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ज्यादा फायदा चाहिए तो पहले जैसा कर कटाइए

बीएस संवाददाता /  February 01, 2020

बजट 2020 के बाद अब करदाताओं के लिए दो कर व्यवस्थाएं मौजूद होंगी। पुरानी व्यवस्था बरकरार रहेगी जिसमें ऊंची कर दरें (आय के कई स्तरों परं लागू हैं, लेकिन इसमें विभिन्न कर रियायतें और छूट प्रदान की गई हैं। वहीं वित्त मंत्री द्वारा पेश नई कर व्यवस्था में कर दर कई लोगों के लिए कम रहेगी, लेकिन करदाता किसी कर छूट या रियायत का लाभ उठाने में सक्षम नहीं होंगे। विश्लेषकों का कहना है कि कर प्रणाली अब करदाता-केंद्रित हो गई है। हरेक करदाता को वित्त वर्ष के शुरू में अपनी स्थिति का अध्ययन करना होगा और उसके बाद यह निर्णय लेना होगा कि उसे नई कर व्यवस्था अपना चाहिए या पुरानी।

 
कई करदाताओं के लिए, पुरानी व्यवस्था से जुड़े रहना फायदेमंद साबित हो सकता है। क्लियरटैक्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता कहते हैं, 'हमारे विश्लेषणों से पता चला है कि जो लोग ज्यादा से ज्यादा कर लाभ लेना चाहते हैं उनके लिए पुराने कर स्लैब के साथ जुड़े रहना उचित होगा। ऐसे लोगों को नई कर व्यवस्था का चयन नहीं करना चाहिए।' करदाताओं के लिए कई तरह की छूट और रियायतें उपलब्ध हैं। वेतनभोगी कर्मचारी हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) और लीव ट्रेवल अलाउंस (एलटीए) का लाभ उठा सकते हैं। आवास ऋण ले चुके लोग अपनी ईएमआई के ब्याज वाले हिस्से और मूल रकम पर भी (धारा 80सी के तहत) 2 लाख रुपये तक की कर छूट का लाभ ले सकते हैं। धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट हासिल है। हर साल चुकाए जाने वाले स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कर छूट धारा 80डी के तहत बढ़कर 75,000 रुपये, अपने मूल परिवार के लिए प्रीमियम भुगतान पर 25,000 रुपये और अपने माता-पिता (यदि वे वरिष्ठï नागरिक हैं) पर चुकाए गए प्रीमियम के लिए 50,000 रुपये तक हो सकती है।  50,000 रुपये तक की अन्य छूट धारा 80सीसीडी (1बी) के तहत राष्टï्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत उपलब्ध हे। इसी तरह के कई और लाभ भी मौजूद हैं।
 
कर व्यवस्था का चयन में समस्या पैदा करने वाला एक प्रमुख कारक इसकी जटिल गणना से जुड़ा होगा। कुछ छूट की सीमा के अभाव की वजह से करदाताओं को यह तय करने में अनिश्चितता की स्थिति का सामना करना पड़ेगा कि उनके लिए कौन सी व्यवस्था उपयुक्त होगी। गुप्ता का कहना है, 'धारा 80ई के तहत शैक्षिक ऋण पर छूट हासिल है और इसमें कोई ऊपरी सीमा नहीं है।' करदाता उस ब्याज आय की किसी भी मात्रा के लिए कर छूट का दावा कर सकता है जो उसने वित्त वर्ष में चुकाई हो। वहीं अपने बच्चे की विदेश शिक्षा की जरूरत पूरी करने के लिए बड़ा शैऋिाक ऋण लेने वालों के लिए पुरानी कर व्यवस्था से जुड़े रहना समझदारी भरा निर्णय हो सकता है। 
 
जहां नई कर व्यवस्था सरल है, लेकिन करदाता को अपनी स्थिति के आधार यह निर्णय लेना है कि उसे इसका चयन करना है या नहीं। टैक्समान डॉटकॉम के डीजीएम नवीन वाधवा कहते हैं, 'यह पता कर लें कि आप कौन सी कर छूट एवं रियायत पाने के हकदार हैं। इसके बाद इसकी गणना करें कि क्या आपकी कर देनदारी नई व्यवस्था या फिर पुरानी व्यवस्था में कम हो जाएगी।' वह कुछ आंकड़ों का भी उदाहरण देते हैं। वह कहते हैं, 'यदि आपकी आय 8.5 लाख रुपये से कम है और आप सिर्फ 80सी के तहत छूट का दावा करना चाहते हैं तो नई कर व्यवस्था को न अपनाएं। दूसरी तरफ, यदि आपकी आय 8.5 लाख रुपये से ज्यादा है, और आपने सिर्फ धारा 80सी के तहत छूट का दावा किया है तो आपके लिए नई व्यवस्था का चयन करना समझदारी भरा हो सकता है।'
 
अब 5 लाख रुपये तक जमा का बीमा
 
बजट में सरकार ने जमाकर्ता के लिए जमा बीमा कवर 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, 'मैं यह बताना चाहती हूं कि सभी शिड्यूल्ड कमशर््ियल बैंकों की सेहत पर नजर रखने के लिए एक मजबूत व्यवस्था पर जोर दिया गया है और जमाकर्ताओं की पूंजी सुरक्षित है।' जमा बीमा कवर में वृद्घि 27 साल बाद की गई है। मई 1993 में जमा कवर 30,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये किया गया था। अब तक 1 लाख रुपये के जमा बीमा कवर के साथ, भारत में ब्रिक देशों की तुलना में सबसे कम जमा बीमा कवर था और पंजाब तथा महाराष्टï्र को-ऑपरेटिव बैंक में संकट के बाद जमा बीमा कवर की मांग बढ़ी है। 
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