बिजनेस स्टैंडर्ड - झिझक छोड़ निवेश को आगे आए उद्योग जगत
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झिझक छोड़ निवेश को आगे आए उद्योग जगत

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 02 04, 2020

उद्योगपतियों से निवेश की अपील

उद्योग के हित में उठाए गए कदमों की दी जानकारी
वित्त मंत्री ने कहा कि आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि कॉरपोरेट कर में कटौती के बाद भी निवेश नहीं आ रहा

बिजनेस स्टैंडर्ड झिझक छोड़ निवेश को आगे आए उद्योग जगतकेंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय उद्योग जगत को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वह झिझक को दरकिनार कर नरम पड़ती अर्थव्यवस्था के विकास को बढ़ावा देने के लिए निवेश करे। उन्होंने कहा कि सरकार ने कारोबार के हित में कॉरपोरेट कर में कटौती, न्यूनतम वैकल्पिक कर खत्म कररने और  कंपनियों से लाभांश वितरण कर (डीडीटी) का बोझ हटाने जैसे कई उपाय किए हैं।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा बजट बाद आयोजित चर्चा में वित्त मंत्री ने कहा, 'हम जितना कर सकते हैं, उतना किया। हम उद्योग के रास्ते को आसान बनाने के लिए आगे भी काम करने को तैयार हैं। लेकिन मुझे नहीं लगता कि आज यह स्थिति है कि केवल सरकार के खर्च से आर्थिक वृद्धि में तेजी आ सकती है। अब मैं उम्मीद करती हूं कि अर्थव्यवस्था की गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए आप भी बराबर के इंजन बनें।' उन्होंने उद्योग के अगुआ को अर्थव्यवस्था में निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आलोचक कहते हैं कि सरकार ने कॉरपोरेट कर की दरें घटा दीं लेकिन निवेश कहां है? दर में कटौती किए छह महीने हो गए हैं।

सीतारमण ने कहा, 'मैं इससे बहुत खुश हूं। कम से कम बैंकों को पैसा मिल रहा है। अगर आप लाभांश दे रहे हैं तो यह अच्छा है क्योंकि पैसा शेयरधारकों के पास वापस जा रहा है। अगर आप डॉलर बचा रहे हैं तो मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि इस बचत का कहीं न कहीं सदुपयोग होगा।' 

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के फैसले के बाद कंपनियों को जो पैसा मिला है, उसे कहां लगाना है, इसका फैसला कंपनियों को ही करना है। उन्होंने सीआईआई के सदस्यों से कहा, 'सरकार और उद्योग, हर किसी को अर्थव्यवस्था की मदद करनी होगी। सभी को विकास का इंजन बनना होगा। आपमें उद्यमिता की भावना है और हम इसमें आपकी मदद करने वाले हैं।' उन्होंने कहा कि करदाताओं को रियायत के बिना कम कर दरों का विकल्प देने के उनके प्रस्ताव का मकसद कम कर दरों के साथ आसान व्यवस्था बनाना है। डीडीटी सहित सभी करों में भी यह देखने को मिलेगा।

आम बजट 2020-21 पर  भारतीय उद्योग जगत ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। उद्योग के एक धड़े का मानना है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए साहसिक सुधारों की जरूरत थी लेकिन बजट में ठोस उपाय नहीं किए गए। दूसरी ओर कुछ उद्योगपतियों का मानना है कि वित्त मंत्री के पास ज्यादागुंजाइश नहीं थी। 
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