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कॉलेज प्रवेश प्रक्रिया में कागजी कामकाज से परेशान, यहां है समाधान

रोमिता मजूमदार /  February 09, 2020

अगर आप किसी कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं तो आपने प्रवेश प्रक्रिया के कठिन काम को पूरा कर लिया है जिसमें बहुत सी कागजी कार्यवाही और औपचारिकताएं की जाती हैं। खासकर छोटे शहरों में यह और कष्टकर हो जाता है। विभिन्न संस्थानों में प्रवेश के लिए आवेदन करने से लेकर ब्रांच चुनने, फॉर्म भरने और सत्यापन कराने जैसी अनेक प्रक्रियाएं शामिल होती हैं और यह पूरी प्रक्रिया काफी लंबी, जटिल और थका देने वाली होती है। 

हालांकि ये सब अब बदलने वाला है। विभिन्न संस्थान और विश्वविद्यालय अकादमिक औपचारिकताओं में तेजी लाने और छात्रों के लिए आसान प्रक्रिया आपनाने के लिए अपने यहां डिजिटल प्रक्रियाओं को अपनाने पर जोर दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल के आसनसोल में स्थित काजी नजरूल विश्वविद्यालय (केएनयू) का ही उदाहरण लें। यहां इससे संबंधित करीब 20 कॉलेज हैं। हो सकता है कि केएनयू देश के विश्वविद्यालयों की राष्ट्रीय सूची में किसी स्थान पर न हो लेकिन उसने परीक्षाओं से संबंधित सभी कार्य, जैसे परीक्षाओं के लिए छात्रों का पंजीकरण, परीक्षाओं की रूपरेखा साझा करना और परिणामों की घोषणा तथा समीक्षा आदि का डिजिटलीकरण कर लिया है। 

यूनिवर्सिटी 'टीसीएस ऑयन डिजिटल कैंपस सॉल्यूशन' का उपयोग कर रही है जिसके जरिये शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों को बेहतर बनाने और कैंपस गतिविधियों के डिजिटलीकरण का कार्य किया जा रहा है। 1.1 करोड़ विद्यार्थी आईओएन के डिजिटल कैंपस सॉल्यूशन का उपयोग कर रहे हैं और टीसीएस ने कई संस्थानों को कागज रहित प्रबंधन प्रक्रिया अपनाने में मदद की है। केएनयू में अब उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में सहेजा जाता है जिससे परीक्षा परिणामों की घोषणा में देरी को कम किया गया है। विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया एवं कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन है। प्रत्येक छात्र को एक यूजर आईडी और पासवर्ड दिया जाता है जिससे वह सिस्टम में लॉग-इन कर फीस जमा कर सकता है, परीक्षा फॉर्म भर सकता है या पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा कर सकता है।

केएनयू में रजिस्ट्रार शांतनु कुमार घोष बताते हैं, 'शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और सटीकता महत्त्वपूर्ण है। डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से इसमें मानवीय हस्तक्षेप काफी कम हो गया है। इसके चलते प्रवेश प्रक्रिया एवं दूसरी संबंधित गतिविधियों को पूरी तरह से पारदर्शी बना दिया गया है।' विश्वविद्यालय इस तकनीक के सबस्क्रिप्शन के लिए सालाना 20 लाख रुपये खर्च कर रहा है।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की रणनीतिक इकाई टीसीएस आईओएन के वैश्विक प्रमुख वेंगुस्वामी रामास्वामी कहते हैं, 'आज के समय कैंपस दक्षता के साथ साथ जरूरी सहयोगी उपकरण तथा एक प्रभावी शिक्षण सामग्री प्रबंधन प्रणाली आवश्यक हैं। संस्थान सभी हितधारकों के लिए सुचारु प्रक्रिया सुनिश्चित करने वाले एकीकृत समाधान लाने के लिए उत्सुक हैं। वह कहते हैं, 'इस एकीकृत समाधान में ऐसे मॉड्यूल शामिल हैं जिन्हें प्रत्येक हितधारक (प्रशासन, शिक्षण स्टाफ एवं विद्यार्थी) के अनुसार परिभाषित किया गया है  और आवश्यकता के अनुसार स्वचालित कार्यों को लचीलापन प्रदान किया गया है।'

