बिजनेस स्टैंडर्ड - आरबीआई के दायरे में शहरी सहकारी बैंक
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आरबीआई के दायरे में शहरी सहकारी बैंक

सोमेश झा / नई दिल्ली February 05, 2020

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भारत के शहरी और बहु-राज्यीय सहकारी बैंकों से संबंधित निगरानी और अंकेक्षण के और अधिकार मिलने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बैंकिंग नियमन संशोधन अधिनियम, 2020 को आज मंजूरी दे दी गई। इस कदम का मकसद इन बैंकों पर आरबीआई को ज्यादा नियामकीय नियंत्रण प्रदान करना है। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा, 'वाणिज्यिक बैंकों की तरह ही बहु-राज्यीय और शहरी सहकाराी बैंकों को भी आरबीआई के नियमन के तहत लाया जाएगा। हालांकि यह बदलाव केवल बैंकिंग से जुड़े कामकाज के लिए होंगे और प्रशासनिक अधिकार पहले की तरह पंजीयक के पास बने रहेंगे।'
 
उन्होंने कहा कि इस तरह के सहकारी बैंकों का ऑडिट आरबीआई के नियमन के अनुसार होगा और नियामक की ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन कार्यप्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही आरबीआई ऐसे बैंकों के बोर्ड सदस्यों के लिए न्यूनतम पात्रता स्तर भी तय करेगा और मुख्य कार्याधिकारी नियुक्त करने के लिए नियामक की सहमति लेनी होगी। वर्तमान में इस तरह के बैंकों के प्रबंधन के को सहकारी निकायों द्वारा चुना जाता है और उनकी नियुक्तियों को लेकर आरबीआई के पास सीमित अधिकार होते हैं। जावडेकर ने कहा, 'स्थिति बिगडऩे पर आरबीआई को बोर्ड को निरस्त करने का अधिकार होगा। इन सभी उपायों से बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय स्थायित्व आएगा और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा होगी। आरबीआई चरणबद्घ तरीके से सहकारी बैंकों को अपने अंतर्गत लाएगा।'
 
सरकार की ओर यह कदम पंजाब ऐंड महाराष्ट्र सहकारी बैंक में धोखाधड़ी के खुलासे के बाद उठाया गया है। इस मामले में प्रबंधन पर कथित तौर पर 6,700 करोड़ रुपये का कर्ज रियल एस्टेट कंपनी एचडीआईएल को गलत तरीके से देने का आरोप है। धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद बैंक का परिचालन प्रभावित हुआ और आरबीआई ने जमाकर्ताओं पर निकासी सीमा लगा दी और बैंक के कामकाज को देखने के लिए प्रशासक नियुक्त किया। इस तरह के बैंकों पर आरबीआई तथा संबंधित राज्यों एवं केंद्र सरकार का दोहरा नियंत्रण होता है जिसकी वजह से नियामक समय पर सहकारी बैंकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाता है। हालांकि विधेयक में प्रस्तावित बदलावों के बाद भी सहकारी बैंकों के एक छोटे हिस्से पर ही आरबीआई का पूरा नियंत्रण होगा। मार्च 2019 तक कुल 97,792 सहकारी बैंकों में से 1,544 शहरी सहकारी बैंकों की हिस्सेदारी महज 1.6 फीसदी थी जबकि 96,248 ग्रामीण सहकारी बैंकों की कुल सहकारी बैंकों की परिसंपत्ति में करीब 65 फीसदी का योगदान है और इन पर संबंधित राज्य सरकारों का नियंत्रण है। जावडेकर ने कहा कि सहकारी बैंकों के करीब 8.6 करोड़ जमाकर्ताओं की कुल 5 लाख करोड़ रुपये की राशि जमा है। आरबीआई के पास शहरी सहकारी बैंकों की निगरानी का भी जिम्मा है और पूंजी पर्याप्तता, आय, परिसंपत्ति वर्गीकरण एवं प्रावधान, नकदी की जरूरत, समूह या एक कंपनी में निवेश के नियम आदि को लेकर उचित नियमों का सुझाव भी देता है।
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