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छोड़ भी सकेंगे वैकल्पिक आयकर व्यवस्था!

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली February 04, 2020

बजट के बाद उद्योगों से बातचीत में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन पीसी मोदी ने आज साफ किया कि व्यक्तिगत करदाताओं को अपनी सुविधा के मुताबिक सालाना आधार पर नई व पुरानी कर दरों को अपनाने की स्वतंत्रता होगी। उन्होंने कहा कि सरकार सभी छूट व कटौती चरणबद्ध तरीके से खत्म करने को इच्छुक है, जिससे करदाता अपने को परेशानी में पाता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश की गई नई कर व्यवस्था के लाभ को बताते हुए मोदी ने कहा कि विकल्प मिलने से वेतनभोगी वर्ग को भी फायदा होगा और यह सही वक्त है कि पूरी व्यवस्था पर नए सिरे से विचार किया जाए। 
 
मोदी ने एसोचेम के एक कार्यक्रम में कहा, 'करदाताओं को पुुराने व नए व्यक्तिगत आयकर दरों को सालाना आधार पर चुनने का विकल्प होगा। करदाताओं के लिए कर ढांचा सरल बनाया गया है। मुझे लगता है कि यह सही वक्त है, जब पूरी व्यवस्था पर फिर से विचार किए जाने की जरूरत है और युवा लोग जो छूट और कटौती का लाभ नहीं पाते हैं, उनके लिए कम दरें आकर्षक होंगी।' उन्होंने कहा कि हमें युवा पीढ़ी को फैसला करने देना चाहिए कि वे अपना धन खर्च करना चाहते हैं या बचाना चाहते हैं। 
 
दो दरों में से एक का विकल्प चुनने और फिर से पहले वाली व्यवस्था में वापस जाने का विकल्प बहरहाल सिर्फ व्यक्तिगत या हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के लिए होगा, जिनकी कारोबार से आमदनी नहीं है। बजट ज्ञापन में कहा गया है कि कि जिन लोगों की कारोबार से आमदनी है, उन्हें एक बार कम कर का विकल्प चुनने के बाद पुराने दौर में वापस लौटने का विकल्प नहीं मिलेगा।  प्रस्ताव के मुताबिक 70 कर छूटोंं को हटाया जाएगा और 5 लाख से 7.5 लाख रुपये आमदनी वालों पर 10 प्रतिशत कर लगेगा, जो मौजूदा 20 प्रतिशत से कम है। वहीं 7.5 लाख से 10 लाख रुपये आमदनी पर 15 प्रतिशत कर लगेगा, जो मौजूदा 20 प्रतिशत से कम है। वहीं 10 से 12.5 लाख रुपये आमदनी पर 20 प्रतिशत कर लगेगा, जबकि अभी 30 प्रतिशत लगता था। 12.5 से 15 लाख रुपये सालाना आमदनी पर 25 प्रतिशत कर होगा, जबकि अभी 30 प्रतिशत लगता है। 15 लाख रुपये से ज्यादा आमदनी वालों पर 30 प्रतिशत कर लागू रहेगा।  सीतारमण ने सितंबर में घोषणा की थी कि मौजूदा कंपनियों के लिए कर दर 25-30 प्रतिशत से घटाकर 22 प्रतिशत की जाएगी, जो किसी तरह की छूट नहीं लेते है। लेकिन कम कर दर का विकल्प चुन चुके कॉर्पोरेट्स को पुराने कर का विकल्प अपनाने की अनुमति नहीं होगी। 
 
जीएसटी भुगतान करने वालों के लिए लॉटरी योजना
 
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीआईसी) के अंतरिम चेयरमैन जॉन जोसेफ ने कहा कि सरकार जीएसटी कर का भुगतान करने वालों के लिए एक लॉटरी योजना पर काम कर रही है, जिससे अनुपालन में सुधार हो सके। इसमें जीतने वाली राशि 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये के बीच होगी।  इस कदम का मकसद कर संग्रह बढ़ाना है, जो चालू वित्त वर्ष में आर्थिक मंदी और फर्जी इनवाइस के चलते लक्ष्य से पीछे चल रहा है। जोसेफ ने कहा, 'करदाता के हर जीएसटी बिल पर ईनाम जीतने वाली लॉटरी का टिकट होगा।' अधिकारी ने कहा कि लॉटरी योजना दिल्ली सरकार के मूल्यवर्धित कर के दौर में ग्राहकों को दिए गए प्रोत्साहन की तर्ज पर होगा। दिल्ली सरकार ने मूल्यवर्धित कर के समय में 2015 में बिल बनाओ ईनाम पाओ योजना शुरू की थी। 
Keyword: budget, nirmala sitaraman, economy, income tax,,
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