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बजट और कोरोनावायरस की वजह से बाजार में रहेगी अस्थिरता

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली February 02, 2020

बाजारों को वित्त वर्ष 2020-21 के बजट प्रस्ताव रास नहीं आए हैं। शेयर बाजारों में बजट के दिन वर्ष 2009 के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स करीब 1,000 अंक गिरकर बंद हुआ।  आर्थिक वृद्धि को तेज करने के लिए बजट में उपायों के अभाव, अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा अधिक रहने के आसार, राजस्व की कमी पूरी करने के लिए भारी विनिवेश लक्ष्य और दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) जैसे अहम मुद्दों पर कोई राहत नहीं दिए जाने से बाजार निराश हुआ है। अब ज्यादातर विशेषज्ञ कम से कम लघु से मध्यम अवधि में शेयर बाजार की राह को लेकर सतर्कता बरतने का सुझाव दे रहे हैं। उनका अनुमान है कि आगे अर्थव्यवस्था और सुस्त पड़ेगी, जिससे ऊंचे मूल्यांकन और नकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच कंपनियों की आमदनी पर असर पड़ेगा। उनका मानना है कि इससे बाजार के एक सीमित दायरे में और अस्थिर रहने के आसार हैं। 
 
उदाहरण के लिए नोमुरा के विश्लेषकों का अनुमान है कि 2019 की चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि में और गिरावट आएगी। इसके 4.3 फीसदी हो जाएगी, जो तीसरी तिमाही में 4.5  फीसदी थी। उनका अनुमान है कि वित्त वर्ष 2020-21 में वृद्धि अनुमान से कम 5.7 फीसदी रहेगी, जो वित्त वर्ष 2020 में 4.7 फीसदी अनुमानित है।  बजट के बाद के एक नोट में नोमुरा की प्रबंध निदेशक और भारत में प्रमुख अर्थशास्त्री सोनल वर्मा ने लिखा, 'हम बजट को वृद्घि और महंगाई के लिए तटस्थ रूप में देखते हैं। 
 
कर्ज कम करने के लंबे चक्र और संकटग्रस्त वित्तीय क्षेत्र की वजह से मौजूदा मंदी से वृद्धि में सुधार आने में लंबा समय लगेगा। हमारा अनुमान है कि आरबीआई नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और 6 फरवरी को अगली नीतिगत समीक्षा में तटस्थ रुख बनाए रखेगा।' कोटक सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2021 में आमदनी में बढ़ोतरी की गुणवत्ता 'काफी कमजोर' रहेगी क्योंकि आमदनी में 74 फीसदी बढ़ोतरी बैंकों, तेल एवं गैस और धातु एवं खनन क्षेत्रों की बदौलत होती है। 
 
उनका मानना है कि बजट प्रस्तावों का खपत या निवेश मांग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के प्रबंध निदेशक और सह-प्रमुख संजीव प्रसाद की अगुआई वाले विश्लेषकों ने कहा, 'इन क्षेत्रों की आमदनी में तगड़ी वृद्धि बैंकों और दूरसंचार कंपनियों का वित्त वर्ष 2020 में निम्न आधार और वित्त वर्ष 2021 के वैश्विक आर्थिक सुधार को दर्शाती है।  अगर अगले कुछ सप्ताह में कोरोनावायरस का मुुद्दा गंभीर बनता है और यह एक वैश्विक महामारी की शक्ल लेती है तो आमदनी निराश कर सकती है।'बजट आ चुका है, इसलिए एवेंडस कैपिटल स्ट्रेटजी के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड का अनुमान है कि बाजार घरेलू अर्थव्यवस्था की सुस्ती को मद्देनजर रखते हुए वैश्विक कारकों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू करेंगे। हॉलैंड ने कहा, 'सोमवार को निवेशक वैश्विक बाजारों और कोरोनावायरस के असर को देखना शुरू करेंगे। अब विदेशी निवेशक भारत को वैश्विक घटनाक्रमों के संदर्भ में देखेंगे। इन बजट प्रस्तावों के बाद उनके लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर उत्साहित होने के लिए कुछ नहीं है। 
 
मिड और स्मॉल कैप में कोई सुधारात्मक बदलाव आने में भी देरी होगी। प्रत्येक क्षेत्र की बड़ी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी सुस्त अर्थव्यवस्था में भी बढ़ती रहेगी।'विदेशी निवेशकों ने जनवरी में भारतीय बाजारों में 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। वे लगातार पांचवें महीने भारतीय शेयरों के शुद्ध खरीदार रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि शेयरों में एफपीआई का निवेश सितंबर में 7,547.8 करोड़ रुपये, अक्टूबर में 12,367.9 करोड़ रुपये, नवंबर में  25,230.6 करोड़ रुपये और दिसंबर में 7,338.4 करोड़ रुपये रहा। एसबीआई म्युचुअल फंड के कार्यकारी निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी नवनीत मुनोत ने कहा, 'शुरुआती प्रतिक्रिया के बाद उम्मीद की जानी चाहिए कि निवेशक फिर से आमदनी और वैश्विक संकेतों पर ध्यान देना शुरू करेंगे। बजट में वृद्धि को अहम प्रोत्साहन नहीं मिलने और कोरोनावायरस फैलने से सतर्क वैश्विक माहौल होने के कारण बाजार निकट भविष्य में अस्थिर रहेंगे।'
Keyword: budget, nirmala sitaraman, economy, revenue, fiscal deficit, share market, corona virus,,
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