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घरेलू खाद्य तेल उद्योग के पास बेहतरीन मौका

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली February 02, 2020

मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने जब पिछले साल अक्टूबर में संयुक्त राष्ट्र की 74वीं महासभा में अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदलने के भारत सरकार के कदम की आलोचना की थी तो घरेलू खाद्य तेल उद्योग सतर्क हो गया था। नरेंद्र मोदी सरकार के महातिर की आलोचना को हल्के में लेने की उम्मीद नहीं थी और उद्योग की संस्था ने स्थानीय आयातकों को मलेशिया से परिष्कृत पाम तेल के नए अनुबंध करने में सतर्कता बरतने की अनौपचारिक सलाह दी। जाहिर है कि ऐसा करने में उद्योग भू-आर्थिक वास्तविकताओं को समझ रहा था। भारत मलेेशिया के पाम तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। निर्यात बढ़ाने की मलेशिया की कोशिशें भारतीय खाद्य तेल रिफाइनरी उद्योग के लिए तनाव का कारण रही हैं। 
 
भारत सालाना 90 से 95 लाख टन पाम तेल का आयात करता है। इसमें कच्चा और परिष्कृत तेल शामिल है। इसमें से 25 से 30 लाख टन तेल मलेशिया से ज्यादातर परिष्कृत रूप में आता है। बाकी कच्चे तेल के रूप में आता है। इसका अधिकांश हिस्सा इंडोनेशिया से आता है। जनवरी, 2019 में भारत ने मलेशिया के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) के तहत परिष्कृत पाम तेल पर आयात आयात शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 45 फीसदी कर दिया। इस तरह मलेशिया से होने वाले परिष्कृत और कच्चे तेल के आयात शुल्क में अंतर 10 फीसदी से घटकर 5 फीसदी रह गया। 
 
आयात पर इसका नाटकीय प्रभाव देने को मिला। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से सितंबर 2019 तक भारत ने 24 लाख टन परिष्कृत पाम तेल का आयात किया जो 2018 में समान अवधि में 17.4 लाख टन था। इस तरह पिछले साल इसमें 38 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इसमें से अधिकांश तेल का आयात मलेशिया से किया गया।  इसकी वजह से घरेलू तिलहन रिफाइनरी उद्योग की परेशानी बढ़ गई और उनके कारोबार पर संकट के बादल छा गए। घरेलू तिलहन रिफाइनरों की मुख्य संस्था सॉल्वेंट एक्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा, 'भारत को परिष्कृत पाम तेल पर आयात शुल्क में कटौती करने के लिए मजबूर किया गया। वहां के  उद्योग ने भारत को परिष्कृत तेल की आपूर्ति के लिए जोर लगाया जिससे यहां घरेलू रिफाइनरों की समस्या बढ़ गई।' जनवरी 2019 में भारत की रिफाइनिंग क्षमता 60 फीसदी से घटकर सितंबर में 30 से 40 फीसदी पर आ गई। खाद्य तेल का वर्ष नवंबर से शुरू होकर अक्टूबर तक चलता है।
 
परिष्कृत पाम तेल के आयात में तेल से परेशान एसईए ने केंद्र से गुहार लगाई। सितंबर में मलेशिया से परिष्कृत पाम तेल के आयात पर छह महीने के लिए 5 फीसदी सेफगार्ड ड्यूटी लगाई गई। इससे मलेशिया से परिष्कृत और कच्चे पाम तेल के बीच आयात शुल्क का अंतर एक बार फिर 10 फीसदी हो गया जो पड़ोसी देश इंडोनेशिया के बराबर है।  संयुक्त राष्ट्र महासभा में महातिर के बयान के बाद शुरुआत में परिष्कृत पाम तेल आयातकों ने आयात से परहेज किया लेकिन जब आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया तो उन्होंने मलेशिया से फिर से आयात के ऑर्डर देने शुरू कर दिए और आयात होने लगा। नवंबर 2019 में परिष्कृत पाम तेल का आयात करीब 122,409 टन पहुंच गया जो अक्टूबर से 3.31 फीसदी अधिक है। 
 
इसके बाद जनवरी 2020 में भारत ने 2010 के आसियान मुक्त व्यापार समझौते के तहत परिष्कृत पाम तेल पर आयात शुल्क 50 से घटाकर 45 फीसदी और पहली बार कच्चे पाम तेल पर 40 से घटाकर 37.5 फीसदी कर दिया। इससे परिष्कृत और कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क में एक बार फिर 7.5 फीसदी का अंतर आ गया। साथ ही मलेशिया और इंडोनेशिया ने भी 1 जनवरी, 2020 से निर्यात संरक्षण उपायों की घोषणा की। इसका नतीजा यह हुआ कि भारतीय आयातकों के लिए कच्चे और परिष्कृत पाम तेल पर आयात शुल्क का अंतर केवल 2.5 फीसदी रह गया।
 
कुछ हफ्ते पहले महातिर ने एक बार फिर भारत सरकार की आलोचना की। इस बार उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिंदू और मुसलमान भारत में 70 वर्षों से शांति से रह रहे हैं। इस बार केंद्र ने त्वरित कार्रवाई करते हुए परिष्कृत पाम तेल के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में रख दिया और आपूर्ति पर नजर रखने के लिए आयात लाइसेंस जारी करने की योजना की घोषणा की। यह कुशल आर्थिक कूटनीति का उदाहरण नहीं हो सकता है लेकिन यह घरेलू खाद्य तेल उद्योग के लिए वरदान बनकर आया है। सीईए के मेहता ने कहा, 'निश्चित रूप से रिफाइनरों और किसानों के लिए यह वरदान बनकर आया है।'
 
घरेलू किसानों को इससे फायदा हुआ है क्योंकि घरेलू तिलहन की कीमतों तीन साल से अधिक समय के बाद बढ़ी हैं। एग्मार्केट.एनआईसी.इन के आंकड़ों के मुताबिक इंदौर मंडी में 16 सितंबर 2019 से 16 जनवरी 2020 के बीच सोयाबीन की औसत कीमत 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी जो 2019-20 फसल वर्ष के लिए 3,710 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से करीब 6 फीसदी अधिक है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के एक हालिया नोट में कहा गया है कि परिष्कृत पाम तेल के आयात पर पाबंदी से न केवल घरेलू रिफाइनरों की दक्षता बढ़ेगी बल्कि मार्जिन में भी सुधार होगा। 
 
हालांकि किसान और रिफाइनर सरकार की बदले की भावना से की गई कार्रवाई से फायदा उठा रहे हैं लेकिन इस व्यापार युद्ध को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अगले सप्ताह दावोस में मलेशिया के अपने समकक्ष से नहीं मिलेंगे। इसके लिए उनके व्यस्त कार्यक्रम का हवाला दिया जा रहा है लेकिन दोनों के बीच कार्यक्रम के इतर मुलाकात हो सकती है। इस बीच महातिर ने नुकसान से बचने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि भारत के खिलाफ कदम उठाने के लिए उनका देश बहुत छोटा है। मेहता का कहना है कि उद्योग चाहता है कि लाइसेंस रूट का दुरुपयोग न हो। अगर ऐसा हुआ तो देश में फिर आयातित परिष्कृत तेल की बाढ़ आ जाएगी। फिलहाल, घरेलू उद्योग के पास इस कूटनीतिक संघर्ष का फायदा उठाने का बेहतरीन मौका है।
Keyword: palm oil, export, import, malaysia,
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