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तकनीक के सहारे बेहतर हो रहा समुद्री परिचालन

अदिति दिवेकर और जयजित दास /  February 09, 2020

जिनेवा स्थित मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी पिछले कुछ समय से मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (जेएनपीटी) पर काम कर रही है। पहले जहां इसे भीड़-भाड़ और धीमी प्रक्रियाओं से जूझना पड़ता था, वहीं अब कंपनी का कहना है कि बंदरगाह अब स्मार्ट तथा कुशल शिपिंग हब में तब्दील हो गया है। यह बदलाव डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के कारण संभव हो पाया है, जिसने बंदरगाह पर सामान लाने-लेजाने की पूरी प्रक्रिया को फास्ट्रैक पर ला दिया।

अब बंदरगाह के दरवाजों पर पहले की तरह भीड़भाड़ नहीं रहती जिसका प्रमुख कारण रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) तकनीक आधारित टर्मिनल गेट ट्रांजेक्शन का प्रक्रिया में शामिल होना है। अधिक समय तक इंतजार करने वाली प्रणाली भी बदल गई है क्योंकि अब यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल कर दी गई है और कागज आधारित लेनदेन धीरे धीरे समाप्त किए जा रहे हैं। इसके अलावा, संदेश पहुंचाने वाली एक प्रणाली लाई गई है, जो सीमा शुल्क, बंदरगाह तथा शिपिंग लाइन को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाती है और उन्हें कुछ मिनट के भीतर सभी जरूरी जानकारियां पहुंचा दी जाती हैं, जिसमें पहले करीब दो दिन का समय लगता था। 

भारत का सबसे अधिक माल आवाजाही वाला बंदरगाह जेएनपीटी देश के बंदरगाहों की प्रणाली में किए जा रहे बदलावों का एक उदाहरण है और भारत बढ़ते सामान की शीघ्र आवाजाही तथा चुनौतियों के समाधान के तौर पर आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। अधिकांश सामानों का आयात-निर्यात बंदरगाहों से ही होता है और इसलिए ये देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम हैं। 

जेएनपीटी के तकनीक आधारित नई पहलों में ई-फॉर्म 13/फॉर्म 11 का डिजिटलीकरण शामिल है, जिसके तहत टर्मिनल के अंदर किसी सामान को आने की अनुमति दी जाती है। ऑनलाइन उपलब्ध फॉर्म तथा इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्रमाणन के जरिये इस प्रक्रिया में एक मिनट से लेकर अधिकतम 10 मिनट का समय लगता है। बंदरगाह अधिकारियों ने जेएनपीटी मोबाइल ऐप, आरएफआईडी-आधारित टर्मिनल गेट ट्रॉजेक्शन, आरएफआईडी आधारित कंटेनर ट्रैकिंग (भारत में पहली बार), ऑर्डर की ई-डिलिवरी, बंदरगाहों में संचार व्यवस्था का उन्नयन तथा टर्मिनल ऑपरेटिंग सिस्टम आदि की शुरुआत की है। इन उपायों की मदद से बंदरगाह पर काम कर रहे अधिकारियों को वैश्विक मानकों का पालन करने और लागत घटाने में मदद मिली है। 

जेएनपीटी के अध्यक्ष संजय सेठी कहते हैं, 'जेएनपीटी ने नवीन तकनीकों को शामिल किया है, जिससे उच्च उत्पादकता और परिचालन बेहतर करने में मदद मिली है। इससे सुरक्षा मानक भी उन्नत हुए हैं। हमने बंदरगाह पर तकनीकी उन्नयन में करीब 175 करोड़ रुपये की राशि खर्च की है।'

आजकल बंदरगाह का टर्नअराउंड टाइम काफी कम हो गया है। वहीं, आयात के लिए रेल से लाए गए सामान के लिए 'ड्वेल टाइम' साल 2018 के 116.09 घंटे से घटकर साल 2019 में 66.16 घंटे हो गया। आयात के लिए सड़क द्वारा लाए गए सामान के लिए 'ड्वेल टाइम' साल 2018 के 41.32 घंटे से घटकर साल 2019 में 28.65 घंटे हो गया। ड्वेल टाइम, अर्थात निर्यात के लिए टर्मिनल के गेट पर सामान पहुंचने से जहाज में रखे जाने में लगा समय तथा आयात के मामले में जहाज से उतारकर ट्रक या ट्रेन में लोड करने में लगा समय। 

पिछले साल करोबारियों, चालकों समेत सभी हितधारकों के लिए लॉन्च किया गया जेएनपीटी मोबाइल ऐप पूरी यात्रा के दौरान समान संबंधी सभी जानकारियां उपलब्ध कराता है। इसमें जहाज के गंतव्य तक पहुंचने का अनुमान लगाने के लिए एक नक्शा भी है और बंदरगाह के अंदर तथा बाहर सामान को ट्रैक करने में मदद करता है। आरएफआईडी-आधारित टर्मिनल गेट ट्रांजेक्शन फास्टैग की तरह है जो सामान के बारे में सटीक एवं पूरी जानकारी उपलब्ध कराता है। इससे भीड़भाड़ को कम करने में काफी मदद मिली है। जेएनपीटी ने पोर्ट कम्युनिटी सिस्टम (पीसीएस) नामक एक एकल संदेश सेवा विंडो भी पेश की है, जिसके माध्यम से सभी 27 हितधारकों के साथ सूचना साझा की जाती है, जिसमें सीमा शुल्क अधिकारी, सीएफएस और बंदरगाह अधिकारी आदि शामिल हैं।

