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कर राजस्व लक्ष्य में दूसरी बार कटौती संभव

ए के भट्टाचार्य /  February 10, 2020

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमान 9 प्रतिशत घटा दिया। अगले साल अगर इन आंकड़ों में और संशोधन किए गए तो यह सरकार के लिए शर्मिंदगी की बात हो सकती है। बता रहे हैं ए के भट्टाचार्य

 
वित्त वर्ष 2020-21 के बजट की इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि इसमें प्रस्तावित कर राजस्व के आंकड़े वास्तविकता से दूर हैं। यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि इसमें कितनी सच्चाई है? क्या सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि बजट में प्रस्तावित कर राजस्व का लक्ष्य हासिल होता मुमकिन नहीं दिख रहा है? शुरुआत केंद्र के शुद्ध कर राजस्व के आंकड़ों से करते हैं। सरकार की कुल प्राप्तियों में इसकी हिस्सेदारी आधी से अधिक होती है और इसके मद्देनजर संशोधित राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.8 प्रतिशत तक सीमित करने की सरकार की क्षमता पर नकारात्मक असर हो सकता है। चालू वित्त वर्ष (2019-20) के लिए बजट के संशोधित अनुमान में शुद्ध कर राजस्व का आंकड़ा 1.45 लाख करोड़ रुपये घटा कर 15.04 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। जुलाई में बजट अनुमान के16.49 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से यह कम है। 
 
कुल मिलाकर इस 9 प्रतिशत की कमी से राजस्व के वास्तविक आंकड़े का अनुमान लगाने की सरकार की क्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अर्थव्यवस्था की हालत और वर्ष के शुरू में कर जुटाने के कर विभाग के वादों के मद्देनजर कई तरह के प्रश्न खड़े होते हैं। हालांकि इससे भी अधिक परेशान करने वाली बात यह है कि क्या पहले से कम किए जा चुके इन आंकड़ों में और कमी की जाएगी? अप्रैल 2019 से दिसंबर 2019 तक या 2019-20 के पहले नौ महीनों में जुटाए शुद्ध कर राजस्व संग्रह के आंकड़े दर्शाते हैं कि केंद्र का शुद्ध कर राजस्व महज 9.05 लाख करोड़ रुपये है। 1 फरवरी को बजट में पेश संशोधित आंकड़ों के अनुसार यह कुल कर राजस्व का करीब 60 प्रतिशत है।  
 
दूसरे शब्दों में कहें तो चालू वित्त वर्ष के बाकी तीन महीनों में अतिरिक्त 40 प्रतिशत (6 लाख करोड़ रुपये) कर संग्रह होना है। यह आंकड़ा पहले नौ महीनों में प्राप्त संग्रह की औसत मासिक दर के मुकाबले दोगुना है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ये आंकड़े प्राप्त किए जा सकते हैं। क्या ऐसी उम्मीदें उचित हैं? इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वित्त वर्ष 2018-19 पर विचार करते हैं। सरकार अप्रैल-दिसंबर 2019 में पूरे वर्ष के कुल कर राजस्व लक्ष्य का 9.36 लाख करोड़ रुपये (71 प्रतिशत) संग्रह कर पाई। इसका मतलब हुआ कि वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में पूरे वर्ष के कुल शुद्ध कर राजस्व का महज 29 प्रतिशत आंकड़ा हासिल किया गया।
 
इस वर्ष संग्रह दर 40 प्रतिशत ले जाना एक चुनौती होगी। वित्त वर्ष 2019-19 में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11 प्रतिशत रही थी, जिससे टैक्स बॉयंसी में तेजी दिखी थी। वर्ष 2019-20 में नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर केवल 7.75 प्रतिशत है। ऐसे में कर विभाग लक्ष्य हासिल करने के लिए कौन सा नुस्खा आजमाएगा? वास्तव में पिछले पांच वर्षों में केवल एक बार वर्ष की अंतिम तिमाही में केंद्र के शुद्ध कर राजस्व की संग्रह दर पूरे वर्ष के संग्रह का 40 प्रतिशत रही थी। 2014-15 में ऐसा हुआ था। उस वर्ष अंतराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में कमी के बाद सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों पर ऊंचे शुल्क लगाने से लाभ मिला था। इसके अलावा तब नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर करीब 11 प्रतिशत रही थी।   
 
