बिजनेस स्टैंडर्ड - भारत को मिल रहे कपड़ों के ऑर्डर
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भारत को मिल रहे कपड़ों के ऑर्डर

टीई नरसिम्हन / चेन्नई February 10, 2020

साल के इस समय पश्चिमी बाजार के खरीदार अगले सीजन के लिए परिधान निर्यातकों के साथ बातचीत की खातिर चीन की यात्रा करते हैं। लेकिन कोरोनावायरस की वजह से इनमें से ज्यादातर खरीदारों ने यह यात्रा रद्द कर दी है तथा भारत और अन्य देशों के निर्यातकों के साथ बातचीत करनी शुरू कर दी है। हालांकि यह अच्छी खबर है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। निर्यातकों का कहना है कि वे इस पूछताछ को ऑर्डर में तब्दील करने की हालत में नहीं हैं क्योंकि वे प्रतिस्पर्धी दामों से मुकाबला नहीं कर सकते हैं। एक अन्य बड़ी दिक्कत यह है कि भारत में कुछ निर्यात इकाइयां अटकी हुई हैं क्योंकि वे चीन से सहायक सामग्री का आयात नहीं कर पा रही हैं।
 
चूंकि यह '2019 नोवेल कोरोनावायरस' (2019-एनकोवी) पूरे चीन में फैलता जा रहा है, इसलिए वहां कई कपड़ा कारखानों ने काम रोक दिया दिया है। इस कारण चीन से कच्चे माल और कपड़ा निर्यात में अड़चन आ गई है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्स्टाइल इंडस्ट्रीज के चेयरमैन टी राजकुमार ने कहा कि चीन में इस वायरस प्रकरण के कारण भारत में तैयार कपड़ा उत्पादों, वस्त्रों और कपड़े का निर्यात कम से कम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकता है जिससे पिछले साल निर्यात में आई गिरावट से तत्काल राहत मिल सकती है।
 
लेकिन दूसरी तरफ लागत और क्षमता की समस्या भी है। फिलहाल बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों की तुलना में भारत में निर्मित परिधान लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक महंगे हैं। निर्यातकों का कहना है कि चूंकि इनमें से अधिकांश देश तकरीबन 90 से 95 प्रतिशत कच्चा माल आयात करने के लिए चीन पर निर्भर रहते हैं, इसलिए अगर सरकार इस स्थिति पर तुरंत ध्यान दे और कुछ कर लाभ प्रदान करे तो भारत के पास अब भी कुछ मौका है। कपड़े से निर्मित सामान और परिधानों पर वस्तु निर्यात प्रोत्साहन योजना (एमईआईएस) के तहत दिया जाने वाला चार प्रतिशत का प्रोत्साहन हाल ही में कपड़ा उद्योग से वापस ले लिया गया है। यह 7 मार्च, 2019 से प्रभावी है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि एमईआईएस के तहत कपड़े से निर्मित सामान और परिधान निर्यात के लिए निर्यातकों को 31 जुलाई, 2019 तक दिए गए सभी प्रोत्साहनों की वसूली की जाएगी। पिछले साल अगस्त से चार प्रतिशत का एमईआईएस भी बंद किया जा चुका है। इसके अलावा पुराने राज्य शुल्क से राहत (आरओएसएल) योजना के अंतर्गत कुछ दावे अब भी लंबित पड़े हैं। इस योजना को 7 मार्च, 2019 से बंद कर दिया गया था।
 
मुंबई स्थित क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के वरिष्ठï कार्यवाहक अध्यक्ष और परिधान उद्योग के दिग्गज राहुल मेहता ने कहा कि अपने मौजूदा बुनियादी ढांचे और दामों को देखते हुए मुझे इस बात का भरोसा नहीं है कि हम इस तरह की पूछताछ का लाभ उठाने की स्थिति में होंगे। सहायक सामान की आपूर्ति पर भी असर पड़ेगा। तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव टीआर विजय कुमार ने कहा कि भारतीय विनिर्माताओं द्वारा खरीदा गया सहायक सामान और इसका विनिर्माण वास्तव में प्रभावित हो रहा है। चीन के नव वर्ष के बाद से कोई डिलिवरी नहीं हुई है। वायरस की वजह से अब भी सभी इकाइयां बंद पड़ी हैं। इससे वास्तव में अपने ग्राहकों को समय पर डिलिवरी करने पर असर पड़ेगा।
 
करीब 10 प्रतिशत कपड़ा और 20 प्रतिशत सहायक सामान चीन से भारत आता है। एसोसिएशन का अनुमान है कि देश की कपड़ा इकाइयों द्वारा बटन, धातु के बटन, जिप, हैंगर और सुई सहित 1,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का सामान चीन से आयात किया जाता है क्योंकि यह सामान घरेलू और अन्य देशों से की जाने वाली आपूर्ति की अपेक्षा 40-50 प्रतिशत सस्ता होता है। एसटी एक्सपोट्र्स केप्रबंध निदेशक टी तिरुकुमारन ने कहा कि यही वह सबसे बड़ी समस्या है जिसका हम सामना कर रहे हैं क्योंकि बहुत-सा सहायक सामान चीन से आयात किया जाता है और अगर वे जल्दी से कारखाने नहीं खोलते हैं तो हमें बहुत देर हो जाएगी। दरअसल 21 जनवरी से गुआनझू में मेरी 12 चीजें अटकी हुई हैं।
Keyword: Corona virus, china, india, textile, export,,
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