केवल संस्थान ही नहीं वरन सरकारें भी शिक्षा प्रबंधन प्रक्रिया के डिजिटलीकरण की आवश्यकता पर ध्यान दे रही हैं। भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए फ्लैगशिप कार्यक्रम, कौशल भारत कार्यक्रम को अमेरिका स्थित शिक्षा सॉफ्टवेयर कंपनी 'कैंपस मैनेजमेंट कॉर्पोरेशन' (सीएमसी) द्वारा उपलब्ध कराए गए एकीकृत कौशल प्रबंधन प्लेटफॉर्म पर चलाया जाता है। इसकी मदद से अधिकारी लाखों आवेदकों पर नजर रखते हैं और उन्हें संबंधित अवसरों के बारे में अवगत कराते रहते हैं। इसी तरह, महाराष्ट्र में 1,108 आईटीआई का प्रबंधन करने वाला व्यावसायिक एवं शैक्षिक प्रशिक्षण विभाग इस प्रणाली का उपयोग कर रहा है।

सीएमसी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राज मृत्युंजयप्पा कहते हैं, 'सरल और सबसे उपयोगी समाधान यह भी सुनिश्चित करता है कि छात्रों और अभिभावकों के लिए डिजिटल समावेशन की सुविधा के तौर पर प्रवेश फॉर्म हिंदी और मराठी जैसी भाषाओं में भी उपलब्ध कराए गए हैं।'

महाराष्ट्र सरकार ने पिछले वर्ष प्रवेश प्रक्रियाओं के प्रबंधन और निगरानी करने के लिए एकल-खिड़की प्रणाली बनाने हेतु क्लाउड-आधारित विश्वविद्यालय प्रबंधन प्रणाली को लागू करने की घोषणा की। यह परियोजना राज्य के सभी 14 गैर-तकनीकी विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक और अकादमिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करेगी, जिसमें 4,700 संबद्ध कॉलेज और 27 लाख छात्र शामिल होंगे। सीएमसी की मदद से शुरू किया गया यह तंत्र प्रवेश प्रक्रिया संबंधी सभी मानकों को जांचता है जिसमें छात्रों के अंक और आरक्षित सीटें तथा योग्यताएं भी शामिल हैं। इसके बाद यह क्लाउड आधारित सॉफ्टवेयर की मदद से प्रत्येक छात्र का शैक्षणिक प्रदर्शन, ग्रेड और उपस्थिति पर निगरानी रखता है। जैसे ही शैक्षणिक सत्र पूरा होता है यह छात्रों को रोजगार संबंधी संभावनाओं के लिए उद्योगों से जोड़ देता है। यह पाठ्यक्रम तैयार करने, संस्थान की मान्यता की प्रकिया या उसके नवीवीकरण, परीक्षाएं आयोजित कराने और अंकतालिका या डिग्री जारी करने में भी मदद करता है। इसके जरिये मानव संसाधन प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है। सीएमसी के मृत्युंजयप्पा कहते हैं, 'हमने जिन मुख्य जटिलताओं का सामना किया है, उनमें प्रवेश एवं परीक्षा प्रक्रिया के दौरान ग्रेस अंक और आरक्षण आदि का ध्यान रखना मुख्य है। स्वचालित होने के कारण इसका काफी ध्यान रखना पड़ता है।'

कैंपस स्थित ईआरपी सिस्टम से मिलने वाले परिणामों में एक अहम परिणाम यह भी है कि छात्रों से मिलने वाले आंकड़ों की मदद से संस्थान को सीखने के लिए काफी कुछ मिलता है जिससे पूरी प्रक्रिया को और सुगम बनाया जा सके। इसके लिए स्किल इंडिया पहल या हाल ही में कुछ आईआईएम द्वारा छात्रों के लिए शैक्षणिक डेटा मैपिंग कार्यक्रम बनाने की पहल पर दांव लगाया जा सकता है। 

उदाहरण के लिए, आईआईएम अहमदाबाद 'स्टूडेंट लाइफ साइकल मैनेजमेंट सिस्टम' तैयार कर रहा है जो प्रवेश प्रक्रिया से लेकर उनके अंक, परीक्षाएं, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट जैसी जानकारियां इकट्ठा करके उनका विश्लेषण करता है जिससे छात्रों को उपलब्ध कराए जाने वाले उपायों को बेहतर बनाया जा सके।  

हालांकि बढ़े शहरों में ईआरपी सिस्टम या इस तरह की दूसरी प्रणालियां मौजूद हैं लेकिन चेन्नई स्थित शिक्षा-तकनीक स्टार्टअप, यूलेक्ट्ज छोटे शहरों में बसे उन लोगों को लक्षित कर रहा है जो आने वाले समय में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी सादिक सैत बताते हैं कि कंपनी दो मॉडलों का अनुसरण करती है। पहला, बी2बी, अर्थात वार्षिक सदस्यता के साथ संस्थागत ईआरपी रणनीति। दूसरा, बी2सी अर्थात पुस्तकों, ऑनलाइन पाठ्यक्रमों या नौकरी के लिए छात्रों के स्तर पर ऐप का निर्माण करना। 

(साथ में अभिषेक रक्षित)
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