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फिर आएगा जमा-बीमा विधेयक

अरूप रायचौधरी / मुंबई February 07, 2020

सरकार वित्तीय समाधान एवं जमा बीमा (एफआरडीआई) विधेयक फिर से लाने की तैयारी कर रही है, लेकिन समयसीमा अब तक तय नहीं हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज यह जानकारी दी। एक उपबंध को लेकर आलोचना होने पर अगस्त 2018 में एफआरडीआई वापस ले लिया गया था जो बैंक विफलता के मामले में जमाकर्ताओं को जमानत देने के लिए बाध्य करता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि उस समय जमा बीमा का दायरा केवल एक लाख रुपये था, इसलिए इस विधेयक बिल को लेकर काफी हो-हल्ला हुआ है। नए बजट में सरकार ने जमा बीमा का दायरा बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया है। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों की मदद के लिए दिवाला कानून में भी बदलाव किया गया है।
 
वित्त मंत्री ने कहा, 'एक बार यह (एफआरडीआई विधेयक) पेश किया गया था और कुछ कारणों से इसे वापस ले लिया गया था। हमने इस पर फिर से काम करना शुरू कर दिया है। मुझे नहीं पता कि मैं इसे कब पेश करूंगी।' सीतारमण ने कहा कि मुंबई की अपनी पिछली यात्रा में पीएमसी बैंक के जमाकर्ताओं के साथ मुलाकात बहुत कष्टïकारी थी। हालांकि वह जवाब नहीं देना चाहती थी कि क्या पांच लाख रुपये का जमा बीमा का लाभ पीएमसी बैंक के जमाकर्ताओं को भी मिलेगा। साथ ही यह प्रस्ताव अब भी संसद द्वारा पारित नहीं किया गया है। सीतारमण मुंबई में वित्त मंत्रालय के उन सभी सचिवों के साथ थीं। जिन्होंने बजट को लोगों तक पहुंचाने में सरकार की पहल के रूप में किम किया है। यह टीम बजट पर प्रश्नों का उत्तर देने के लिए शनिवार को चेन्नई और रविवार को कोलकाता सहित विभिन्न शहरों की यात्रा करेगी। मुंबई में वित्त मंत्री और उनकी बजट टीम ने सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्वानों, शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों, फंड प्रबंधकों और पत्रकारों सहित विभन्न वर्ग के लोगों के साथ मुलाकात की।
 
मीडिया के साथ बातचीत के दौरान सीतारमण ने कहा कि वह इस बात का आकलन करेंगी कि उनकी नई व्यक्तिगत कर योजना को लोग किस प्रकार स्वीकार करेंगे और इस आकनल के आधार पर वह देखेंगी कि क्या यह छूट पूरी तरह से बंद कर दी जानी चाहिए। बजट में वित्त मंत्री ने व्यक्तिगत आयकर के दो विकल्पों वाली संरचना बनाई। इसमें से विकल्प छूट के बिना लेकिन कम कर दर वाला है और छूट के साथ दूसरा मौजूदा कर दरों वाला विकल्प है। सीतारमण ने कहा कि आखिरकार हम भारत के लिए एक आयकर ढांचा तैयार करना चाहते हैं जो सरल होगा। दरें न्यूनतम हो जाएंगी जिससे लोगों को इनका अनुपालन करने में मदद मिलेगी। मैं किसी को विवश नहीं कर रही हूं, बल्कि मैं एक विकल्प दे रही हूं। हम इस वर्ष देखेंगे कि कितने लोग इस ओर रुख करते हैं। वर्ष दौरान हम इसे समझेंगे और इसके आधार पर हम आगे बढ़ सकते हैं। कर संरचना का बचाव करते हुए सीतारमण ने पिछले साल संवाद सत्र में कहा था कि जब सरकार ने भारतीय कंपनियों को एक समान कर संरचना की पेशकश की, तो उनमें से 90 प्रतिशत ने कम कर दर को स्वीकार किया था। 
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