बिजनेस स्टैंडर्ड - कारोबार के आकाश पर चमकते 'सितारे' सात
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कारोबार के आकाश पर चमकते 'सितारे' सात

बीएस संवाददाता / मुंबई 02 09, 2020

बिज़नेस स्टैंडर्ड वार्षिक पुरस्कार 2019

बिजनेस स्टैंडर्ड कारोबार के आकाश पर चमकते टाइटन कंपनी का बाजार मूल्यांकन करीब 1.13 लाख करोड़ रुपये है और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) के बाद वह टाटा समूह की दूसरी सबसे कीमती कंपनी बन गई। घड़‍ियों की रिटेल शृंखला से कारोबार शुरू करने वाली टाइटन कंपनी आज भारत का सबसे बड़ा ज्वैलरी ब्रांड है और इसकी बिक्री तथा मुनाफे में लगातार इजाफा हो रहा है। पिछले तीन साल में इसकी शुद्ध बिक्री 20.6 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से और शुद्ध मुनाफा 27.7 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा है।

बिजनेस स्टैंडर्ड कारोबार के आकाश पर चमकते टाइटन समूह के इस कायाकल्प का सेहरा कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक भास्कर भट्ट के सिर ही बांधा जाता है, जो करीब 17 साल तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद अक्टूबर 2019 में सेवानिवृत्त हुए हैं। 2002 में जब उन्होंने कंपनी की कमान संभाली थी तब टाइटन काफी ज्यादा कर्ज, सुस्त बिक्री और कमजोर मुनाफे से जूझ रही थी। कारोबार में नई जान फूंकने की उनकी रणनीति कारगर रही और परिचालन से नकदी की आमद तेज हो गई। शेयर बाजार में भी कंपनी का मूल्यांकन बेहद तेजी से बढ़ा।

अर्थव्यवस्था में नरमी के बावजूद तीन साल से भी कम समय में लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) की ऑर्डर बुक 3 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। भारत की सबसे बड़ी निर्माण कंपनी एलऐंडटी ने सबको पछाड़ते हुए वित्त वर्ष 2019 में 18 फीसदी तेजी के साथ सभी अनुमानों से बेहतर आय अर्जित की। निजी निवेश धीमा रहने के बाद भी उस वित्त वर्ष में कंपनी का शुद्ध मुनाफा करीब 21 फीसदी बढ़ा। इतना ही नहीं, सॉफ्टवेयर क्षेत्र में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए कंपनी ने उसी साल आईटी कंपनी माइंडट्री का अधिग्रहण भी कर डाला।

बिज़नेस स्टैंडर्ड कॉरपोरेट उत्कृष्टता अवार्ड 2019 के लिए प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल के सदस्यों की बैठक में भास्कर भट्ट और एलऐंडटी की असाधारण उपलब्धियों को नजरअंदाज कैसे किया जा सकता था। मुंबई में 6 फरवरी को हुई निर्णायक मंडल की बैठक में दो अग्रणी कारोबारी समूहों के प्रमुख, दो प्राइवेट इक्विटी फंड के प्रमुख, दो वैश्विक प्रतिष्ठित प्रबंधन सलाहकार संगठन, सामाजिक प्रभाव डालने वाले एक अग्रणी निवेशक और एक प्रतिष्ठित कानूनी दिग्गज शामिल थे।

आठ सदस्यीय निर्णयक मंडल की अध्यक्षता आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने की। जेएसडब्ल्यू समूह के चेयरमैन सज्जन जिंदल, केकेआर इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी संजय नैयर, ईवाई इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी, ओमिदयार नेटवर्क इंडिया की प्रबंध निदेशक रूपा कुडवा, मैकिंजी ऐंड कंपनी के सीनियर पार्टनर नोशिर काका, सिरिल अमरचंद मंगलदास के मैनेजिंग पार्टनर सिरिल श्रॉफ और बेन कैपिटल प्राइवेट इक्विटी इंडिया के चेयरमैन अमित चंद्रा बतौर सदस्य शामिल थे।    

निर्णायक मंडल के अध्यक्ष बिड़ला ने चर्चा शुरू करते हुए सदस्यों से पूछा कि सूची में शामिल उम्मीदवारों के नाम पर किसी को एतराज है तो बताएं। दो सदस्यों ने स्वयं से संबंधित श्रेणियों में विचार-विमर्श से खुद को दूर रखा। मार्च 2019 में समाप्त वित्त वर्ष के बिज़नेस स्टैंडर्ड रिसर्च ब्यूरो द्वारा संकलित वित्तीय आंकड़ों के आधार पर चुने गए नामों की सूची निर्णायकों के पास पहले ही पहुंच गई थी। इन्हीं में से 'सीईओ ऑफ द इयर' चुना जाना था। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बहुराष्ट्रीय फर्मों और लघु एवं मझोले उपक्रमों की श्रेणियों में विजेताओं के नाम भी इसी सूची से चुनने थे।