वर्ष 2017-18 की अंतिम तिमाही में पूरे वर्ष के शुद्ध कर राजस्व संग्रह लक्ष्य का करीब 28 प्रतिशत ही संग्रह हो पाया। इसे पिछले दो वर्षों में भी अंतिम तिमाही में संग्रह दर 32 प्रतिशत (2016-17) और 34 प्रतिशत (2015-16) प्रतिशत के साथ बेहतर रही थी। हालांकि यह आंकड़ा कभी भी 40 प्रतिशत के इर्द-गिर्द नहीं रहा, जिसकी आवश्यकता चालू वित्त वर्ष में होगी। उदाहरण के लिए अगर थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में शुद्ध कर संग्रह दर 2018-19 या 2017-18 की तरह ही रहती है। इस हिसाब से जनवरी-मार्च 2020 में शुद्ध कर संग्रह 4.2 से 4.4 लाख करोड़ रुपये के बीच रहेगा। इस तरह, 2019-20 के दौरान पूरे वर्ष के लिए शुद्ध कर संग्रह करीब 13.3 से 13.4 लाख करोड़ रुपये रहेगा। 
 
इसका सीधा मतलब यह होगा कि कर राजस्व में 1.6 लाख करोड़ से 1.8 लाख करोड़ रुपये की और कमी आ जाएगी। कर कमी से बचने का एक ही तरीका है और उसके लिए कर विभाग को 2014-15 का प्रदर्शन दोहराना होगा। हालांकि इस तरह का प्रदर्शन पांच वर्षों में केवल एक बार ही दिखा है। कर राजस्व संग्रह में और कमी आने से 2020-21 के राजस्व संग्रह पर प्रतिकूल असर होगा जब शुद्ध कर संग्रह 16.36 करोड़ रुपये होने की उम्मीद लगाई जा रही है। जैसा कि पहले देखा गया है, अगर चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में शुद्ध कर संग्रह की रफ्तार 2017-18 या 2018-18 की चौथी तिमाही की तरह ही रहती है तो 2019-20 में कुल संग्रह केवल 13.26-13.41 लाख करोड़ रुपये रहेगा। 
 
इसका नतीजा यह होगा कि मौजूदा अनुमानित 9 प्रतिशत के मुकाबले शुद्ध कर राजस्व संग्रह का लक्ष्य 2020-21 के लिए बढ़कर 22 से 23 प्रतिशत हो जाएगा। अगर ऐसा होता है तो आयकर विभाग की चुनौतियों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अगले वित्त वर्ष के लिए विनिवेश लक्ष्य में 223 प्रतिशत बढ़ोतरी की गई है, जिसके मद्देनजर 2020-21 के लिए बजट अनुमान और चुनौतीपूर्ण हो जाएंगे। सरकार के कर राजस्व अनुमानों के साथ आ रही दिक्कतें कोई नई बात नहीं है, लेकिन फरवरी 2019 में जब अंतरिम बजट पेश किया गया था तो स्थिति बदतर हो गई। उस समय संशोधित अनुमान में तय लक्ष्य कर विभाग के वाजिब एवं हासिल हो सकने वाले लक्ष्य से अधिक था। एक वर्ष बाद 2018-19 के लिए वास्तविक शुद्ध कर संग्रह के आए आंकड़े  दर्शाते हैं कि 14.84 लाख करोड़ रुपये संग्रह के लक्ष्य के मुकाबले वे 11 प्रतिशत कम यानी 13.17 लाख करोड़ रुपये रहे थे। 
 
2019-20 के बजट में प्रस्तुत शुद्ध कर संग्रह के संशोधित अनुमान अपेक्षाकृत वास्तविकता के करीब थे। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमान में शुद्ध कर संग्रह के 16.49 लाख करोड़ रुपये का बजट अनुमान 9 प्रतिशत घटा कर 15.04 लाख करोड़ रुपये कर दिया। अगले साल अगर इन आंकड़ों में और संशोधन किए गए तो यह सरकार के लिए शर्मिंदगी की बात हो सकती है। 
Keyword: budget, nirmala sitaraman, economy, tax, GST,,
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