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बजट से कपड़ा कारोबारी निराश

बीएस संवाददाता / मुंबई February 02, 2020

घरेलू कपड़ा उद्योग को मजबूत करने और आयात घटाने के मकसद से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन का प्रस्ताव किया है। इसके लिए चार साल में 1,480 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट  प्रस्ताव को कारोबारी उम्मीद से काफी कम मानते हुए इसे महज झुनझुना करार दे रहे हैं क्योंकि पहले से लागू प्र्रौद्योगिकी उन्नयन कोष (टफ) योजना में मंजूर की गई रकम ही नहीं मिल रही है। ऐसे में इस योजना पर कारोबारियों को संदेह है। आयात घटाने के मकसद से बजट में वस्त्र मिशन का प्रस्ताव किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 का बजट पेश करते हुए कहा कि उद्योग एवं वाणिज्य क्षेत्र के विकास एवं संवद्र्धन के लिए 27,300 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। इस साल से केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों द्वारा निर्यातकों को शुल्कों और करों के डिजिटल तरीके से रिफंड की अनुमति होगी। बुनियादी ढांचागत क्षेत्र के लिए परियोजना तैयारी सुविधाएं और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति जल्द आएगी।
 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लोकसभा में बजट पेश करते हुए कहा, 'राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति जल्द ही जारी की जाएगी।' उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा प्रमुख नियामकों की भूमिकाएं स्पष्ट की जाएंगी। इससे एकल खिड़की वाले ई-लॉजिस्टिक्स बाजार का सृजन होगा तथा एमएसएमई प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि सरकार वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिये लॉजिस्टिक्स खर्च कम करने की कोशिश कर रही है। भारत में लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी के करीब 14 प्रतिशत के बराबर है। इसे घटाकर जीडीपी के नौ प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य है।
 
भारत मर्चेन्ट्स के अध्यक्ष विजय कुमार लोहिया ने कहा कि आम बजट ने कपडा उद्योग और आम आदमी को निराश किया है। कपड़ा मिशन के तहत मात्र 1,480 करोड रुपये दिए गए है जो उम्मीद से काफी कम है। पहले ही टफ में मंजूर की गई रकम नही मिल रही है। बैंकों की डूबती स्थिति को देखते हुए जमा राशि का बीमा एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख करना स्वागत योग्य है। लेकिन आय कर की वर्तमान दरों में कोई परिवर्तन न कर एक नया स्लैब लाया गया है जिसमे किसी भी तरह की छूट का लाभ करदाता को नही मिलेगा।
 
कपडा़ कारोबारी राजीव सिंघल कहते हैं कि कर स्लैब से बचत हतोत्साहित की गई है। कपड़ा उद्योग बजट से बहुत उम्मीद लगाए बैठा था पर उसे निराशा ही हाथ लगी। कपड़ा उद्योग कृषि के बाद सबसे ज्यादा रोजगार प्रदान करता है। कृषि को 2.83 लाख करोड रुपये आंवटित किए गए हैं लेकिन कपडा उद्योग को इसमें अनदेखा किया गया है। हिन्दुस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष उत्तम वी जैन कहते हैं कि कुल मिलकर बजट को संतुलित कहा जा सकता है, लेकिन कपड़ा उद्योग की बातें स्पष्ट नहीं हो रही हैं। जब तक जमीनी हकीकत नहीं दिखेगी, तब तक योजनाओं से कुछ नहीं होने वाला है।
Keyword: budget, nirmala sitaraman, cotton, textiles,
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