निर्णायक मंडल की चर्चा में कारोबारी प्रशासन, समाज के प्रति योगदान, स्तर, निरंतरता, नेतृत्व और नवाचार पर ज्यादा जोर दिया गया। बिड़ला ने कहा कि विजेताओं के चयन के दौरान वित्तीय आंकड़ों के अलावा कंपनियों द्वारा कारोबार संचालन के उच्च मानदंड का पालन किए जाने और समाज को कुछ लौटाने की बात ध्यान में रखनी चाहिए।

2017 में बीएस अवॉर्ड जीतने वाले जिंदल की राय थी कि विजेता का चयन करते समय बाजार पूंजीकरण में वृद्धि ही नहीं बल्कि कंपनी के समग्र विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। टोक्यो से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये शामिल हुए काका ने वैश्विक दृष्टिकोण से प्रत्येक कंपनी के बारे में अपनी राय दी।

अंतत: टाइटन कंपनी को टाटा समूह की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनाने में योगदान के लिए भट्ट को सीईओ ऑफ द इयर के सम्मान से नवाजा गया। निर्णायक मंडल की पंसद पर श्रॉफ ने कहा, 'भट्ट ने मोर्चे पर रहकर कंपनी का नेतृत्व किया और आज टाइटन जहां खड़ी है, उसमें उनका अहम योगदान है।' 

सभी सदस्यों ने इस पर सहमति जताई क्योंकि पहली नजर में वित्तीय अनुपात महत्त्वपूर्ण था, लेकिन नवाचार पर ध्यान देने और कमजोर मांग के दौरान चुनौतीपूर्ण समय में संस्थान को खड़ा करने की उपलब्धि को भी समान महत्त्व दिया गया। सूचीबद्ध कंपनियों के आंकड़ों के अलावा निर्णायक मंडल के सदस्यों ने कंपनी, उद्योग और कारोबारी माहौल को प्रभावित करने वाले पहलुओं पर भी चर्चा की। बिड़ला ने कहा, 'निर्णायक मंडल के सदस्यों ने साल के विजेता के चयन में विचार-विमर्श पर अधिक समय खर्च किया। फैसला मुश्किल था क्योंकि सूची में कई अच्छी कंपनियां थीं। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों के आधार पर सभी छांटी गई कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन शानदार दिख रहा था।' 

निर्णायक मंडल ने एलऐंडटी को कंपनी ऑफ द इयर चुना और इंद्रप्रस्थ गैस ने स्टार पीएसयू ऑफ द इयर का खिताब जीता। नेस्ले को स्टार एमएनसी ऑफ द इयर और विनती ऑर्गेनिक्स को स्टार एसएमई ऑफ द इयर घोषित किया गया। किराना सामान की आपूर्ति करने वाली कंपनी बिगबास्केट को स्टार्टअप ऑफ द इयर चुना गया।

इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए कई नामों पर विचार-विमर्श किया गया लेकिन निर्णायक मंडल ने चुने गए नामों के कारोबारी मॉडल पर भरोसा जताया। नैयर ने कहा, 'ऐसे साल में हम ऐसी कंपनी चाहते थे जिसका अर्थव्यवस्था में व्यापक योगदान रहा हो और जिसने रोजगार सृजन के साथ ही निर्यात आय में भी बेहतर प्रदर्शन किया हो। इन मानदंडों पर एलऐंडटी से बेहतर और कोई कंपनी नहीं हो सकती।'

भारत के कारोबारी जगत में गहरी छाप छोडऩे वाली कई हस्तियों पर भी निर्णायक मंडल में विचार-विमर्श किया गया लेकिन सभी ने सॉफ्टवेयर दिग्गज विप्रो के संस्थापक चेयरमैन अजीम प्रेमजी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड के लिए चुनने  पर मुहर लगा दी। बिड़ला ने कहा, 'विप्रो की सफलता की जबरदस्त कहानी रही है, लेकिन प्रेमजी ने अपने परोपकार के जरिये जिस तरह का प्रभाव डाला है, उसे देखते हुए यह सम्मान उन्हीं के हिस्से आया। प्रेमजी कंपनी संचालन के ऊंचे पैमाने गढऩे और उन पर चलने के लिए जाने जाते हैं। यह बात भी उनके पक्ष में गई। इन सभी वजहों से प्रेमजी लाइफटाइम अचीवमेंट श्रेणी में अन्य प्रतिभागियों पर भारी पड़े।'

