बिजनेस स्टैंडर्ड - लाभांश नीति बदल सकती हैं कंपनियां
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लाभांश नीति बदल सकती हैं कंपनियां

सचिन मामबटा और समीर मुलगांवकर / मुंबई 02 02, 2020

पूंजी पर रिटर्न के तरीके में बदलाव संभव

बिजनेस स्टैंडर्ड लाभांश नीति बदल सकती हैं कंपनियांलाभांश कर नीति में बदलाव के बाद भारतीय कंपनियां शेयरधारकों को पूंजी पर रिटर्न देने के तरीके बदल सकती हैं। एसऐंडपी बीएसई 500 कंपनियों के विश्लेषण के पता चलता है कि भारत में निजी क्षेत्र की कंपनियों के प्रवर्तकों को अब समान लाभांश के लिए कम से कम 20 फीसदी अतिरिक्त कर देना होगा। ऐसे में संभव है कि वे पुनर्खरीद जैसे वैकल्पिक उपायों को अपना सकते हैं। आम बजट में कहा गया है कि लाभांश पर कर की देनदारी अब शेयरधारकों यानी लाभांश प्राप्त करने वालों की होगी। इसका मतलब है कि प्रवर्तकों को, जो पहले ही उच्च कर दायरे में आते हैं, उन्हें प्राप्त लाभांश पर 42.7 फीसदी की दर से कर चुकाना होगा। लाभांश वितरण कर (डीडीटी) करीब 20.56 फीसदी है। नई व्यवस्था से पहले कंपनी शेयरधारकों को लाभांश देने से पहले कर चुकाती है।

सरकार का कहना है कि कंपनियों से डीडीटी का बोझ हटाने से सरकार को करीब 25,000 करोड़ रुपये की चपत लगेगी लेकिन बीएसई 500 के अधिकतर प्रवर्तक उच्च कर दायरे के हिसाब से अपने लाभांश पर कर चुका सकते हैं। बिज़नेस स्टैंडर्ड के विश्लेषण में बीएसई 500 से सरकारी कंपनियों को शामिल नहीं किया गया क्योंकि कर और लाभांश दोनों सरकार के पास ही जाता है।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों को नई व्यवस्था में जरूर लाभ होगा और उन्हें भी इस सूची से बाहर रखा गया है। ऐसे में इस सूची में अब 387 कंपनियां बचती हैं। इन कंपनियों के प्रवर्तकों को पुरानी व्यवस्था में लाभांश पर 20.56 फीसदी कर देना पड़ता है। लेकिन नई व्यवस्था में उनकी कर देनदारी बढ़ जाएगी। गैर-कॉरपोरेट प्रारूप में प्रवर्तकों को 42.7 फीसदी का कर देना होगा। इसका मतलब हुआ कि इन कंपनियों के प्रवर्तकों को पहले से दोगुना कर चुकाना होगा।

डेलायट हस्किंस ऐंड सेल्स में पार्टनर राजेश एच गांधी ने कहा, 'प्रवर्तकों को लाभांश पर अब पहले से ज्यादा कर देना होगा। लाभांश पर 20.56 फीसदी कर लगता है। लेकिन प्रवर्तकों के उच्च कर दायरे में आने की वजह से लाभांश प्राप्ति पर उन्हें 42.74 फीसदी के हिसाब से कर का भुगतान करना होगा क्योंकि इसे करदाता की आय मानी जाएगी। इसके साथ ही कॉरपोरेट ढांचे में शेयरधारिता पर लाभांश कर 25.17 फीसदी जबकि ट्रस्ट के मामले में उच्च दरों पर कर देना होगा। दिलचस्प है कि शेयर पुनर्खरीद अब ज्यादा आकर्षक होगा क्योंकि इस पर 20 फीसदी की दर से कर लगता है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।'

ईवाई इंडिया में इंटरनैशनल टैक्स ऐंड ट्रांजेक्शन सर्विसेज के नैशनल लीडर प्रणव सत्या ने कहा कि इस कदम से विदेशी निवेशकों को फायदा होगा। दूसरी ओर कर संग्रह काफी चुनौती भरा होगा क्योंकि पहले जहां कंपनियों से इसे वसूलने में सहूलियत होती थी वहीं अब शेयरधारकों की बड़ी संख्या से यह कर वसूलना होगा। उन्होंने कहा कि इसकी निगरानी करना असान नहीं होगा।
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