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जीएसटी कर ढांचे में फेरबदल में लगेगा वक्त : सीबीआईसी

दिलाशा सेठ /  February 07, 2020

तमाम बड़ी कंपनियां जीएसटी के पहले के  उत्पाद शुल्क और सेवा कर के मामले में सबका विश्वास विरासत विवाद समाधान योजना से दूर रहीं। बजट तैयार किए जाने के वक्त केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के कार्यकारी चेयरमैन रहे जॉन जोसेफ का कहना है कि कंपनियों को भरोसा है कि वे सरकार से न्यायालय में जीत जाएंगी। दिलाशा सेठ के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि जीएसटी दरें फिलहाल राजस्व के हिसाब से नकारात्मक थीं, जिस पर मंत्रिसमूह द्वारा विचार किया जा रहा है, लेकिन इसे लागू करने में वक्त लगेगा। संपादित अंश...

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कराधान की समस्या
 
सरकार ने सकल आयात मूल्य पर बुनियादी सीमा शुल्क (बीसीडी) में बढ़ोतरी न करके 5 प्रतिशत स्वास्थ्य उपकर क्यों लगाया है? क्या इससे ईलाज का खर्च बढ़ेगा? 
 
मुझे ऐसा नहीं लगता। महज 5 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। सभी मेडिकल उपकरण भारत में विनिर्मित होंगे, जबकि आयातित उपकरण चीन के होते हैं। उपकर से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और इसके अलावा सरकार को लोगों को आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा देने में मदद मिलेगी। मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बहुत ज्यादा धन की जरूरत है और बीसीडी पर महज 0.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि हमें ज्यादा राजस्व की जरूरत है। ऐसे मे हमने सकल आयात पर इसे लगाने का फैसला किया है। 
 
सीमा शुल्क में बढ़ोतरी से सरकार को कितना अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है? 
 
हमने राजस्व बढ़ाने के मकसद से सीमा शुल्क में बढ़ोतरी नहीं की है। इसे मेक इन इंडिया को समर्थन देने के लिए लगाया गया है। इसलिए हमने यह अनुमान नहीं लगाया है कि इससे कितना राजस्व मिलेगा।
 
हाल ही में उद्योग के साथ बातचीत में राजस्व सचिव एबी पांडेय ने जीएसटी ढांचे में 3 दरोंं की बात की थी। क्या 5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत ढांचे में से किसी को खत्म करने या 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत ढांचे को मिलाने की योजना है? 
 
यह जीएसटी परिषद पर निर्भर होगा कि वह क्या करना चाहती है। अभी दरें राजस्व के हिसाब से नकारात्मक हैं, निरपेक्ष नहीं। दर के ढांचे को लेकर कोई योजना नहीं बनाई गई है। मंत्रियों का एक समूह इस मसले पर विचार कर रहा है। वह रिपोर्ट देंगे और उस पर चर्चा होगी। ढांचे में फेरबदल में वक्त लगेगा और ऐसा कुछ तत्काल नहीं होने जा रहा है। 
 
संशोधित अनुमान में लक्ष्य कम किए जाने के बावजूद अप्रत्यक्ष कर संग्रह अभी भी ज्यादा नजर आ रहा है? 
 
मुझे नहीं लगता कि अनुमान बहुत ज्यादा है। हो सकता है कि संग्रह 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये कम हो, लेकिन फरवरी में 1.1 लाख करोड़ रुपये जीएसटी संग्रह की उम्मीद है और मार्च में इससे भी ज्यादा रहेगा। सबका विश्वास से हुआ संग्रह भी इसमें जुड़ेगा और उत्पाद शुल्क संग्रह भी भुगतान के रूप में फरवरी से आएगा। 
 
हालांकि 1,90,000 करदाताओं ने सबका विश्वास विरासत विवाद समाधान योजना में आवेदन किया है, लेकिन बड़ी कंपनियां इससे दूर हैं। ऐसा क्यों? 
 
बड़ी कंपनियों का मानना है कि वे बाहर लड़ाई लड़ सकती हैं। सरकार के मुकदमे जीतने की दर महज 10 प्रतिशत है, ऐसे में कंपनियां निश्चित रूप से सोचती हैं कि 30 प्रतिशत भुगतान क्योंं किया जाए। जिन्होंने आवेदन नहीं किया है, वे सोचती हैं कि जीतने के लिए यह बढिय़ा मामला है। लेकिन योजना विभाग के लिए सफल रही है। 
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