बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी दरें साल में एक ही बार बदलें
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जीएसटी दरें साल में एक ही बार बदलें

नम्रता आचार्य / कोलकाता February 09, 2020

केंद्र सरकार वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) की दरों में साल में सिर्फ एक बार बदलाव करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। मौजूदा दौर में दरों में समय समय पर बदलाव करने का प्रावधान है। कोलकाता में संवाददाताओं से बात करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'समय समय पर बदलाव करने के प्रावधान से अनिश्तितता आती है और इससे कारोबार पर बुरा असर पड़ता है क्योंकि यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि पूरे साल के लिए कितनी राशि अलग रखी जाए। सरकार भी यह नहीं जानती है कि कितना राजस्व आएगा। ऐसे में हम सचमुच जीएसटी परिषद के समक्ष यह प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं, जिसमें दरों को तार्किक बनाने का काम साल में सिर्फ एक बार किया जाए। इसके अलावा राज्य भी जीएसटी दरों में कटौती को लेकर अपनी आवाज उठा सकते हैं।'

उन्होंने कहा, 'हम उद्योग से बार बार कह रहे हैं... जब भी वह हमसे दरें कम करने को लेकर संपर्क करते हैं... वे अपनी चिंता राज्यों के समक्ष भी रखें और राज्य के  मंत्री भी जीएसटी परिषद में इस तरह की चिंता सामने रखें। यह संघीय ढांचा है, जहां केंद्र और राज्य के बीच बेहतर संबंध है।'  

करदाताओं के कर भुगतान के विकल्प पर सीतारमण ने संकेत दिए कि जो लोग दीर्घावधि निवेश करेंगे, वह पहले के कर के दौर को ध्यान में रखेंगे, निवेशकों के पास कुछ पुराने विकल्प मौजूद हैं। सीतारमण ने कहा, 'जब भी कोई सरकार नीतियां तैयार करती है, तमाम पुरानी प्रक्रियाएं होती हैं, जिनका समाधान करना होात है। मुझे नहीं लगता कि हम इस मामले में अलग हैं और उसकी उपेक्षा कर रहे हैं।' 

साथ ही दो कर व्यवस्था में करदाताओं को निवेश के व्यापक विकल्प होंगे, जिसमें शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट के डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश शामिल है, जहां मुनाफा बचत के परंपरागत निवेश विकल्पों की तुलना में बराबर या उससे ज्यादा है।सीतारमण ने कहा, 'जिन लोगों को लगता है कि वे छूट के माध्यम से ही बचत कर सकते हैं, वे पुरानी व्यवस्था जारी रख सकते हैं। जिन्हें लगता है कि वे अपने धन के बारे में उचित फैसला लेने में सक्षम हैं, उनके हाथ में नर्ई प्रणाली से ज्यादा पैसे आएंगे और उन्हें अपनी आमदनी अपनी इच्छा के मुताबिक निवेश में लगाने की आजादी होगी। कोई जरूरी नहीं है कि बैंक में जमा या डाकघर जमा या सावधि जमा से ही बचत हो।  अब बचत शेयर बाजार में जा सकती है या बॉन्ड बाजार में उसे डेट में निवेश किया जा सकता है, जिसके मुनाफा पहले के निवेशों के बराबर या उसकी तुलना में ज्यादा है।' 

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