बंदरगाह का टर्मिनल ऑपरेटिंग सिस्टम 'नाविस' समान संबंधी सभी जानकारियां जुटा लेता है जिससे बिना किसी देरी के बिलिंग हो जाती है और इनवॉयस तैयार हो जाती है। बंदरगाह ने अपने जीपीएस-आधारित ट्रकिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से परिवहन समाधान प्रदान करने के लिए बेंगलुरु स्थित ब्लैकबक (जिंका लॉजिस्टिक्स सॉल्युशंस) के साथ भी साझेदारी की है। 

इन सभी प्रयासों ने बंदरगाह की दक्षता में काफी सुधार किया है। वित्त वर्ष 2018-19 में जेएनपीटी ने 51.3 लाख टीईयू (20 टन के समतुल्य इकाइयां) को गंतव्य पर पहुंचाया था जो एक साल पहले से 6.20 प्रतिशत अधिक था। यह साल 1989 में बंदरगाह की शुरुआत से अब तक सर्वाधिक आंकड़ा था। पीपीटी पर एक सूत्र ने बताया, 'अगले दो वर्षों में हमारी क्षमता 50,000 टीईयू हो जाएगी। इसलिए हम अभी से नवीन तकनीकों को ला रहे हैं जिससे आगामी समय में अधिक समस्याओं का सामना न करना पड़े।'

नवंबर 2019 से, पीपीटी डीएमआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज के साथ मिलकर काम कर रहा है। डीएमआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज (डीएलडीएस) नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट ऐंड इंप्लीमेंटेशन ट्रस्ट और जापानी आईटी प्रमुख एनईसी कॉर्पोरेशन का संयुक्त उपक्रम है।

डीएलडीएस विश्व स्तर पर कंटेनर टर्मिनल और माल प्रबंधन के लिए आरएफआईडी तकनीक का उपयोग करती है। कंपनी अब उसी तकनीक को पीपीटी में भी शुरू कर रही है। डीएलडीएस के मुख्य परिचालन अधिकारी सुरजीत सरकार ने कहा, 'आरएफआईडी प्रौद्योगिकी का उपयोग कंटेनरों का पता लगाने के लिए किया जाता है। आरएफआईडी टैग कंटेनरों से जुड़ा होता है और डेटा को फिर सर्वर पर भेज दिया जाता है। एक ऐप के जरिये बंदरगाह के कर्मियों तथा अन्य लोगों को संबंधित जानकारियां मिलती हैं।' 

पीपीटी पर आरएफआईडी तकनीक का उपयोग टर्मिनल ऑपरेटिंग सिस्टम और परिचालन कार्य प्रणाली में किया जाता है। सरकार बताते हैं कि इसे अपनाने के दो महीनों के भीतर तकनीक ने सभी हितधारकों को लाभ पहुंचाया है। अब उपयोगकर्ता अपने सामान के पहुंचने के बारे में पहले से जानते हैं और उससे जुड़े डेटा को ऐप पर देख सकते हैं। हालांकि सामान पर नजर रखने के लिए आरएफआईडी तकनीक का उपयोग समुद्री कानूनों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। सरकार कहते हैं, 'किसी सामान के आयात के मामले में जब सामान भारतीय समुद्री सीमा के अंदर आ जाता है, हम तभी उससे संबंधित जानकारियां साझा कर सकती है। इसी तरह, सामान निर्यात करने के मामले में किसी दूसरे बंदरगाह तक पहुंचने से पहले तक ही सामान की ट्रैकिंग सुविधा उपलब्ध कराते हैं।' उन्होंने कहा कि अगले एक साल में अधिक संख्या में कार्गो के लिए तकनीक का इस्तेमाल बड़े स्तर पर करने की योजना है। 

वाइजैग पोर्ट ट्रस्ट (वीपीटी) भी आरएफआईडी तकनीक का उपयोग कर रही है जिससे बंदरगाह पर आने तथा जाने वाले ट्रकों को आरएफआईडी कार्ड की मदद से तत्काल क्लीयरेंस मिल जाए। वीपीटी के उपाधध्यक्ष पी एल हरनाध ने कहा कि बंदरगाह मोबाइल क्रेन और बंडारण क्षेत्र का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर टर्नअराउंड समय में सुधार कर रहा है। दूसरे प्रमुख बंदरगाहों की तरह वीपीटी ने अपने ईआरपी सिस्टम को पोर्ट ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ जोड़ दिया है जो अंदर आने, बाहर जाने, कस्टम क्लीयरेंस समेत सभी तरह के क्लीयरेंस की सुविधा देता है। (साथ में, बी दशरथ रेड्डी)

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