे अर्थव्यवस्था को मदद मिलनी चाहिए।' अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो आरबीआई सीआरआर रियायत और एलटीआरओ परिचालन को बढ़ा सकता है। मौद्रिक नीति के एक विशेषज्ञ ने कहा कि मौद्रिक नीति की कोई सीमा नहीं है। अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने तक आरबीआई नियमों में बदलाव जारी रखेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में आगे नकदी की समस्या होने की आशंका नहीं है क्योंकि विदेशी निवेशक हमेशा यहां ज्यादा प्रतिफल की तलाश में रहेंगे लेकिन आरबीआई के गैर परंपरागत उपायों से नकदी अल्पकालिक बॉन्ड निवेश से दीर्घकालिक बॉन्ड निवेश की तरफ जाएगी। एक विशेषज्ञ ने कहा, अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए आरबीआई एक नपातुला जोखिम ले रहा है। 

Keyword: RBI, bank, home loan, CRR,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बढ़ते संक्रमण मामलों के बीच लॉकडाउन में ढील सही कदम है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.