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विदेशी निवेशकों को प्रोत्साहन

बीएस संवाददाता /  February 01, 2020

आम बजट में विदेशी निवेशकों को रिझाने के लिए कुछ उपायों की घोषणा की गई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए लाभांश पर कर की दर 20 फीसदी होगी। कुछ देशों के साथ भारत की संधियों में लाभांश पर कर की कम दर का प्रावधान है और अगर एफपीआई इसके पात्र हैं तो उन्हें इसका फायदा होगा। धु्रव एडवाइजर्स में पार्टनर सौमिल शाह ने कहा, 'विदेशी शेयरधारक कर संधि के तहत कमतर विदहोल्डिंग टैक्स का लाभ ले सकते हैं, बशर्ते वे इसकी मुख्य उद्देश्य पूरा करते हों।' नांगिया एंडरसन के पार्टनर सुनील गिडवानी ने कहा, 'लाभांश वितरण कर (डीडीटी) की जगह अब शेयरधारक पर कर लगाया जा रहा है। ऐसे में कर संधि की दर विदेशी निवेशकों के लिए उपलब्ध रहेगी। उदाहरण के लिए सिंगापुर और मॉरीशस के साथ कर संधियों के मुताबिक लाभांश पर कर की दर 5 फीसदी है, बशर्ते भारतीय कंपनी में हिस्सेदारी चुकता शेयर पूंजी की कम से कम 10 से 25 फीसदी हो। अन्यथा यह 15 फीसदी है। अब ये दरें लागू होंगी।'

 
अलबत्ता एफपीआई भारत में चुकाए गए कर के लिए अपने देश में क्रेडिट का दावा कर सकता है और संधि के तहत कम दर का दावा नहीं कर सकते हैं, अगर उनके देश में लाभांश पर कर की दर 20 फीसदी के बराबर या उससे अधिक है। पीडब्ल्यूसी इंडिया में एमऐंडए टैक्स के लीडर हितेन कोटक के मुताबिक डीडीटी भारतीय कंपनियों पर एक अतिरिक्त बोझ था और इससे विदेशी कंपनियों को भारतीय परिचालन कंपनियों में होल्डिंग कंपनियों या अपने निवेश का अधिग्रहण करना महंगा पड़ता है।
 
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) को भारत में ब्याज पर होने वाली कमाई पर कर में मिलने वाली छूट की अवधि बढ़ा दी गई है। एफपीआई को भारतीय कंपनियों और सरकारी प्रतिभूतियों द्वारा रुपये में जारी बॉन्ड पर ब्याज मिलता है। अभी उन्हें 5 फीसदी की दर से कर देना पड़ता है। अब यह व्यवस्था 30 जून, 2023 तक बरकरार रहेगी।  वर्ष 2013 में रुपये के लडख़ड़ाने के बाद सरकार ने एफपीआई के लिए कर की दर में कटौती की थी ताकि विदेशी निवेश को बाहर जाने से रोका जा सके। यह 31 मई, 2015 तक भुगतान किए गए ब्याज पर लागू किया गया था। 2014 में ऋण श्रेणी में रिकॉर्ड एफपीआई प्रवाह से सरकार ने दो बार रियायती दर की अवधि बढ़ाई थी। 
 
विशेषज्ञों का कहना है कि कर की कम दर के कारण भारतीय ऋण बाजार विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है। रियायती दर से सरकार और कंपनियों को उधारी लागत कम करने में मदद मिली है।  बजट में विदेशों में भारत केंद्रित फंडों का प्रबंधन कर रहे फंड मैनेजरों के लिए भी नियमों में कुछ ढील दी है ताकि वे फंड को भारत ला सकें। ऑफशोर फंड अब स्थापना के एक साल के भीतर 100 करोड़ रुपये का कोष हासिल कर सकते हैं। पहले यह अवधि छह महीने थी। 
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