निर्णायक मंडल की नजर में प्रेमजी कारोबार की दुनिया की बड़ी शख्सियत तो हैं ही, बड़े लोकोपकारी भी हैं। उनके नेतृत्व में विप्रो निरंतरता के साथ आगे बढ़ी है। फरवरी 2020 तक विप्रो का बाजार मूल्यांकन करीब 1.39 लाख करोड़ रुपये था और यह भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में एक है। प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने का दृढ़ निश्चय प्रेमजी की निजी जिंदगी में भी झलकता है। जब उनके पिता का निधन हुआ तो परिवार का खाद्य तेल कारोबार संभालने के लिए 1966 में उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़कर स्टैनफर्ड से वापस आना पड़ा था। 30 साल बाद वह स्टैनफर्ड लौटे और अधूरी पढ़ाई पूरी कर डिग्री हासिल की।

परोपकारी के तौर पर प्रेमजी देश में बाकी सभी उद्योगपतियों से ऊपर रहे हैं। भारत में शिक्षा के लिए धन मुहैया करने के मकसद से उन्होंने विप्रो के 12.5 करोड़ डॉलर के शेयर 2001 में एक न्यास को दान दे दिए। यह दान भारत में आज की तारीख तक सबसे बड़ा दान है। इसी तरह नौ साल बाद एक बार फिर प्रेमजी ने विप्रो के 2 अरब डॉलर के शेयर उसी न्यास को दे दिए। फरवरी 2013 में उन्होंने कंपनी में अपनी 12 फीसदी हिस्सेदारी (उस समय कीमत करीब 2.2 अरब डॉलर) उस न्यास के नाम कर दी। फाउंडेशन के पास इस समय विप्रो के 18 फीसदी शेयर हैं। 2019 में 7.6 अरब डॉलर का दान देकर प्रेमजी उस वर्ष लोक कल्याण के लिए सबसे अधिक दान देने वाले बन गए। प्रेमजी का कुल दान 2019 तक बढ़कर 21 अरब डॉलर हो गया।

'स्टार्टअप ऑफ द इयर अवार्ड' के मसले पर निर्णायक मंडल बिग बास्केट और एक अन्य प्रतिभागी के बीच बंट गया। दोनों ही स्टार्टअप अपने-अपने क्षेत्र में अव्वल रहे हैं। निर्णायक मंडल का झुकाव उस स्टार्टअप इकाई के पक्ष में था, जिसने तकनीक का नए तरीके से इस्तेमाल किया और उपभोक्ताओं का जीवन अपेक्षाकृत आसान बना दिया। कुडवा ने कहा, 'बिग बास्केट को स्टार्टअप ऑफ द इयर चुनने का समर्थन अधिक सदस्यों ने किया। इस बात की दो वजह थी- पहली बात यह कि यह पिछले आठ वर्षों में वह भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन किराना सामान बेचने वाली इकाई है और दूसरी बात यह कि कंपनी की तरफ से की गई नई पहल, जैसे दो घंटे में डिलिवरी और निजी ब्रांड के उत्पाद आदि, निर्णायक मंडल को पसद आईं।'

'स्टार पीएसयू' के चयन के समय निर्णायक मंडल ने महसूस किया कि ऐसी कंपनी के वित्तीय मानदंड दुरुस्त होने चाहिए और निजी क्षेत्र से प्रतिस्पर्द्धा में भी सक्षम होना चाहिए। गहन चर्चा के बाद आखिकार निर्णायक मंडल ने इंद्रप्रस्थ गैस का चयन किया। कंपनी की बिक्री 27 फीसदी बढ़ी थी और पिछले वर्ष मुनाफा भी 17 फीसदी तक बढ़ा था। निर्णायक मंडल की बैठक के बाद मेमानी ने कहा, 'इंद्रप्रस्थ शहरों में गैस आपूर्ति करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है। उपभोक्ताओं से जुडऩे के मामले में इसका प्रदर्शन शानदार रहा है। इसे चार नए लाइसेंस मिले हैं और कुछ कंपनियों को भी खरीदा है, जिनसे इन्हें दूसरे शहरों में भी कारोबार शुरू करने में मदद मिली है।' 

'स्टार एमएनसी' पुरस्कार के लिए निर्णायक मंडल ने कुछ सूचीबद्ध कंपनियों पर चर्चा की, लेकिन अंतत: उनका निर्णय नेस्ले के पक्ष में रहा। पांच वर्ष पहले मैगी नूडल्स पर उठी चिंता से उबरते हुए कंपनी ने अपनी बाजार हिस्सेदारी वापस हासिल कर ली है। पिछले तीन वर्षों के दौरान कंपनी का राजस्व सालाना 11 फीसदी की दर से बढ़ा है और शुद्ध मुनाफे में औसतन 42 फीसदी की सालाना दर से वृद्धि हुई है। एसएमई खंड में निर्णायक मंडल ने सुस्त अर्थव्यवस्था से पैदा हुई परेशानियों पर चर्चा की। इन चर्चाओं के बाद निर्णायक मंडल ने मुंबई स्थित एक रसायन कंपनी विनती ऑर्गेनिक्स का चयन किया।

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