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रियल एस्टेट व छोटे उद्यमों को मिली मदद

सुब्रत पांडा और नम्रता आचार्य / मुंबई/कोलकाता February 06, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कर्ज के एकमुश्त पुनर्गठन की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2020 कर दी है, जो 31 मार्च, 2020 को खत्म होने जा रही थी। कर्जदाता संपत्ति के वर्ग के फिर से वर्गीकरण किए बगैर एमएसएमई के कर्ज का पुनर्गठन कर सकेंगे। साथ ही मौजूदा दौर में संकट से जूझ रहे रियल एस्टेट क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए रिजर्व बैंक ने वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए परियोजना ऋण के वाणिज्यिक परिचालन (डीसीसीओ) को शुरू करने की तारीख का भी विस्तार किया है। यह सुविधा उन मामलों में मिलेगी जहां परियोजना में देरी प्रवर्तकों की वजह से नहीं हुई है। इस सुविधा को संपत्ति वर्गीकरण को घटाए बिना एक साल के लिए बढ़ाया गया है। 

 
एमएसएमई कर्ज के पुनर्गठन विंडो को विस्तार बजट घोषणा के बाद दिया गया है, जिसमें वित्त मंत्री ने रिजर्व बैंक से अनुरोध किया था कि वह एमएसएमई कर्ज के पुनर्गठन विंडो की अवधि मार्च 2021 तक बढ़ाए, जो अभी मार्च 2020 है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा था कि रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए पुनर्गठन विंडो से पिछले एक साल के दौरान 5 लाख एमएसएमई को मदद मिली है। रिजर्व बैंक ने कहा है, '... यह फैसला किया गया है कि संपत्ति के वर्गीकरण को घटाए बगैर एकमुश्त पुनर्गठन के लाभ को विस्तार की सुविधा जीएसटी में पंजीकृत उन एमएसएमई खातों को दिया जाए, जहां चूक 1 जनवरी 2020 तक हुई है। इस योजना के तहत पुनर्गठन 31 दिसंबर 2020 तक किया जा सकेगा।' 
 
रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए विंडो से कर्जदाता एमएसएमई कर्ज का फिर से वर्गीकरण बगैर उनका पुनर्गठन कर सकेंगे, जिन मामलों में चूक 1 जनवरी 2020 तक हुई है। इसके पहले रिजर्व बैंक ने संपत्ति के वर्गीकरण को घटाए बगैर एकमुश्त पुनर्गठन की सुविधा उन कर्ज के लिए दी थी, जिनमें चूक 1 जनवरी 2019 तक हुई है।  लेकिन रिजर्व बैंक ने इसमें एक शर्त भी लगाई है। पुनर्गठन विंडो का लाभ उन्हीं एमएसएमई को मिलेगा, जो वस्तु एवं सेवा कर के तहत पंजीकृत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पुनर्गठन योजना जीएसटी पंजीकरण की शर्त के बगैर आती तो पुनर्गठन वाले कर्ज की मात्रा बहुत ज्यादा होती। 
 
यूनियन बैंक आफ इंडिया के एमडी और सीईओ अशोक कुमार प्रधान ने कहा, 'जो एमएसएमई एनपीए बनने के  कगार पर हैं, उन्हें बचा लिया गया है।' भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, 'एमएसएमई के कर्ज के पुनर्गठन की तिथि बढ़ाने से उस क्षेत्र को भी मदद मिलेगी, जो मौजूदा कारोबारी सुस्ती की मार झेल रहे हैं और यह बजट घोषणा के मुताबिक है।' रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के पहले 8 महीने में नवंबर के आखिर तक सूक्ष्म एवं लघु क्षेत्र में कर्ज की वृद्धि दर ऋणात्मक -3.4 प्रतिशत रही है। मझोले उद्यमों के मामले में यह 03.6 प्रतिशत रही है। 
 
जहां तक बगैर संपत्ति वर्गीकरण को घटाए वणिज्यिक रियल एस्टेट के परियोजना ऋण के डीसीसीओ के एक साल के विस्तार का सवाल है, विशेषज्ञों का कहना है कि इससे डेवलपरों को परियोजनाएं पूरी करने में कुछ मदद मिलेगी, जो नकदी के संकट की वजह से अटक गई हैं। कुमार ने कहा, 'परियोजना ऋण के डीसीसीओ को एक साल और विस्तार दिए जाने से रियल एस्टेट क्षेत्र को परियोजना पूरी करने पर ध्यान देने का मौका मिलेगा।'  इस कदम का लाभ डेवलपरों और हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों (एचएफसी) दोनों को ही मिलेगा। रिजर्व बैंक द्वारा राहत की घोषणा किए जाने के बाद एचएफसी के शेयर तेजी से बढ़े। इंडिया बुलल्स हाउसिंग फाइनैंस का शेयर 15.3 प्रतिशत बढ़ा। उसके बाद एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस और पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस के शेयर क्रमश: 8.2 प्रतिशत और 4.9 प्रतिशत चढ़े हैं। 
Keyword: RBI, SBI, repo rate, loan, interest, real estate,,
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