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एसएमपी कीमत बढ़ोतरी पर निजी और सहकारी डेयरी में टकराव

दिलीप कुमार झा / मुंबई February 07, 2020

स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण निजी और सहकारी डेयरियों के बीच टकराव पैदा हो गया है। वैवाहिक सीजन की मांग में अचानक बढ़ोतरी और पिछले साल प्रतिकूल मौसम के चलते एसएमपी के उत्पादन में गिरावट के कारण इसकी किल्लत पैदा हुई है। निजी डेयरियों ने आइसक्रीम विनिर्माताओं और कन्फेक्शनरों (बिस्कुट एवं चॉकलेट विनिर्माता) समेत थोक ग्राहकों की इस मांग का समर्थन किया है कि शून्य शुल्क पर 50,000 टन एसएमपी के आयात को मंजूरी दी जाए। लेकिन सहकारी डेयरियों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि इसका किसानों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। 
 
दरअसल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने सरकार के समक्ष एसएमपी के आयात को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा है। इस समय एसएमपी के दाम 310 से 320 रुपये प्रति किलोग्राम हैं। इनमें पिछले एक महीने के दौरान 15 फीसदी बढ़ोतरी हुई है और ये एक साल पहले की तुलना में दोगुने हो गए हैं। कर्नाटक सहकारी दुग्ध उत्पाद संघ (केएमएफ) के प्रबंध निदेशक बी सी सतीश ने कहा, 'एसएमपी के दाम अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर के आसपास बने हुए हैं, इसलिए इसकी कीमतों में आगे और बढ़ोतरी की गुंजाइश नहीं है। मौजूदा स्तरों से दाम और बढऩे पर ग्राहक तरल दूध और अन्य विकल्पों का उपयोग शुरू करेंगे। इस तरह हाल की कीमत बढ़ोतरी अस्थायी है। एसएमपी की कीमतों में गिरावट शुरू होगी और ये अगले एक महीने में स्थिर हो जाएंगी।' केएमएफ भारत का दूसरा सबसे बड़ा डेयरी संघ है, जो रोजाना 86 लाख लीटर तरल दूध का प्रबंधन करता है और नंदिनी ब्रांड के डेयरी उत्पादों की बिक्री करता है। 
 
सूत्रों ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले महीने की शुरुआत में उद्योग से जुड़े लोगों की बैठक बुलाई थी ताकि कीमतों में बढ़ोतरी की वजहों का पता लगाया जा सके और नीतिगत दखल की रणनीति बनाई जा सके। देश की सबसे बड़ी सहकारी डेयरी गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ  (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आर एस सोढी ने कहा, 'हम दुग्ध उत्पादकों की आमदनी घटाने के सीआईआई के किसान विरोधी कदम का विरोध कर रहे हैं, जिसने शून्य शुल्क पर सस्ते एसएमपी आयात की सिफारिश की है। निजी डेयरियों और आइसक्रीम विनिर्माताओं द्वारा देश में दूध की किल्लत की जो चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं, वे पूरी तरह खुद के लाभ से प्रेरित हैं। वे सस्ता कच्चा माल हासिल करना चाहते हैं। यह किसानों और उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।' जीसीएमएमएफ अमूल ब्रांड के दूध और अन्य उत्पादों का उत्पादन करती है। 
 
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि डेयरी कंपनियों द्वारा दिसंबर में दूध के दाम दो रुपये प्रति लीटर बढ़ए जाने से एसएमपी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में चारा अत्यधिक महंगा हो गया है, जिसकी वजह पिछले साल महाराष्ट्र और कर्नाटक भारी बाढ़ जैसी प्रतिकूल मौसम है। इसके अलावा पिछले साल बाढ़ में लाखों पशु बह जाने से दूध की आपूर्ति प्रभावित हुई है। सतीश ने कहा, 'एसएमपी के आयात को मंजूरी देने से किसानों की आमदनी घटेगी, जिससे 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का प्रधानमंत्री का लक्ष्य भी दूर हो जाएगा। यह खाद्य तेलों में भारत की गलती का दोहराव होगा।'
 
उन्होंने कहा कि तीन दशक पहले भारत खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर था। आज भारत में खाद्य तेल की 65 फीसदी मांग आयात से पूरी हो रही है। इसकी वजह नीतिगत दखल ही थी।  एक निजी डेयरी के अधिकारी ने कहा, 'सहकारी डेयरियां केवल किसानों के लिए काम कर रही हैं। लेकिन निजी डेयरियां उपभोक्ताओं को लेकर भी फिक्रमंद हैं। इसलिए आयात से निश्चित रूप से उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।'
Keyword: milk, farm, dairy, SMP,,
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