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किसान बेच सकेंगे वेयरहाउस की ई-रसीद

राजेश भयानी / मुंबई February 05, 2020

वित्त मंत्री ने शनिवार को अपने बजट भाषण में जिस इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के साथ नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद (ई-एनडब्ल्यूआर) के एकीकरण की घोषणा की थी, वह एक-दो महीने में पूरा होने की उम्मीद है। वेयरहाउस रसीदें उन भंडारगृहों द्वारा जारी की जाती हैं जो किसी भंडारगृह में जमा की गई वस्तुओं का इलेक्ट्रॉनिक लेखा-जोखा रखते हैं और बाद में पूंजी बाजार में परिचालन करने वाले भंडारगृहों की तरह उनका हस्तांतरण करते हैं। अलबत्ता अब वेयरहाउस के सामान की रसीदें भी हस्तांतरित की जा सकती है और इसलिए इनका कारोबार भी किया जा सकता है। सीडीएसएल द्वारा स्थापित भंडारगृह - सीडीएसएल कमोडिटी रिपॉजिटरी लिमिटेड पहले से ही एकीकृत हो चुका है और ई-नाम पर कारोबार करने वाली वस्तुओं के लिए ई-एनडब्ल्यूआर जारी करना शुरू कर दिया है। एनसीडीईएक्स द्वारा स्थापित अन्य भंडारगृह एनईआरएल एकीकरण की प्रक्रिया में हैं।
 
एनईआरएल के प्रबंंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी केदार देशपांडे ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार चलते हुए हम पहले ही अपना भंडारगृह ई-नाम के साथ एकीकृत करने की प्रक्रिया में हैं। इस एकीकरण से किसानों को डब्ल्यूडीआरए के पंजीकृत वेयरहाउसों में गुणवत्तापूर्ण उपज का भंडारण करके नीलामी में भाग लेने में मदद मिलेगी जो पहले से ही देश भर में अपने वेयरहाउस नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। इसका मतलब यह है कि पंजीकृत वेयरहाउस बाजार स्थल बन जाएंगे। यह भारत में वेयरहाउस आधारित बिक्री की शुरुआत होगी। एक दृष्टिकोण के रूप में यह ई-नाम को देशव्यापी रूप से सफल बनाने का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। ई-एनडब्ल्यूआर तब उपयोगी होगा, जब किसान विनियामक द्वारा विनियमित वेयरहाउस में अपनी उपज रखें और उस वेयरहाउस को उप-मंडी या बाजार स्थल के रूप में अधिसूचित किया जाए। सरकार पहले ही राज्यों को नए एपीएमसी अधिनियम का पालन करने के लिए कह चुकी है जो वेयरहाउसों को बाजार स्थल के रूप में अधिसूचित करता है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना 40 से अधिक वेयरहाउसों को बाजार स्थल के रूप में अधिसूचित कर चुके हैं। कम से कम 15 अन्य राज्यों ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय को बताया है कि वे इस पर विचार कर रहे हैं।
 
ई-नाम मंडियों या कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) को इलेक्ट्रॉनिक रूप से जोडऩे वाला राष्ट्रीय नेटवर्क प्लेटफॉर्म है। इससे किसानों को उन राज्य में अपनी उपज के अधिकतम दाम प्राप्त करने में मदद मिलती है जिनमें वे उपज बेच रहे होते हैं। सामान्य बाजारों में किसानों को उस मंडी या एपीएमसी में प्रचलित दाम मिलते हैं जहां वे अपने उत्पाद पेश करते हैं। जबकि ई-नाम राज्य की सभी मंडियों और सभी राज्यों को एक राष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ता है, इसलिए अगर किसान इस इलेक्ट्रॉनिक रूप से बिक्री करते हैं तो उस राज्य की किसी भी मंडी में प्रचलित सबसे अच्छे दाम प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि जिंस डेरिवेटिव एक्सचेंजों पर इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिबल वेयरहाउस रसीदों की खरीद बढ़ रही है, लेकिन सरकार ई-नाम प्लेटफॉर्म पर ऐसी वेयरहाउस रसीदों को प्रोत्साहन और इन्हें जारी करने की सुविधा देने के लिए बाजार के सहभागियों के साथ बातचीत कर रही थी। इन रसीदों की उपयोगिता यह है कि बैंकों से पैसा लेने के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है और भौतिक जिंसों की डिलिवरी के स्थान पर भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
 
ई-नाम जैसे इलेक्ट्रॉनिक बाजार प्लेटफॉर्म पर किसानों को भौतिक रूप में जिंस लाने की जरूरत नहीं होती, अगर उनके पास विनियमित वेयरहाउस में जमा कराई गई वस्तुओं के एवज में जारी रसीदें हों, तो वे ही काफी रहती हैं। जिसों के बदले किसान एक्सचेंज पर केवल ऐसी रसीदें ही जमा कर देेता है। इन रसीदों के आधार पर उसकी वस्तुएं बिक्री के लिए रख दी जाती हैं और उसे बेहतरीन दाम मिल जाते हैं। दूसरी ओर खरीदार को रसीद मिल जाएगी और भंडारगृह किसान की जमा जिंस उस खरीदार को दे देंगे। किसान इन रसीदों का इस्तेमाल इनके एवज में कर्ज लेने के लिए भी कर सकता है और वह अपनी जिंसों की बिक्री के लिए बढिय़ा दाम मिलने तक इंतजार भी कर सकता। वह जिंसों को मंडियों में बेचने के दबाव से भी बच सकता है।
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