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वित्तीय क्षेत्र के लिए मजबूती

बीएस संवाददाता /  February 01, 2020

नकदी प्रवाह सुनिश्चित करने और खुद के लिए रकम जुटाने के महत्त्व को महसूस करते हुए सरकार ने आज वित्तीय क्षेत्र के लिए कई उपायों की घोषणा की। इसी क्रम में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराने की भी योजना बनाई गई है। साथ ही, बैंक जमाकर्ताओं के लिए बीमा की रकम को 1 लाख रुपये से पांच गुना बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव दिया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2020-21 के लिए अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने अब आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये एलआईसी में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने की योजना बनाई है। एलआईसी में भारत सरकार का 100 फीसदी स्वामित्व है जिसे उसकी पॉलिसियों पर सॉवरिन गारंटी का संकेत माना जाता है।

 
केंद्रीय वित्त सचिव राजीव कुमार ने बजट के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विनिवेश लक्ष्य को काफी हद तक एलआईसी और आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री के जरिये पूरा किया जाएगा। अब तक जीवन बीमा क्षेत्र में तीन सूचीबद्ध कंपनियां- एचडीएफसी लाइफ, एसबीआई लाइफ और आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस- और तीन गैर-जीवन बीमा कंपनियां हैं। आईसीआईसीआई डायरेक्ट की विश्लेषक काजल गांधी ने कहा कि एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी होने के नाते एलआईसी के मूल्यांकन में निजी कंपनियों के मुकाबले अंतर दिख सकता है। यहां तक कि उसकी 25 से 30 फीसदी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों पर भी मूल्यांकन करीब 8 से 10 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। जबकि एकमुश्त 10 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री बाजार के लिए कठिन होगा और सरकार इसे काफी हद तक करने की कोशिश कर सकती है।
 
अश्विन पारीख एडवाइजरी सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारीख ने कहा कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार एलआईसी की योजनाओं के लिए सॉवरिन गारंटी जारी रखेगी। यदि वह सॉवरिन गारंटी को बरकरार रखती है तो प्रशासन पर सवाल उठ सकते हैं। जबकि सूचीबद्ध होने के साथ ही सरकार विभिन्न संगठनों का वित्त पोषण नहीं कर सकती है जैसार एलआईसी अब तक करती रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से प्रशासन संबंधी जरूरतों का उल्लंघन होगा। एलआईसी को सूचीबद्ध कराने की बात पिछले 10 वर्षों से चल रही है। इसकी शुरुआत 2005 में एलआईसी के बोर्ड के जरिये की गई थी। उस समय सरकार चिंतित थी क्योंकि एलआईसी ने कई गारंटी वाली योजनाएं जारी की थी। उस दौरान एलआईसी की पूंजी 5 करोउ़ रुपये थी और सरकार ने स्पष्ट किया था कि एआईसी की पॉलिसियों की सभी देनदारी एक सॉवरिन गारंटी होगी। पारीख ने कहा कि फिलहाल एलआईसी के पास 200 करोड़ रुपये की पूंजी है। सरकार सॉल्वेंसी अनुपात में सुधार के लिए बीमा कंपनियों के पुनर्पूंजीकरण के लिए 6,950 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश भी करेगी। साथ ही वह नियामकीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पूंजी जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) को बरकरार भी रखेगी। सरकार तीन सरकारी स्वामित्व वाली गैर-जीवन बीमा कंपनियों को सुदृढ़ करने के लिए कदम पहले ही उठा चुकी है।
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